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मानसून में क्यों बढ़ने लगते हैं फूड पॉइजनिंग के मामले? डॉक्टर से समझें कैसे रहें सुरक्षित

Food Poisoning in Monsoon : मानसून में फूड पॉइजनिंग का खतरा काफी ज्यादा रहता है। ऐसे में सुरक्षित रहना बहुत ही जरूरी है। आइए जानते हैं किन कारणों से मानसून में फूड पॉइजनिंग हो सकता है?

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Written By: Kishori Mishra | Published : July 9, 2026 10:38 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Amit Kumar Sanghi

Food Poisoning During Monsoon : बारिश का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं, गर्म चाय और पकौड़ों का मजा लेकर आता है। लेकिन यही मौसम सेहत के लिए कई चुनौतियां भी पैदा करता है। हर साल मानसून के दौरान फूड पॉइजनिंग के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इसका मुख्य कारण है नमी, गंदा पानी और बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों के पनपने के लिए सहायक वातावरण जिम्मेवार हैं।

जयपुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल की गैस्ट्रोलॉजिस्ट सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अमित  कुमार संघी का कहना है कि मानसून में हवा में नमी अधिक होने की वजह से खाना जल्दी खराब होने लगता है। अगर खाना लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा जाए, तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं। कई बार बाहर मिलने वाला स्ट्रीट फूड भी साफ-सफाई के अभाव में संक्रमण का कारण बन जाता है। दूषित पानी से बनी बर्फ, ठीक से न धोए गए फल और सब्जियां, या अधपका भोजन भी फूड पॉइजनिंग का जोखिम बढ़ा देते हैं।

सिर्फ बाहर का खाना खाने से नहीं होता फूड पॉइजिनिंग

फूड पॉइजनिंग सिर्फ बाहर का खाना खाने से ही नहीं होती है। घर में भी अगर भोजन को सही तरीके से स्टोर न किया जाए, बार-बार गर्म करके खाया जाए या कच्चे और पके हुए भोजन को एक साथ रखा जाए, तो संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए मानसून में खाने की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

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कब दिखने लगते हैं फूड पॉइजनिंग के लक्षण?

फूड पॉइजनिंग के लक्षण आमतौर पर दूषित भोजन खाने के कुछ घंटों से लेकर 1 से 2 दिन के अंदर दिखाई देने लगते हैं। इनमें कुछ लक्षण निम्न हैं-

  1. उल्टी और दस्त होना।
  2. पेट में तेज दर्द या मरोड़ होना।
  3. तेज बुखार आना।
  4. कमजोरी और शरीर में पानी की कमी, इत्यादि।

कुछ लोगों में लक्षण हल्के होते हैं, जिसमें थोड़ा आराम औ पर्याप्त तरल पदार्थ लेने से स्थिति ठीक हो सकती है। लेकिन छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।

डिहाइड्रेशन बढ़ा सकता है खतरा

बार-बार उल्टी या दस्त होने पर शरीर से पानी और जरूरी मिनरल्स तेजी से निकलने लगते हैं, जिसकी वजह से स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन), नारियल पानी या अन्य तरल पदार्थ लेते रहना चाहिए, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।

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कब डॉक्टर को दिखाने की है जरूरत

अगर दस्त या उल्टी लगातार बनी रहे, तेज बुखार हो, मल में खून दिखाई दे, पेशाब कम आने लगे या मरीज अत्यधिक सुस्त महसूस करे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बिना सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेना सही नहीं माना जाता है, क्योंकि हर फूड पॉइजनिंग का इलाज एक जैसा नहीं होता।

फूड पॉइजनिंग के बचने के लिए क्या करें?

डॉक्टर कहते हैं कि इस मौसम में कुछ छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर फूड पॉइजनिंग से काफी हद तक बचा जा सकता है, जैसे-

  • हमेशा ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन खाएं।
  • खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ जरूर धोएं।
  • फल और सब्जियों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें।
  • बाहर का कटा हुआ फल, खुले में रखा खाना या दूषित पानी से बनी बर्फ का सेवन करने से बचें।
  • अगर संभव हो तो उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।
  • बचा हुआ भोजन लंबे समय तक बाहर न रखें और जरूरत पड़ने पर उसे फ्रिज में सुरक्षित रखें।

Disclaimer : अंत में डॉक्टर कहते हैं कि मानसून का आनंद तभी पूरी तरह लिया जा सकता है, जब स्वास्थ्य भी साथ दे। थोड़ी-सी सतर्कता, स्वच्छ खानपान की आदतें और समय पर उपचार न केवल फूड पॉइजनिंग से बचा सकते हैं, बल्कि पूरे परिवार को इस मौसम में स्वस्थ भी रख सकते हैं।