
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : July 8, 2021 11:28 AM IST
सिंपल शब्दों को पढ़ने वक्त काफी ध्यान से देखना और बोलने में काफी जोर लगाना
डिस्लेक्सिया (Dyslexia) एक न्यूरोलॉलिकल डिसऑर्डर है जिसमें बच्चे को पढ़ने में दिक्कत आती है। डिस्लेक्सिया नामक लर्निंग डिसऑर्डर से जूझ रहे बच्चे स्पेलिंग पढ़ने, शब्दों का उच्चारण करने और अक्षरों को मिलाकर पढ़ पाने में असमर्थ होते हैं। डिस्लेक्सिया को हिंदी में अधिगम अक्षमता कहते हैं। क्योंकि डिस्लेक्सिया में पढ़ने, समझने और याद करने में दिक्कत आती है इसलिए ऐसे बच्चे अपनी उम्र के लोगों से पिछड़ जाते हैं। कई बार पेरेंट्स को लगता है कि बच्चा पढ़ने से आनाकानी कर रहा है या उसका मन नहीं है इसलिए वो जानबूझकर न पढ़ पाने का नाटक कर रहा है। पेरेंट्स को यह समझना चाहिए कि ये लक्षण डिस्लेक्सिया के हो सकते हैं। करीब 10 प्रतिशत बच्चों में ये लर्निग डिसऑर्डर देखा जाता है। हालांकि हर बच्चे में डिस्लेक्सिया के लक्षण अलग अलग हो सकते हैं और ये उम्र के साथ बदलते रहते हैं। आज हम आपको उम्र के हिसाब से बच्चों में डिस्लेक्सिया के लक्षण बता रहे हैं।
डिस्लेक्सिया के लक्षण एक बच्चे से दूसरे बच्चे में अलग हो सकते हैं। इसमें बच्चों को शब्दों को मिलाकर पढ़ने में दिक्कत आती है कई बार आप बच्चों को पढ़ाई से संबंधित कुछ चीज बताएंगे तो वो जल्दी नहीं समझ पाएंगे। हालांकि कभी-कभी ऐसा भी होता है कि बच्चों को कुछ निश्चित शब्द या वाकया को पढ़ने में दिक्कत आती है। डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्च शारीरिक रूप से एकदम सही होते हैं लेकिन जब इन्हें स्कूल भेजा जाता है तब डिस्लेक्सिया के बारे में पता चलता है क्योंकि स्कूल में बच्चा पढ़ता है और नई चीजों को सीखता है। हालांकि डिस्लेक्सिया के बच्चे दूसरी एक्टिविटीज में जैसे कि पेंटिंग, कंप्यूटर, म्यूजिक, डांस और स्पोर्ट्स में बेहतर हो सकते हैं। बता दें कि 7 साल की उम्र में इसके बाद बच्चों में डिस्लेक्सिया का पता चलता है।
प्रीस्कूल में बच्चों में डिस्लेक्सिया के लक्षण
प्राइमरी स्कूल के बच्चों में डिस्लेक्सिया के लक्षण
मिडिल ग्रेड (5वीं-7वीं कक्षा तक) के बच्चों में डिस्लेक्सिया के लक्षण
हाई स्कूल ग्रेड के बच्चों में डिस्लेक्सिया के लक्षण