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World Glaucoma Day 2021: चुपचाप आंखों को नुकसान पहुंचाता है ग्लूकोमा, जानिए कब लेनी चाहिए डॉक्‍टर की सलाह

अगर शुरुआत में ही ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद की पहचान हो जाए तो इससे होने वाले अंधेपन से बचा जा सकता है। ग्लूकोमा की पहचान होने के बाद आपको तुरंत एक्‍सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए।

Written By Atul Modi
Published : March 9, 2021 8:36 PM IST

ग्लूकोमा आंखों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसकी समय पर पहचान होनी जरूरी है।

इस बार 12 मार्च को विश्व ग्लूकोमा दिवस (World Glaucoma Day 2021) मनाया जा रहा है। जबकि 7 मार्च से 13 मार्च तक चलने वाला विश्‍व ग्लूकोमा सप्ताह (World Glaucoma Week 2021) भी पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है। ग्लूकोमा सप्ताह का इस वर्ष का विषय यह दर्शाता है की आंखों के नियमित परीक्षण के साथ, लोग अपने आस-पास का सौंदर्य, आकर्षण एवं रोमांच से भरपूर दुनिया को देखना जारी रख सकते हैं। दुनिया उज्ज्वल है, अपनी दृष्टि बचाओ और समय रहते अपनी आंखों की जांच करवाओ।

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद क्‍या होता है?

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद (Glaucoma) एक ऐसा नेत्र रोग है, जिसके इलाज में लापरवाही बरतने पर सदैव के लिए रोशनी जा सकती है। आंखों की अन्य बीमारियों में खोई हुई रोशनी इलाज से वापस भी लाई जा सकती है, लेकिन काला मोतिया में आंखों की रोशनी का आना मुश्किल होता है। सामान्‍य तौर पर 35 वर्ष से अधिक आयु के लोगो में यह बीमारी ज्‍यादा पाई जाती है। अगर शुरू में ही इसकी पहचान हो जाए तो ग्लूकोमा से होने वाले अंधेपन से मरीजों को बचाया जा सकता है।

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शार्प साईट आई हॉस्पिटल के वरिष्ठ ग्लूकोमा चिकित्सक डॉक्टर विनीत सहगल के अनुसार, जब हम किसी चीज को देखते है तो उसका प्रतिबिम्ब दृष्टि तंत्रिका द्वारा रेटिना से मस्तिष्क की तरफ ले जाया जाता है। इसके अंतर्गत लाखों तार होते है। इनमे से प्रत्येक तार मस्तिष्क तक एक सन्देश ले जाता है। ये सभी तार मिलकर साइड विजन प्रदान करने के साथ-साथ पढ़ने योग्य दृष्टि देते हैं। ग्लूकोमा इन तारों को नुकसान पंहुचा सकता है। इसकी वजह से दृष्टि में काले धब्बों का विकास हो जाता है।

डॉक्टर विनीत के अनुसार, आंख एक तरल प्रदार्थ का निर्माण करती है जो आंखों के भीतरी हिस्से को पोषण देता है। यह तरल प्रदार्थ विभिन्न माध्यम से आंखों के बाहर आता रहता है। एक सामान्य आंख में तरल पदार्थ के निर्माण एवं उनके बाहर निकलने के बीच संतुलन बना रहता है। इससे आंखों के अंदर के दबाव (इंट्राओक्युलर प्रेशर) में स्थिरता बनी रहती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ ये निकास मार्ग अवरुद्ध होने लगते हैं और तरल पदार्थ काम मात्रा में निकल पाता है। इसके परिणामस्वरूप आंखों के अंदर दबाव बढ़ जाता है। इस वजह से दृष्टि तंत्रिका को जो नुक्सान पहुँचता है उससे देखने की शक्ति प्रभावित होती है। इसी स्थिति को ग्लूकोमा या कला मोतिया कहा जाता है।

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कब लेनी चाहिए डॉक्‍टर की सलाह?

डॉक्टर विनीत के अनुसार, ग्लूकोमा की तीन मुख्य श्रेणियां होती हैं। पहली श्रेणी को प्राइमरी ओपन एंगल या क्रोनिक ग्लूकोमा कहते हैं, दूसरी श्रेणी क्लोज्ड एंगल या एक्यूट ग्लूकोमा और तीसरी श्रेणी कानजेनियल या सेकेंडरी ग्लूकोमा होती है। प्रारंभिक अवस्था में ग्लूकोमा सामान्य तौर पर कोई गौर करने लायक लक्षण नहीं प्रकट करता। क्रोनिक ग्लूकोमा इतनी धीमी गति से विकसित होता है की कुछ पता ही नहीं चलता। ऐसे में आपको समय-समय पर अपनी आंखों की जांच कराते रहना चाहिए, ताकि लक्षणों का पता लगते ही इससे बचा जा सके।

क्या है ग्लूकोमा के लक्षण

क्रोनिक ग्लूकोमा के कुछ सामान्य लक्षण ये हैं:

  • अंधेरे कमरे जैसे थिएटर में आंखों का सामंजस्य न बैठा पाना
  • चश्मे के पावर में काफी कम अवधि में बदलाव होना
  • वाह्य दृष्टि में लगातार कमी
  • धुंधला दिखाई देना

एक्यूट ग्लूकोमा की स्थिति जो की इंट्रोक्युलर प्रेशर (आंखों के अंदर दबाव) में वृद्धि की वजह से आती है। इसके लक्षण यह है, जैसे आंखों में अंध क्षेत्रों का एहसास, प्रकाश के चारों तरफ इंद्रधनुषी रंगों का प्रभामंडल नज़र आना, आंखों में तेज दर्द, चेहरे में दर्द, लाल आंखे, रोशनी के चारों तरफ प्रभामंडल के साथ धुंधली दृष्टि और मतली आना।

डॉक्टर विनीत के अनुसार जिन लोगों को ग्लूकोमा होने का अधिक खतरा रहता है उनमे यदि किसी के परिवार में ग्लूकोमा रहा है, मधुमेह की पृष्ठभूमि, ऊंचे माइनस या प्लस पावर का चश्मा पहनने वाले या हाइपरटेंशन से पीड़ित लोग।

क्‍या इस पर सिर्फ नियंत्रण संभव है?

डॉक्टर विनीत के अनुसार, इसका इलाज नहीं है। इसे सिर्फ नियंत्रित किया जा सकता है और दृष्टि तंत्रिका के और अधिक नुकसान की प्रक्रिया धीमी की जा सकती है या रोकी जा सकती है। यह नियंत्रण नियमित इलाज से संभव है। यह जीवनभर जारी रहने वाली प्रक्रिया है। डॉक्टर विनीत के अनुसार ग्लूकोमा का समय पर इलाज़ दृष्टि में और अधिक कमी तथा अंधेपन को रोक सकता है।

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