
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : July 19, 2021 10:05 AM IST
ओबेसिटी, डायबिटीज या अन्य इम्युन संबंधी दिक्कतें भी बच्चों में फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ाती हैं।
Skin Infections In Kids During Monsoon: मानसून का मौसम भले ही चिलचिलाती गर्मी, लू के थपेड़े और पसीने से राहत दिलाता है लेकिन अपने साथ में कई तरह के स्किन इंफेक्शन और डाइजेस्टिव प्रॉब्लम को भी साथ लाता है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्युनिटी के लोग संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। हालांकि बुजुर्गों के साथ प्लस प्वॉइंट ये होता है कि उन्हें पता होता है कि वो बीमारी से लड़ नहीं पाएंगे इसलिए वो ऐसे मौसम में खुद को सुरक्षित रखते हैं और एक जगह पर बैठे रहते हैं। जबकि बच्चे इस चीज से अंजान होते हैं। आंकड़े बताते हैं मानसून के मौसम में हर साल 4-10 साल की उम्र के 20% बच्चे स्किन एलर्जी और फंगल इंफेक्शन जैसे संक्रमणों का शिकार होते हैं। वैसे तो बच्चों को फंगल इंफेक्शन किसी भी मौसम में हो जाता है लेकिन एक्सपर्ट कहते हैं कि मानसून में मौसम में इसके ज्यादा चांस होते हैं। बच्चों में ज्यादातर फंगल इंफेक्शन की शुरुआत नाखूनों से होती है। आइए जानते हैं बच्चों में कैसे होती है फंगल इंफेक्शन की शुरुआत और क्या है बचाव के तरीके-
बारिश के मौसम में बच्चों में नाखूनों से फंगल इंफेक्शन की शुरुआत हो सकती है। इसका कारण है पसीना होने पर बार बार खुजली करना और बारिश के कारण जमा पानी बच्चों को बहुत आकर्षित करता है और वो उसमें हाथ डालने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। जब नाखून ज्यादा देर तक पानी के संपर्क में रहते हैं तो इंफेक्शन होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस स्थिति में बच्चों के नाखून फीके पड़ सकते हैं, कट सकते हैं, रफ हो सकते हैं और सोते वक्त बिस्तर से अलग भी हो सकते हैं। इस लक्षणों के साथ बच्चों के नाखूनों में रेडनेस, सूजन और दर्द हो सकता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि बच्चों के बड़े हुए नाखून संक्रमण की चपेट में आने का खतरा और बढ़ा देते हैं।