Fungul Infection In Kids: 5 साल से छोटे बच्‍चों में नाखूनों से होती है फंगल इंफेक्‍शन की शुरुआत, पेरेंट्स पहले से ही कर लें ये तैयारी

आंकड़े बताते हैं मानसून के मौसम में हर साल 4-10 साल की उम्र के 20% बच्‍चे स्किन एलर्जी और फंगल इंफेक्‍शन (Fungal Infection In Children) जैसे संक्रमणों का शिकार होते हैं।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Published : July 19, 2021 10:05 AM IST

Skin Infections In Kids During Monsoon: मानसून का मौसम भले ही चिलचिलाती गर्मी, लू के थपेड़े और पसीने से राहत दिलाता है लेकिन अपने साथ में कई तरह के स्किन इंफेक्‍शन और डाइजेस्टिव प्रॉब्‍लम को भी साथ लाता है। छोटे बच्‍चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्‍युनिटी के लोग संक्रमण की चपेट में जल्‍दी आ जाते हैं। हालांकि बुजुर्गों के साथ प्‍लस प्‍वॉइंट ये होता है कि उन्‍हें पता होता है कि वो बीमारी से लड़ नहीं पाएंगे इसलिए वो ऐसे मौसम में खुद को सुरक्षित रखते हैं और एक जगह पर बैठे रहते हैं। जबकि बच्‍चे इस चीज से अंजान होते हैं। आंकड़े बताते हैं मानसून के मौसम में हर साल 4-10 साल की उम्र के 20% बच्‍चे स्किन एलर्जी और फंगल इंफेक्‍शन जैसे संक्रमणों का शिकार होते हैं। वैसे तो बच्‍चों को फंगल इंफेक्‍शन किसी भी मौसम में हो जाता है लेकिन एक्‍सपर्ट कहते हैं कि मानसून में मौसम में इसके ज्‍यादा चांस होते हैं। बच्‍चों में ज्‍यादातर फंगल इंफेक्‍शन की शुरुआत नाखूनों से होती है। आइए जानते हैं बच्‍चों में कैसे होती है फंगल इंफेक्‍शन की शुरुआत और क्‍या है बचाव के तरीके-

मानसून में बच्‍चों को क्‍यों होता है फंगल इंफेक्‍शन

  • सही हाइजीन मेनटेन न रख पाने के कारण।
  • ऐसे फेब्रिक के जूते या जुराबें पहनना जो पानी को सोख नहीं पाते हैं।
  • टाइट सिंथेटिक कपड़े पहनना जिससे स्किन को सांस लेने में दिक्‍कत होती है और पसीना भी सूख नहीं पाता है।
  • गंदे पानी में खेलना या उसमें अपने हाथ पैरों को डालना
  • ओबेसिटी, डायबिटीज या अन्‍य इम्‍युन संबंधी दिक्‍कतें भी बच्‍चों में फंगल इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ाती हैं।

बच्‍चों के नाखूनों में फंगल इंफेक्‍शन

बारिश के मौसम में बच्‍चों में नाखूनों से फंगल इंफेक्शन की शुरुआत हो सकती है। इसका कारण है पसीना होने पर बार बार खुजली करना और बारिश के कारण जमा पानी बच्‍चों को बहुत आकर्षित करता है और वो उसमें हाथ डालने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। जब नाखून ज्‍यादा देर तक पानी के संपर्क में रहते हैं तो इंफेक्‍शन होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस स्थिति में बच्‍चों के नाखून फीके पड़ सकते हैं, कट सकते हैं, रफ हो सकते हैं और सोते वक्‍त बिस्‍तर से अलग भी हो सकते हैं। इस लक्षणों के साथ बच्‍चों के नाखूनों में रेडनेस, सूजन और दर्द हो सकता है। एक्‍सपर्ट कहते हैं कि बच्‍चों के बड़े हुए नाखून संक्रमण की चपेट में आने का खतरा और बढ़ा देते हैं।

बच्‍चों को फंगल इंफेक्‍शन से बचाने के लिए क्‍या करें?

  • इस मौसम में बच्‍चे को टाइट कपड़े न पहनाएं। कोशिश करें कि कपड़े कॉटन के हों और ढीले हों।
  • बच्‍चों को संक्रमित लोगों से दूर रखें।
  • हफ्ते में एक बार बच्‍चों के नाखून जरूर काटें। हर 2-3 दिन में चेक करते रहें कि बच्‍चों के नाखून साफ हैं या नहीं।
  • बच्‍चों को रोज नहलाएं और उनके पानी में नीम ऑयल या कोई हल्‍का डिसइंफेक्टेंट लिक्विड डालें।
  • बच्‍चों के शरीर को अच्‍छी तरह से पोछें। पैर और फोल्‍ड को एकदम सूखा रखें।
  • बच्‍चों का तौलिया किसी और को यूज न करन दें।
  • अगर आपको पता चल गया है कि बच्‍चे को स्किन इंफेक्‍शन हो गया है तो तुरंत उसे किसी डर्मेटोलॉजिस्ट के पास लेकर जाएं। डॉक्‍टर बच्‍चे को एंटीफंगल दवाएं दे सकते हैं।
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