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Written By: Jitendra Gupta | Published : July 13, 2021 12:49 PM IST
हाइपोथायराडिज्म का हैं शिकार तो शुरू कर दें इन फूड्स का सेवन, कंट्रोल रहेगा आपका थायराइड लेवल
शरीर में यूं तो हमारे ढेर सारे ग्रंथियां हैं लेकिन कुछ ग्रंथियां ऐसी हैं, जो पूरे शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होती हैं। इन्हीं में से एक है थायराइड ग्रंथि, जिसके बढ़ने पर थायराइड हार्मोन का उत्पादन बढ़ जाता है। इस स्थिति को हाइपरथायरायडिज्म कहते हैं, जिसमें आपको मांसपेशियों में कमजोरी, अनिद्रा, हृदय गति का तेज बढ़ना, गर्मी का ज्यादा लगना, दस्त, हाथ के कांपने और वजन कम होने जैसे गंभीर स्वास्थ्य स्थितियां खड़ी हो जाती हैं। इस स्वास्थ्य स्थिति से बचने के लिए आपको सिर्फ अपनी डाइट में कुछ मिनरल्स- विटामिन और अन्य पोषक तत्वों के साथ-साथ कुछ जरूरी चीजें शामिल करनी हैं, जो थायराइड ग्रंथि को सही आकार में रखने में मदद करती हैं। आइए जानते हैं ऐसे कौन से हैं फूड्स हैं, जो थायराइड ग्रंथि को सही आकार में रखते हैं।
ब्रोकली, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, बोक चोय, काले, फूलगोभी, शलजम जैसी विशेष रूप से ब्रैसिसेकी परिवार की पत्तेदार सब्जियां आपको अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए क्योंकि ये आयोडीन के उपयोग को ठीक रखती हैं और ग्रंथि को बढ़ने से रोकती हैं और उसे सही आकार में रखने में मदद करेंगी।
लिवर, मशरूम, ड्राई फ्रूट, मल्टी ग्रेन, मीट, फ्लैक्स सीड्स, एवोकैडो जैसे फूड्स आयरन, सेलेनियम, मल्टी विटामिन, जिंक, कैल्शियम और हेल्दी फैट से भरे हुए होते हैं, जो इंफ्लेमेशन को कम करने में मदद कर सकते हैं। ये सभी इम्यूनिटी और थायराइड के साथ-साथ हड्डियों के आकार को भी हेल्दी रखते हैं।
हर भारतीय भोजन की शान बढ़ाने का काम करते हैं मसाले। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रामाण नहीं है कि ये मसाले आपके लिए कितने हेल्दी साबित हो सकते हैं लेकिन इनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। हल्दी, अदरक, काली मिर्च, लौंग, पुदीना जैसे मसाले न केवल आपके भोजन को स्वादिष्ट बनाने का काम करते हैं बल्कि एंटीऑक्सिडेंट से भी भरपूर होते हैं।
हाइपरथायरायडिज्म के उपचार से पहले कम-आयोडीन युक्त डाइट लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे फूड्स के प्रति सतर्क रहना बहुत ही जरूरी है, जो अप्रत्यक्ष रूप से हमारे थायराइड की स्थिति को खराब करते हैं। आइए जानते हैं ऐसे कौन से फूड्स हैं, जो थायराइड के रोगी के उपचार में बाधा पैदा कर सकते हैं और लक्षणों को गंभीर बना सकते हैं।
आपको सी-फूड से बचना चाहिए क्योंकि ये आयोडीन सामग्री से भरपूर होते हैं। जरूरत से ज्यादा सक्रिय थायराइड से शरीर पर कुछ अपरिवर्तनीय प्रभाव पैदा हो सकता है, जैसे कि ग्रेव्स रोग नाम का ऑटोइम्यून रोग। कई डेयरी और पोल्ट्री फूड्स जैसे पनीर, मक्खन और अंडे की जर्दी भी इस स्थिति के बढ़ने का कारण हो सकती है।
ग्लूटेन, इस ग्रंथि के शिकार लोगों में गंभीर एलर्जी और सूजन का कारण बन सकती है, इसलिए अपनी डाइट में ग्लूटेन को सीमित करने का प्रयास करें। गेहूं, माल्ट और खमीर ऐसे कुछ फूड्स हैं, जिनमें ग्लूटेन की प्रचुर मात्रा होती है और ये इस स्थिति को बढ़ाने का काम करते हैं साथ ही ग्रंथि के आकार को बिगाड़ देते हैं।
सोया भले ही आयोडीन का स्रोत नहीं है लेकिन कुछ शोध यह बताते हैं कि ये थायराइड रोगी के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। इसके सेवन से गंभीर प्रतिक्रिया और इंटोलरेंस हो सकती है।