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गणेश चतुर्थी 2018 : जानेंगे गणेश भगवान पर चढ़ाई जाने वाली दूब घास के औषधीय गुणों को, तो जरूर करेंगे इस्तेमाल

दूब घास शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ने में मदद करती है। इसमें मौजूद एंटीवायरल और एंटीमाइक्रोबिल गुणों के कारण यह शरीर की किसी भी बीमारी से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है।

गणेश चतुर्थी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। गणपति उत्‍सव में एक खास तरह की घास का विशेष महत्‍व होता है, जिसे दूब या दूर्वा कहते हैं। गणेश पूजा में बिना इसे चढ़ाए पूजा संपन्न नहीं मानी जाती। सभी देवी-देवताओं में एक मात्र गणेश भगवान को ही यह विशेष किस्‍म की घास चढ़ाई जाती है। इक्कीस दूर्वा को इक्कठी कर एक गांठ बनाई जाती है, जिसे गणेश जी के मस्‍तक पर चढ़ाई जाती है।

दूब घास संपूर्ण भारत में पाई जाती है। दूब घास पशुओं के लिए ही नहीं बल्कि मनुष्यों के लिए भी पूर्ण पौष्टिक आहार है। अनेक औषधीय गुणों की मौजूदगी के कारण आयुर्वेद में इसे ‘महाऔषधि’ कहा गया है। दूब के पौधे की जड़ें, तना, पत्तियां सभी का चिकित्सा के क्षेत्र में विशिष्ट महत्व है। आयुर्वेद के अनुसार, दूब का स्वाद कसैला-मीठा होता है। विभिन्न प्रकार के पित्‍त एवं कब्‍ज विकारों को दूर करने के लिए दूब का प्रयोग किया जाता है। दूब घास को पेट के रोगों, यौन रोगों, लीवर रोगों के लिए चमत्‍कारी माना जाता है। दूब में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। आइए जानते हैं दूब घास के औषधीय गुणों के बारे में।

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए

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दूब घास शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ने में मदद करती है। इसमें मौजूद एंटीवायरल और एंटीमाइक्रोबिल गुणों के कारण यह शरीर की किसी भी बीमारी से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है। इसके अलावा दूब घास पौष्टिकता से भरपूर होने के कारण शरीर को एक्टिव और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करती है। यह अनिद्रा रोग, थकान, तनाव जैसे रोगों में भी प्रभावकारी है।

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डायबिटीज में कारगर

कई शोधों में ये बात सामने आई है कि दूब में ब्‍लड में ग्लूकोज के स्तर को कम करने की क्षमता होती है जिससे डायबिटीज कंट्रोल में रहता है। इसके अलावा, इसमें ग्‍लाइसेमिक क्षमता अच्‍छी होती है। इस घास के अर्क से मधुमेह रोगियों पर महत्‍वपूर्ण हाइपोग्लिसीमिक प्रभाव पड़ता है। इसका सेवन डायबिटिक मरीजों के लिए लाभदायक है।

एनीमिया हो दूर

दूब के रस को पीने से एनीमिया की समस्‍या ठीक होती है। यह एक ब्लड प्यूरिफायर की तरह काम करती है और लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करती है जिससे हिमोग्लोबीन का स्तर बढ़ता है।

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सुंदरता रखे बरकरार

इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण त्वचा संबंधित समस्याएं जैसे खुजली, स्किन रैशेज, एग्जिमा जैसी त्‍वचा की समस्‍याओं से राहत दिलाता है। इस घास को हल्‍दी के साथ पीस कर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगाएं। इससे फोड़े-फुंसी राहत मिलती है। इसके अलावा यह कुष्ठ रोग और खुजली जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी मदद करता है। दूब का रस पीने से बार-बार लगने वाली प्यास बुझती है।

पाचन शक्ति बढ़ाए

आयुर्वेद के अनुसार, पेट के लिए भी बेहत चमत्कारी माना गया है। इस घास को लगतार खाने से पेट की बीमारी दूर होती है। पाजन शक्ति मजबूत होती है। कब्ज, एसिडिटी की समस्या दूर होती है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, पोटैशियम पर्याप्त मात्रा में होते हैं जो विभिन्न प्रकार के पित्त एवं कब्ज विकारों को दूर करने में रामबाण का काम करते हैं।

छालों व यूरिन समस्या में मिले राहत

दूब के काढ़े से कुल्ला करें। मुंह के छाले ठीक हो जाएंगे। यह आंखों के लिए भी अच्छा होता है क्‍योंकि इस पर नंगे पैर चलने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। दूब के रस को मिश्री के साथ मिलाकर पीने से पेशाब से खून आना बंद हो जाता है। दूर्वा को पीस कर दूध में मिलाकर पिएं। इससे पेशाब में जलन, पेशाब करते हुए दर्द और यूरिन इंफेक्‍शन से निजात मिलता है।

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