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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 26, 2022 11:10 AM IST
शरीर के इस हिस्से पर फैट बढ़ने से रात को आते हैं खर्राटे! 80 फीसदी लोग नहीं जानते शरीर के ये बीमारी
अगर आप बिना किसी वजह के अपना वजन बढ़ा हुआ महसूस कर रहे हैं या फिर आपको मूड स्विंग हो रहा तो ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया इसकी एक वजह हो सकती है। पल्मोनलोजिस्ट और बहुत से एक्सपर्ट का मानना है कि स्लीप एपनिया के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। हालांकि इसके पीछे क्या वजह हो सकती है इस बात को लेकर एक्सपर्ट बंटे हुए हैं। कुछ का कहना है कि लोगों के बीच नींद के इस विकार को लेकर बढ़ती जागरुकता एक कारण हो सकती है तो कुछ को लगता है कि लॉकडाउन के दौरान गतिहीन जीवनशैली भी एक प्रमुख कारण हो सकती है।
एक्सपर्ट का ये भी मानना है कि नींद से जुड़े इस विकार की समस्या ये है कि मरीज का ध्यान इस ओर बहुत देर से जाता है। इस विकार से पीड़ित मरीज पहले साइकेट्रिस्ट, उसके बाद न्यूरोलॉजिस्ट और कभी-कभी कार्डियोलॉजिस्ट के पास तक पहुंच जाता है। जबकि उन्हें स्लीप टेस्ट कराने की जरूरत होती है। कुछ मामलो में तो बहुत देर ही हो जाती है।
कई वैश्विक अध्ययन बताते हैं कि 80 फीसदी मरीजों में इस समस्या का निदान तक नहीं हो पाता है।
एक्सपर्ट की मानें तो वजन बढ़ना, गर्दन पर फैट का जमा होना खर्राटे के लिए सबसे बड़ी वजह है। इस स्थिति में मरीज वायुमार्ग के बाधित होने के कारण गहरी नींद नहीं ले पाता है।
इसके अलावा हमारा दिमाग, शरीर को नींद के तीन चक्रों के लिए तैयार करता है। चौथे चरण में वह खुद को तैयार करता है। आमतौर पर 25 फीसदी लोगों को चौथे चरण में नींद आती है। लेकिन जब कोई व्यक्ति इस नींद विकार से पीड़ित होता है तो वह उस चरण में नहीं पहुंच पाता क्योंकि उसे बार-बार बाधा होती है और वापस से पहले चरण में ही आ जाता है।
1-चीजें याद न रहना
2-दिनभर थकान रहना
3-यौन इच्छा में कमी
जब हमारा दिमाग अचेत मुद्रा में होता है तो एड्रेनालाइन नाम का हार्मोन रिलीज करता है, जिसकी वजह से नींद में जब हमारा दम घुटता है तो हमारा शरीर जाग जाता है। ये एक अच्छा हार्मोन है लेकिन रोजाना ऐसा होता है तो ये पैरालिसिस, हार्ट अटैक, डायबिटीज और हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ा देता है।
जीवनशैली बदल रही है और साथ ही बढ़ रही है जरूरत से ज्यादा वजन और मोटापे के शिकार लोगों की संख्या भी। लेकिन पतले लोग भी इस रोग का शिकार हो रगहे हैं। पहले लोग टेस्ट कराने से बचते थे लेकिन अगर उपचार कराया जाए तो ये रोग 100 फीसदी ठीक हो सकता है। हां, कुछ मामलों में पूर्ण इलाज संभव नहीं है।
अभी बच्चों में भी ये समस्या देखने को मिल रही है। इससे पहले लोग ये मानने को स्वीकार नहीं होते थे कि उन्हें नींद विकार है इसलिए उनमें पता नहीं चल पाता था। अब सार्वजनिक स्थानों पर भी नींद से जुड़े सवाल-जवाब हैं और आप 10 बिंदुओं में जान सकते हैं कि आपको ये समस्या है या नहीं, उसके बाद डॉक्टर को दिखाना अनिवार्य हो जाता है।