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How to prevent cholera in monsoon: बरसात का मौसम शुरू होने के साथ ही कई तरह की बीमारियों के मामले भी बढ़ने लगते हैं। जैसा कि बारिश के दिनों में पानी से जुड़ी बीमारियां बढ़ जाती हैं ऐसे में दूषित पानी पीने से बचना महत्वपूर्ण है। बरसात के दिनों में होनेवाले जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों के कारण पानी के प्रदूषित होने का रिस्क भी बढ़ जाता है। ऐसे में इस पानी के सम्पर्क में आने से लोगों को स्किन से जुड़ी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, दूषित पानी पीने से पेट से जुड़े इंफक्शन, टायफाइड और पीलिया जैसी बीमारियां भी होने लगती हैं। ऐसी ही एक बीमारी हैजा भी है जो बरसात के दिनों में बहुत अधिक बढ़ सकती है।
इस बार की बरसात में गुजरात (Gujrat), महाराष्ट्र (Maharashtra) और दिल्ली एनसीआर (Delhi-NCR) क्षेत्रों में हैजा की बीमारी का खतरा बढ़ गया है और लोगों को इन बीमारियों से सुरक्षित रहने के लिए सभी जरूरी उपाय करने चाहिए।
बाढ़ और जलजमाव के खतरे वाले क्षेत्रों में अक्सर हैजा या कालरा फैलने की खबरें आती हैं। ऐसी जगहों पर रहनेवाले लोगों को गंदा पानी पीने के कारण हर साल बरसात में हैजा के खतरा होता है। हैजा या कालरा एक गम्भीर बीमारी है। जिस व्यक्ति को यह बीमारी होती है उसके शरीर में पानी की कमी हो जाती है। हैजा के मरीजों को अगर इलाज मिलने में देर हो जाए तो इससे यह जानलेवा साबित हो सकता है।
डायरिया या दस्त
बार-बार उल्टी होना
शरीर में पानी की कमी हो जाना
पेट में दर्द
पैरों में दर्दऔर ऐंठन
डॉ. परिमल वी, थिरूमलेश (Dr. Parimala V Thirumalesh, Sr. Consultant - Neonatology & Paediatrics, Aster CMI Hospital, Bangalore) कहते हैं कि कॉलेरा एक वॉटरबॉर्न डिजिज ( waterborne illness) जो दूषित पानी पीने या दूषित खाना खाने की वजह से होता है। बच्चों में हैजा का खतरा सबसे अधिक होता है और यह चिंता का एक बड़ा विषय भी है। बच्चों में हैजा के लक्षणों की बात करें तो उसमें, डायरिया या डिसेंट्री, उल्टी और गम्भीर डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।