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Written By: Anshumala | Published : April 30, 2018 1:45 PM IST
Want to fall back in love with your spouse? Be attentive. © Shutterstock
आज के समय में करियर बनाने के चक्कर में ज्यादातर लोग देर से शादी करना पसंद करते हैं। जब शादी तय होती है, तो कुंडली मिलवाते हैं, कार्ड छपवाते हैं, सारी तैयारियां कर लेते हैं, लेकिन लड़का-लड़की का मेडिकल चेकअप करवाने के बारे में कोई नहीं सोचता है। जबकि शादी से पहले कुछ मेडिकल चेकअप कराने से उनकी आनुवांशिक बीमारियों का पता लगाया जा सकता है। ऐसे में शादी होने के बाद पछताने से अच्छा है कि पहले ही मेडिकल जांच करवा लिया जाए, ताकि वर्षों आपका रिश्ता सेहतमंद और खुशहाल बना रहा। बदलती जीवनशैली से आजकल कई बीमारियां कम उम्र में ही शरीर को घेर लेती हैं। अगर इन सभी बीमारियों का पता शादी से पहले चल जाए, तो उनसे बचना या उनका इलाज करना बेहद आसान हो सकता है।
रक्त कुंडली की जांच भी है जरूरी
जिस तरह आप जन्म कुंडली मिलवाते हैं, उसी तरह रक्त कुंडली की भी जांच करवाएं। इससे आप कई आनुवांशिक बीमारियों से बचे सकते हैं। एड्स जैसी जानलेवा बीमारी के प्रसार में भी इससे रोक लगेगी। डायबिटीज और कैंसर पीड़ितों की एक बड़ी आबादी आनुवांशिक कारणों से प्रभावित है। चिकित्सकों का कहना है कि अगर माता-पिता दोनों के वंश में ऐसी बीमारियों के जीन मौजूद हैं, तो अगली पीढ़ी को इन रोगों के होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
क्यों जरूरी है मेडिकल टेस्ट
मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर, दिल्ली की आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं कि मेडिकल टेस्ट जरूरी इसलिए है, ताकि शादी से पहले ही बीमारियों की पहचान कर उसका सही समय पर उपचार शुरू किया जा सके। कई बीमारियों के होने की आशंका को जीवनशैली में बदलाव लाकर, खानपान पर नियंत्रण करके और एक्सरसाइज के जरिए खत्म किया जा सकता है। ज्यादातर चेकअप बहुत कम समय में, आसान और दर्द रहित होते हैं। शादी से पहले कुछ टेस्ट करवाना इसलिए भी जरूरी है, ताकि गर्भावस्था के समय आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े और बच्चा भी स्वस्थ पैदा हो।
आरएच इनकमपैटिबिलिटी (आरएच असंगति)
अधिकतर लोग आरएच पॉजिटिव होते हैं, लेकिन जनसंख्या का एक छोटा हिस्सा (करीब 15 प्रतिशत) आरएच नेगेटिव होता है। आरएच फैक्टर हर लाल रक्त कणिकाओं पर एक प्रोटीन होता है। अगर आप में आरएच फैक्टर है, तो आप आरएच पॉजिटिव हैं। अगर नहीं है, तो आप आरएच नेगेटिव हैं। वैसे आरएच फैक्टर आपके सामान्य स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता है। लेकिन अगर मां और बच्चे का आरएच फैक्टर अलग-अलग होगा, तो यह गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चा दोनों के लिए ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। अलग-अलग आरएच फैक्टर वाले लोगों को आपस में शादी न करने की सलाह दी जाती है।
ओवेरियन सिस्ट टेस्ट
डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं कि अगर आपको पेट के निचले हिस्से में दर्द हो, अनियमित पीरियड्स हो या पीरियड्स के समय अधिक ब्लीडिंग हो, तो ओवेरियन सिस्ट का टेस्ट करवाएं। अगर नॉर्मल पेल्विक टेस्ट के दौरान सिस्ट का पता चलता है, तो इस बात की जांच करने के लिए एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड किया जाता है। हालांकि, छोटे आकार के सिस्ट अपने आप ठीक हो जाते हैं। अगर ओवेरियन ग्रोथ या सिस्ट का आकार तीन इंच से बड़ा होगा, तो आपको ओवेरियन कैंसर होने की आशंका हो सकती है। इस स्थिति में डॉक्टर कुछ और टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, ताकि ओवेरियन सिस्ट के कारणों का पता लगाकर उचित निदान किया जा सके।
ज्यादातर मामलों में रुटीन टेस्ट ब्लड ग्रुप, एचआईवी और डायबिटीज आदि के टेस्ट कराए जा रहे हैं। सांता आईवीएफ सेंटर की गायनकोलॉजिस्ट एवं आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. अनुभा सिंह कहती हैं कि आधुनिक जीवनशैली के कारण लोगों में जागरूकता आई है। जो लोग शादी करने जा रहे हैं, यदि वे ब्लड टेस्ट के साथ एचआईवी, आनुवांशिक बीमारियों, थैलेसीमिया और हीमोफीलिया की जांच भी कराएं, तो बेहतर होगा। जो लोग अपनी सेहत के प्रति जागरूक हैं, वे इसे गलत नहीं समझते। हीमोग्लोबिन, कैल्शियम, मलेरिया, युरीन टेस्ट, इलेक्ट्रोलाइट आदि की जांच भी बेहद मददगार साबित होती है। जो शारीरिक रूप से अधिक एक्टिव नहीं रहते या जिनका वजन अधिक है, उन्हें कोलेस्ट्रॉल और लिपिड प्रोफाइल जरूर चेक कराना चाहिए।
टेस्ट करवाने के फायदे हैं अनेक
टेस्ट करवाने के कई फायदे हैं। इससे आपको यह जानकारी मिल जाएगी कि आप फिट हैं या नहीं? अगर आप पूरी तरह से फिट हैं, तो आपको अपना नया जीवन शुरू करने से पहले पॉजिटिव ऊर्जा मिलेगी। समय रहते ही बीमारी का पता चल जाने पर, उसे बढ़ने से रोका जा सकता है। साथ ही ऐसी बीमारी जो पुश्तैनी है, उसे रोकने के लिए वक्त रहते जरूरी कदम भी उठाए जा सकेंगे।
टेस्ट करवाने से पहले डॉक्टर के सुझाए कुछ मंत्र:
चित्रस्रोत:Shutterstock.