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forgetfulness vs dementia
उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे शरीर की प्रक्रियाएं कमजोर पड़ने लग जाती हैं, जिनमें से एक है याद रखने की क्षमता। यही कारण है कि कोई व्यक्ति एक बुजुर्ग की उम्र में आता है, तो उसे बार-बार भूलने की समस्या होने लगती है, लेकिन जरूरी नहीं है कि बार-बार भूलने की समस्या बढ़ती उम्र के कारण ही हो कई बार यह डिमेंशिया का संकेत भी हो सकता है। दरअसल बढ़ती उम्र के कारण भूलने की समस्या और डिमेंशिया दोनों ही स्थितियां हैं और इनके बीच का अंतर समझना जरूरी है, ताकि समय पर सही मदद मिल सके। Epoch Elder Care की फाउंडर और डिमेंशिया स्पेशलिस्ट व क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट नेहा सिन्हा के अनुसार बुजुर्ग अवस्था में बार-बार भूलने की समस्या के दौरान व्यक्ति कुछ समय के लिए किसी चीज या जानकारी को भूल जाता है और बाद में वह फिर से लौट आती है। जबकि डिमेंशिया जानकारी पूरी तरह से खत्म हो जाती है और इसलिए कभी दोबारा याद नहीं आती है। यही कारण है कि डिमेंशिया के मरीज की धीरे-धीरे व्यक्ति की सोचने, निर्णय लेने तथा खुद की देखभाल करने की क्षमता को प्रभावित होने लगती है।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि अगर कोई व्यक्ति बार-बार भूल रहा है तो वह डिमेंशिया का ही संकेत हो। खासतौर पर बुजुर्गों में भी यह जानना जरूरी है कि कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं, जिनके कारण कुछ समय के लिए मानसिक भ्रम पैदा हो जाता है भले ही व्यक्ति को डिमेंशिया न हो। अगर किसी बुजुर्ग व्यक्ति को डिमेंशिया नहीं है, लेकिन उसे भूलने जैसी समस्याएं ज्यादा होने लगी हैं तो उसके पीछे निम्न कारण भी हो सकते हैं
हालांकि, यह भी सच है कि बुजुर्ग व्यक्ति के शरीर की तरह ही उम्र बढ़ने के साथ-साथ उनका मानसिक स्वास्थ्य भी कमजोर पड़ जाता है और ऐसे में कई बार अचानक से माहौल बदलना, नई जगह पर शिफ्ट हो जाना, या फिर रोजाना की कोई दिनचर्या छूट जाना भी कई बार भ्रम जैसी स्थिति बढ़ा सकती है और व्यक्ति को लगता है कि वह कोई बहुत जरूरी चीज भूल गया है।
डिमेंशिया में व्यक्ति को चीजें याद रखने में दिक्कत आने लगती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह कोई मानसिक बीमारी है। दरअसल, डिमेंशिया एक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है। इसलिए डिमेंशिया व भूलने की आदत के बीच अंतर समझना बेहद जरूरी है। क्योंकि अगर ऊपर गए किसी कारण से बार-बार भूलने की समस्या हो रही है, तो उसे ठीक किया जा सकता है और हो सकता है कि व अस्थायी हो और थोड़े समय बाद अपने आप ठीक हो जाए। जबकि डिमेंशिया एक लंबे समय तक चलने वाला न्यूरोलॉजिकल रोग है, जिसके लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की जांच बहुत जरूरी है।
जैसा कि हमने आपको बताया कि भूलने की बीमारी जरूरी नहीं है कि डिमेंशिया से ही जुड़ी हो वह कभी-कभार एक सामान्य घटना हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि आपको चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि वह डिमेंशिया का संकेत नहीं है। इसलिए अचानक से भ्रम महसूस होने की समस्या को सामान्य न समझें और एक बार डॉक्टर से जांच जरूर करा लें।
हालांकि, भ्रम जैसी स्थिति की पहचान करने के लिए आप सबसे पहले यह पता लगा सकते हैं कि कहीं यह कोई अस्थायी शारीरिक स्वास्थ्य या माहौल से जुड़ा तो नहीं है। हालांकि, अगर अगर याददाश्त की समस्या लगातार बनी रहती है, धीरे-धीरे बढ़ती बढ़ रही है और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगी है, तो ऐसे में देर नहीं करनी चाहिए और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए ताकि स्थिति के और ज्यादा गंभीर होने से पहले ही उसकी देखभाल की जा सके।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी उद्देश्य केवल शैक्षणिक एवं सूचनात्मक है, जिसमें डिमेंशिया और बढ़ती उम्र होने वाली बार-बार भूलने की समस्या के बीच अंतर के बारे में बताना है। इस लेख में दी गई कोई भी जानकारी किसी भी समस्या के इलाज के लिए नहीं है और Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।