
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr. Rohit Kumar Sharma, Dr. Arvind K. Agarwal
foodborne health (AI generated image)
सुबह की पहली चाय से लेकर रात का आखिरी खाना बनाने तक, हमारी जिंदगी का एक बड़ा समय रसोई के इर्द-गिर्द ही घूमता है। हम सभी ताजा, स्वच्छ सब्जियां खरीदने पर ध्यान देते हैं, मसालों की गुणवत्ता पर ध्यान देते हैं और कोशिश करते हैं कि खाना साफ-सुथरा बने। लेकिन क्या कभी आपने यह सोचा है कि जिस बर्तन में खाना पक रहा है या जिस डिब्बे में उसे सुरक्षित रखा जा रहा है, वह कितना सुरक्षित है ? वह आपकी सेहत पर क्या असर डाल सकता है? सुनने में यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है, लेकिन वर्तमान समय में दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसी मुद्दे पर गंभीरता से बात और विमर्श कर रहे हैं। यह बहुत ही चिंताजनक है कि किस प्रकार सिर्फ साफ-सफाई की कमी के कारण हर साल 86 करोड़ लोग बीमार पड़ रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के हालिया आंकड़े बेहद चौंकाने वाले और चिंताजनक हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में हर साल करीब 86 करोड़ 60 लाख लोग दूषित या असुरक्षित भोजन की वजह से बीमार पड़ जाते हैं। इनमें से लगभग 15 लाख लोगों की मौत हो जाती है, और सबसे ज्यादा चिंता बच्चों को लेकर है। पांच साल से कम उम्र के बच्चे दुनिया की कुल आबादी का सिर्फ 9 प्रतिशत हैं, लेकिन खाने से होने वाली बीमारियों के करीब एक-तिहाई मामले इन्हीं से जुड़े होते हैं।
भारत के लिए यह हमेशा से बड़ा खतरा रहा है, क्योंकि यहां फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री बहुत तेजी से बढ़ रही है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी, पैकेज्ड फूड और रेस्टोरेंट कारोबार का विस्तार लगातार हो रहा है। ऐसे में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भी खाद्य सुरक्षा के नियमों को मजबूत किया है और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई है। अक्सर इतने बड़े लेवल पर तो हम ध्यान देते हैं, लेकिन छोटे लेवल पर ध्यान रखना भूल जाते हैं जैसे कि हमारी रसोई और उसमें इस्तेमाल होने वाले बर्तन।
हम जिन बर्तनों में खाना पका रहे हैं और जिनमें परोस कर खुद खा रहे हैं व अपने बच्चों को खिला रहे हैं, तो क्या वे पूरी तरह से शुद्ध व सुरक्षित हैं? हम अक्सर इस बारे में बहुत ज्यादा सोच ही नहीं पाते हैं और इस स्थिति के लगातार बढ़ने व गंभीर होने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है।
जयपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. रोहित शर्मा कहते हैं कि आज असुरक्षित भोजन का मतलब सिर्फ खराब सामग्री या गंदगी नहीं रह गयी है। यह उस पूरे वातावरण से जुड़ा मामला है, जहां खाना बनाया, रखा और परोसा जाता है। उनके मुताबिक भारत जैसे देश में, जहां तेज आंच पर मसालों के साथ खाना पकाया जाता है, वहां रसोई के बर्तनों की गुणवत्ता और उनकी सफाई बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है।
दरअसल, भारतीय रसोई की अपनी चुनौतियां हैं। यहां बर्तन लगातार गर्मी, नमी, तेल, नमक और इमली, टमाटर, दही या नींबू जैसे अम्लीय पदार्थों के संपर्क में रहते हैं। लंबे समय तक इस्तेमाल होने पर कमजोर या खराब गुणवत्ता वाली सामग्री खराब हो सकती है और उसकी सतह पर बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ सकता है।
दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. अरविंद अग्रवाल कहते हैं कि अब दुनिया भर में फूड सेफ्टी को विज्ञान के नजरिए से देखा जा रहा है। इसलिए भोजन के संपर्क में आने वाली सतहों और बर्तनों की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उनका मानना है कि स्टेनलेस स्टील इस मामले में बेहतर विकल्प है, क्योंकि यह मजबूत होता है, जल्दी खराब नहीं होता और इसकी सफाई भी आसान होती है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स हमेशा प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल करने की बजाय स्टेनलेस स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। इसलिए हमने इंडियन स्टेनलेस स्टील डेवलपमेंट एसोसिएशन (ISSDA) के अध्यक्ष राजामणि कृष्णमूर्ति से भी इस बारे में बात की। उन्होंने बताया कि भारत में खाद्य सुरक्षा के बढ़ते मानकों के साथ स्वच्छ और टिकाऊ किचन इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बढ़ रही है। आश्चर्यजनक बात यह है कि देश में इस्तेमाल होने वाले कुल स्टेनलेस स्टील का लगभग 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा केवल रसोई के बर्तनों और किचनवेयर में उपयोग होता है। यह इस बात का संकेत है कि लोग अब स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर पहले से ज्यादा सजग हो रहे हैं।
हर किसी को यह समझना होगा कि भोजन सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं है बल्कि हमारे परिवार की सेहत की सबसे बड़ी जरूरत भी है। इसलिए फूड सेफ्टी को केवल सरकारी नियमों या फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं माना जा सकता। इसकी शुरुआत हमारे अपने घर से होती है। हो सकता है कि आने वाले समय में बीमारियों से बचाव की सबसे बड़ी लड़ाई किसी अस्पताल में नहीं, बल्कि हमारी अपनी रसोई में लड़ी जाए।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल खान-पान से जुड़ी साफ-सफाई न होने के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी देना है और इसमें दी गई जानकारी का इस्तेमाल ऑटिज्म या किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।