हृदय रोगों से बचाव: इन 6 आदतों को बदलकर आप भी अपने दिल को रख सकते हैं सेहतमंद, पढ़ें कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह

आज के समय में युवाओं में भी हृदय रोगों की समस्या बढ़ती जा रही है, हालांकि कार्डियोलॉजिस्ट मानते हैं कि, जीवनशैली में परिवर्तन लाकर आप हृदय रोगों से बचाव कर सकते हैं।

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Written By: Atul Modi | Published : July 26, 2022 2:11 PM IST

हमारे शरीर में जब तक हृदय का धड़कना जारी रहता है तभी तक ही हम जीवित रहते हैं, और इस बात से ही हम यह अंदाजा लगा सकते हैं कि हृदय का स्वस्थ रहना हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है। जबकि हृदय की देखभाल करने के लिए हमें ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती है मगर फिर भी अधिकांश लोग हृदय की सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। हृदय को हेल्दी रखने के लिए हमें सिर्फ अपनी रोजाना की आदतों में कुछ अच्छी आदतों को शामिल करने और कुछ बुरी आदतों को बाहर निकालने की जरूरत होती है, इसे करना बहुत ही आसान है। एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबई के जाने-माने सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. तिलक सुवर्णा कहते हैं कि, ''आज के समय में हमें सिर्फ अपनी जीवनशैली में बदलाव करने की आवश्यकता है, अनजाने में अपनाई गई खराब आदतों को बदलने की जरूरत है।''

यहां हम आपको एक्सपर्ट के माध्यम से बता रहे हैं उन 6 जीवनशैली से जुड़ी आदतों के बारे में जिन्हें हमें छोड़ना जरूरी है। इससे हमें न सिर्फ एक सेहतमंद जीवन जीने में मदद मिलेगी, बल्कि हम अपने हृदय को भी हेल्दी रख पाएंगे।

हृदय रोगों से बचाव - (Healthy Lifestyle Changes for Heart Disease)

1. अस्वास्थ्यकर (अनहेल्दी) स्नैक्स की आदतें

हमारी खाने की खराब आदतों से हमारे शरीर को होने वाला नुकसान शारीरिक निष्क्रियता, शराब और धूम्रपान को मिलाकर होने वाली बीमारी से भी अधिक होता है। सैचुरेटेड फैट और ट्रान्स फैट को ह्रदय के लिए हानिकारक फैट के रूप में पहचाना जाता है। आजकल बड़ी मात्रा में हमारे द्वारा खाए जाने वाले पदार्थों के माध्यम से सैचुरेटेड फैट और ट्रान्स फैट हमारे शरीर में प्रवेश कर रहा है। आलू चिप्स के एक पैकेट में इतना फैट मौजूद होता है कि यह किसी भी व्यक्ति की फैट की रोज़ाना की आधी जरूरत की पूर्ति कर सकता है। यदि आपको चाय के साथ भुजिया पसंद है तो भारी संख्या में कैलोरी के साथ नमक और ट्रान्स फैट की ऊंची खुराक आपके शरीर में प्रवेश कर जाती है। चिप्स जैसी चीज़ों में फैट भारी मात्रा में होता है। अधिक मात्रा में इसे खाने से कोई भी व्यक्ति ट्रान्स फैट की सुरक्षित सीमा को पार कर जाता है। भारतीय स्नैक्स को ज़्यादातर जिन तेलों में तला जाता है, उनमें कम से कम 13-19 प्रतिशत सैचुरेटेड फैट होता है।

तेल में डूबोकर तले गए खाद्य पदार्थ से दूर रहना और इसकी जगह सेहतमंद स्नैक्स खाना जैसे भुना हुआ चना, फल, अनेकों अनाज से बने बिस्किट, सूखा मेवा (ड्राई फ्रूट) आदि एक अधिक बेहतर विकल्प होगा। सेहतमंद आहार के एक भाग के रुप में भारी मात्रा में फल और सब्जियां, फाइबर से समृद्ध संपूर्ण अनाज, मछली (जहां तक हो सके ऑइली फिश- हर सप्ताह कम से कम दो बार), नट्स यानी काजू, बादाम, अखरोट जैसे कड़े छिलके वाला मेवा, फलियां और बीज का सेवन करें। फैट मुक्त और कम फैट वाले डेयरी उत्पाद और लीन मीट और पोल्ट्री (त्वचारहित) का उपयोग करें। शक्कर का इस्तेमाल किए गए पेय पदार्थों का सेवन सीमित रखें। स्थानीय उत्पादकों से ताज़ा किराने का सामान खरीदें और प्रॉसेस्ड फूड और पेय पदार्थों से दूर रहें।

2. नमक का अत्यधिक सेवन

खाने में बहुत ज़्यादा नमक के सेवन से हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है जो हृदय रोग, हार्ट अटैक और कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर के लिए एक प्रमुख कारण माना जाता है। बहुत ज्यादा नमक का सेवन करने से शरीर में अधिक मात्रा में पानी जमा रहता है, और शरीर में द्रव पदार्थ के जमा होने की बिगड़ती स्थिति का संबंध हार्ट फेल्योर से है। वयस्कों को हर दिन 6 ग्राम यानि एक छोटे चम्मच से कम नमक का सेवन करना चाहिए।

