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Healthy Heart Tips in Hindi: आजकल हृदय रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। अस्वस्थ खान-पान, लंबे समय तक तनाव में रहना और खराब जीवनशैली हृदय रोगों के सबसे आम कारण माने जाते हैं। हालांकि, इनके अलावा भी कई अन्य कारक होते हैं, जो हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाते हैं। दिल के मरीजों को अपनी सेहत का खास ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है। खासकर, उन्हें कुकिंग ऑयल और घी का इस्तेमाल सोच-समझकर करने की सलाह दी जाती है। इसलिए दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि खाना पकाने में किस तरह का फैट इस्तेमाल किया जाए। भारतीय रसोई में परंपरागत रूप से घी का उपयोग होता रहा है, जबकि आधुनिक समय में रिफाइंड तेल का ज्यादा यूज हो रहा है। तो आइए, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर कंसल्टेंट-कार्डियोलॉजी डॉ. दीपक अग्रवाल (Dr. Deepak Agrawal, Sr. Consultant - Cardiology, Narayana Hospital, Jaipur) से जानते है कि हृदय रोगियों के लिए घी या रिफाइंड में से क्या ज्यादा फायदेमंद होता है?
घी एक नेचुरल फैट है, जिसे दूध से बनाया जाता है। इसमें सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है। अगर लंबे समय घी यानी सैचुरेटेड फैट का सेवन किया जाए, तो यह दिल की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए अगर आप हृदय रोगी हैं, तो सीमित मात्रा में ही घी का सेवन करें। सीमित मात्रा में घी का सेवन, दिल के मरीजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित होता है।
इसके अलावा, घी में मौजूद ब्यूटिरिक एसिड पाचन के लिए अच्छा माना जाता है। यह ट्रांस फैट फ्री होता है। साथ ही, घी हाई-हीट कुकिंग के लिए सुरक्षित होता है, क्योंकि यह आसानी से ऑक्सीडाइज नहीं होता है। इसलिए अगर आपको हृदय से जुड़ी कोई बीमारी है, तो आप घी का उपयोग कूकिंग के लिए कर सकते हैं। हालांकि, अधिक मात्रा में घी का सेवन करने से बचें। इससे हृदय को नुकसान पहुंच सकता है।
रिफाइंड तेल (जैसे रिफाइंड सनफ्लावर, सोयाबीन या पामोलिन ऑयल) को प्रोसेसिंग के कई चरणों से गुजरना पड़ता है। इस प्रक्रिया में केमिकल्स और हाई हीट का इस्तेमाल होता है। इससे तेल में मौजूद पोषक तत्व कम हो जाते हैं। कई रिफाइंड तेलों में ओमेगा-6 फैटी एसिड अधिक होता है, जिसकी ज्यादा मात्रा शरीर में सूजन हो सकती है और हृदय को नुकसान पहुंच सकता है। तेल का सेवन दिल के मरीजों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि दिल के मरीजों को तेल का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
आपको बता दें कि दिल के मरीजों के लिए असली खतरा सिर्फ “घी या तेल” नहीं। बल्कि, तेल या घी की मात्रा पर निर्भर करता है कि ये हार्ट हेल्थ पर क्या असर डालते हैं। बहुत ज्यादा घी लेने से एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) बढ़ सकता है। वहीं, अत्यधिक रिफाइंड तेल लंबे समय में मेटाबॉलिक और हार्ट समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए किसी एक को पूरी तरह अच्छा या बुरा कहना सही नहीं है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।