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World Hemophilia Day : हीमोफीलिया एक जेनेटिक बीमारी है, जिसका इलाज काफी ज्यादा मुश्किल होता है। लेकिन अब जल्द ही इसके मरीजों के लिए खुशखबरी सामने आने वाली है। खबरों की मानें तो जल्द ही हीमोफीलिया के मरीजों का इलाज जीन थेरेपी से संभव हो सकेगा। फिलहाल इस विषय को लेकर दुनियाभर में रिसर्च चल रहा है। दिल्ली के एम्स में भी जीन थेरेपी को लेकर शोध जारी है। रिसर्च के पहले चरण में जीन थेरेपी ट्रीटमेंट के रिजल्ट हीमोफीलिया बी के मरीजों पर अच्छे आए हैं। ऐसे में यह काफी बड़ी उपलब्धि है। फिलहाल हीमोफीलिया ए के मरीजों पर इसे लेकर रिसर्च किया जा रहा है। आने वाले कुछ समय में इसे लेकर मरीजों का इलाज किया जाएगा, जो काफी कारगर साबित हो सकता है।
हीमोफीलिया एक तरह का ब्लीडिंग डिसऑर्डर है, जिसमें खून का थक्का नहीं जमता है। यह किन कारणों से होता है, इसे लेकर अभी तक स्पष्ट अध्ययन सामने नहीं आए हैं। हालांकि, कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक जेनेटिक बीमारी है। हीमोफीलिया के मरीजों में खून के थक्के बनना काफी कम गो जाता है। इस स्थिति से जूझ रहे मरीजों को अगर किसी कारण से चोट लग गई तो इस स्थिति में उनका खून रुकना मुश्किल हो जाता है। यह डिजीज महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक देखी जाती है।
दिल्ली स्थिति एम्स के हेमेटोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. मनोरंजन महापात्र का कहना है कि हीमोफीलिया के इलज को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली एम्स में जीन थेरेपी पर रिसर्च किया जा रहा है। रिसर्च अगर सफल रहा तो यह इलाज का काफी बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।