इसमें वह नमक की मात्रा भी शामिल है जो ब्रेड जैसे तैयार खाद्य पदार्थ में शामिल होता है और जो नमक आप खाना बनाते समय डालते हैं और खाने के मेज पर बैठने के बाद लेते हैं। बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार, वयस्कों से भी कम नमक खाना चाहिए। खाने के लेबल में दिए गए पोषण संबंधी जानकारी देखें और कम नमक वाले विकल्पों और सामग्रियों का चयन करें। आपके भोजन में स्वाद लाने के लिए काली मिर्च, शाक, लहसून, मसालों या नींबू जूस आदि का इस्तेमाल करें।

3. शारीरिक गतिविधि की कमी

शारीरिक गतिविधियों की कमी अपने साथ कई बड़े खतरे लेकर आती है जिसमें शामिल है हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हृदय से संबंधित अन्य समस्याएं। पैदल चलने की शुरुआत करना आपके संपूर्ण स्वास्थ्य में प्रभावी तरीके से सुधार लाने और, सकारात्मक बदलाव लाने का एक आसान तरीका है। रोजाना 30-40 मिनट तेज चलने से शरीर में लचीलापन आता है और इसमें सफल होने का दर भी बहुत अधिक होता है क्योंकि लोगों के लिए इसे रोजाना करना आसान होता है। आपके संपूर्ण कार्डियोवास्कुलर (हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी) स्वास्थ्य के लिए अमेरिकन हार्ट असोसिएशन हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट का मध्यम दर्जे का व्यायाम या हर सप्ताह 75 मिनट का कठोर व्यायाम (या मध्यम और कठोर गतिविधि का एक मिलाजुला तरीका) करने की सलाह देता है।

पर्यावरण में होने वाला प्रदूषण आज दुनिया में लोगों का सबसे बड़ा हत्यारा बन गया है। सप्ताह में एक बार अपने काम पर पैदल जाएं या साइकिल से जाने की कोशिश करें। सार्वजनिक परिवहन के साधन चुनें। सभी के द्वारा एकत्रित सहभागी होने से हमारे ग्रह पर प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा परिवर्तन आ सकता है।

4. धूम्रपान करना और तंबाकू चबाना

धूम्रपान करने से कार्डियोवास्कुलर (हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी) बीमारियों के विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है जिसमें शामिल है कोरोनरी हार्ट डिसीज़ और स्ट्रोक। इस प्रकार धूम्रपान करने से आपके धमनियों की लाइनिंग को नुकसान पहुंचता है और वसायुक्त सामग्री (एथेरोमा) जमा होने लगती है जिससे धमनियां संकरी होती जाती है। इसकी वजह से एंजीना, हार्ट अटैक या स्ट्रोक आने का खतरा हो सकता है। तंबाकू के धुएं में मौजूद कार्बन मोनोक्साइड आपके खून में ऑक्सीजन की मात्रा को कम करता है। इसका मतलब है आपके शरीर के आवश्यक ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए आपके हृदय को अधिक मेहनत करते हुए पंपिंग करनी पड़ती है। यह पैसीव स्मोकर्स के लिए भी खराब है यानी वे लोग जो धूम्रपान कर रहे व्यक्ति के आसपास मौजूद होते हैं।

5. अत्यधिक तनाव

तनाव अप्रत्यक्ष रुप से आपके हृदय को प्रभावित करता है। तनाव के कारण आपका ब्लड प्रेशर बढ़ने, जरूरत से अधिक खाने, कम व्यायाम करने और अधिक धूम्रपान करने की संभावना होती है। और इन्हीं कारणों से आपमें हृदय से जुड़ी समस्या होने की संभावना भी बढ़ जाती है। संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए तनाव से बचना और इसे कम करना फायदेमंद हो सकता है। जबकि पूरी तरह तनाव रहित जीवन जीना आपके लिए असंभव है, लेकिन फिर भी अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव लाना संभव है ताकि आपके हृदय पर होने वाले हानिकारक प्रभावों को कम किया जा सके। खुद को आराम देने के लिए समय निकालें, आपके किसी शौक में या किसी मनोरंजन वाली मजेदार गतिविधि से खुद को जोड़े रखें, ध्यान करें और श्वसन संबधी व्यायाम करें जो तनाव दूर करने में सहायक हो सकते हैं।

6. शराब का अत्यधिक सेवन

शराब का अधिक मात्रा में सेवन का संबंध हाई ब्लड प्रेशर, खून में फैट के उच्च स्तर, और हार्ट फेल्योर के बढ़े हुए खतरे से है। इसके अलावा अतिरिक्त कैलरी से वज़न बढ़ सकता है जो हृदय स्वास्थ्य के लिए खतरा है। किसी भी मात्रा में ली गई शराब आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं होती और इसे लेने के लिए डॉक्टर पर्ची पर लिखकर नहीं देते।

(Inputs By: Dr. Tilak Suvarna, Senior Interventional Cardiologist, Asian Heart Institute, Mumbai)