बार-बार पेट दर्द का कारण हो सकती है पित्त की पथरी: सही समय पर सर्जरी क्यों है जरूरी

अगर अक्सर ही पेट दर्द की समस्या रहती है, तो यह पित्त की पथरी का संकेत हो सकता है। सर्जरी की मदद से इसका इलाज किया जा सकता है।

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Written By: Dr. Pankaj Sharma | Published : April 29, 2026 8:30 PM IST

आजकल पित्त की पथरी यानी गॉल ब्लैडर स्टोन की समस्या काफी तेजी से बढ़ती जा रही है। कई बार यह शरीर में बिना किसी लक्षण के भी मौजूद रहती है, लेकिन जब यह परेशानी बढ़ती है तो मरीज को अचानक तेज दर्द, उल्टी, गैस और पाचन संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गॉल ब्लैडर में बनने वाली पथरी को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। यह समय के साथ जटिल समस्याओं का कारण बन सकती है।

पित्त की पथरी क्यों बनती है

गॉल ब्लैडर में पथरी बनने का मुख्य कारण पित्त के घटकों में असंतुलन होता है। जब कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है, तो यह ठोस रूप लेकर पथरी बना लेता है। मोटापा, अधिक तला-भुना भोजन, तेजी से वजन कम करना, गर्भावस्था और जेनेटिक कारण भी इसके जोखिम को बढ़ाते हैं।

पित्त की पथरी के लक्षण क्या होते हैं?

कई मरीजों में लंबे समय तक कोई लक्षण नहीं दिखाई देते है। लेकिन, जब पथरी गॉल ब्लैडर की नली में फंस जाती है, तो पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द होता है, यह दाहिने कंधे या पीठ तक जा सकता है। इसके साथ, मतली, उल्टी, अपच और कभी-कभी बुखार भी हो सकता है।

अगर बार-बार पेट में दर्द हो, खासकर खाना खाने के बाद तो इस संकेत को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। इसे सामान्य गैस या एसिडिटी बिल्कुल न समझें। ये पित्त की पथरी का संकेत हो सकते हैं।

पित्त की पथरी में सर्जरी की जरूरत कब पड़ती है?

हर पित्त की पथरी में तुरंत सर्जरी की जरूरत नहीं होती है। अगर पथरी छोटी है और कोई लक्षण नहीं दिखा दे रहे हैं तो इस स्थिति में डॉक्टर सिर्फ दवा दे सकते हैं। लेकिन, अगर पथरी बढ़ जाती है तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। इन स्थितियों में पड़ती है सर्जरी की जरूरत-

  • पेट में बार-बार तेज दर्द (गॉल ब्लैडर अटैक)
  • पित्ताशय में सूजन या संक्रमण
  • पथरी का बाइल डक्ट में फंस जाना
  • पैनक्रियाटाइटिस जैसी जटिलता का खतरा

लैप्रोस्कोपिक गॉल ब्लैडर सर्जरी आज के समय में एक सुरक्षित और कम दर्द वाला विकल्प है। इसमें मरीज जल्दी रिकवर हो जाता है और सामान्य जीवन में वापस लौट सकता है।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के फायदे क्या हैं?

  • लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में छोटे चीरे लगाए जाते हैं। इसमें दर्द कम होता है और डिस्चार्ज जल्दी हो जाता है।
  • इसकी मदद से गॉल ब्लैडर को ही निकाल दिया जाता है, जिससे पथरी दोबारा बनने की संभावना खत्म हो जाती है।

पित्त की पथरी से बचाव कैसे करें?

  • पित्त की पथरी से बचाव के लिए वजन को नियंत्रण में रखना बहुत जरूरी है। तेजी से वजन घटना या बढ़ना, पित्ताशय की पथरी का खतरा बढ़ा सकता है।
  • पित्त की पथरी से बचने के लिए फाइबर से भरपूर डाइट लेना जरूरी है। अपनी डाइट में साबुत अनाज, फल और सब्जियों को शामिल करें।
  • हेल्दी फैट का सेवन करें। ऑलिव ऑयल और फिश ऑयल को डाइट का हिस्सा बनाएं।
  • फ्राइड फूड, प्रोसेस्ड फूड और सैचुरेटेड फैट का सेवन कम करें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। रोजाना 2 से 3 लीटर पानी पीना जरूरी है।

पित्त की पथरी को हल्के में लेना सही नहीं है। अगर लक्षण नजर आ रहे हैं, तो समय पर पहचान और सही इलाज से बड़ी जटिलताओं से बचा जा सकता है। अगर लक्षण बार-बार सामने आ रहे हैं, तो सर्जरी को बिल्कुल न टालें। यह समस्या को गंभीर बना सकता है।

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