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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 18, 2022 4:52 PM IST
नाक पर लाल रंग के स्पॉट भी मंकीपॉक्स का हो सकता है लक्षण! 40 साल के व्यक्ति ने बताया कैसे हुआ संक्रमित
जर्मनी में एक 40 साल का मंकीपॉक्स संक्रमित रोगी एचआईवी से ग्रस्त पाया गया है। हैरानी इस बात की नहीं है कि व्यक्ति एक साथ दो बीमारियों का शिकार है बल्कि डॉक्टर ने शुरू में रोगी को गंभीर रूप से सनबर्न का शिकार बताया था लेकिन बाद में रोगी के एचआईवी से भी संक्रमित होने की बात पता चली। दरअसल व्यक्ति की नाक के बीचों बीच एक लाल रंग का स्पॉट हुआ था, जब उसने कुछ टेस्ट कराए तो व्यक्ति को मालूम हुआ कि वो इस घातक वायरस का शिकार है।
ब्रिटिश नेशनल डेली द डेली मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, व्यक्ति में रोग का पता लगने के बाद स्टडी भी की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों का कहना है कि 40 साल के इस रोगी की नाक पर लाल रंग का धब्बा बना, लेकिन तब तक इसमें एचआईवी की पहचान नहीं हुई थी। बाद में उस लाल रंग के स्पॉट में सफेद रंग का पस पड़ने लगा।
शुरू में डॉक्टर ने इस स्थिति को सनबर्न करार देकर दूसरी बीमारियों को सिरे से खारिज कर दिया था क्योंकि ये दिखने में नाक के ऊपर सिर्फ एक स्पॉट जैसी लग रही थी। हालांकि शुरू में सिर्फ लाल रंग का ये धब्बा न सिर्फ बढ़ने लगा बल्कि शरीर के दूसरे अंगों में भी ये स्पॉट फैलने लगे। रिपोर्ट के मुताबिक, उसकी नाक की स्किन कुछ दिनों की भीतर बाहर निकलने लगी और घाव में सूजन होनी लगी। अब रोगी को इसमें दर्द भी होने लगा था।
ध्यान देने वाली बात ये है कि ये छाले उसके पूरे शरीर पर फैल गए और विशेषरूप से रोगी के मुंह में और ज्यादा परेशान करने लगे। इतना ही नहीं रोगी के प्राइवेट पार्ट भी ये रैशेज फैल चुके थे। जब मरीज की पीसीआर जांच की गई तो ये खुलासा हुआ कि वे मंकीपॉक्स से संक्रमित है, जिसके बाद उसे अस्पताल में एंटीवायरल दवाएं दी गईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, रोगी के रैशेज और छाले आंशिक रूप से सूखने लगे और बाद में उनकी बनावट में सुधार होने लगा। रोगी का कहना है कि अतीत में उसे कभी भी यौन संचारित रोग या फिर इंफेक्शन नहीं हुआ था।
नेक्रोसिस विकसित होने के खतरे के बीच इस 40 साल के रोगी में एचआईवी की पहचान न हो पाने के कारण इम्यूनिटी काफी कमजोर हो चुकी थी। नेक्रोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें इंफेक्शन की वजह से टिश्यू नष्ट होना शुरू हो जाते हैं लेकिन अगर इम्यून सिस्टम मजबूत हो तो इस स्थिति को रोका जा सकता है। नेक्रोसिस के कारण शरीर के अंगों तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्तिनहीं हो पाती है, जिसकी वजह से टिश्यू में पोषण की कमी हो जाती है और वे नष्ट होने लगते हैं।
द डेली मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों ने घटना पर संज्ञान लेते हैं हुए कहा कि ये इंफेक्शन रोगी को कई दिनों से था, जो बढ़कर एडवांस स्टेज पर पहुंच गया और इस वजह से उसके कई अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। बता दें कि दुनियाभर में मंकीपॉक्स के इंफेक्शन के सबसे ज्यादा मामले जर्मनी में ही सामने आए हैं। 20 मई के बाद से जर्मनी में 3186 मामले सामने आ चुके हैं।