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कैनेडियन मेडिकल ऐसोसिएशन जर्नल में इस बारे में एक अध्ययन प्रकाशित किया गया है.© Shutterstock
छोटी-सी उम्र में भारी होता शरीर, बचपन में बड़ों जितना वज़न, बड़ों को होनेवाली बीमारियां, ढेर सारी कॉम्प्लिकेशन्स। जहां दूसरे बच्चे इस उम्र में खेलते-कूदते हैं, वहीं मोटापे के शिकार बच्चों को अपना काम करना भी मुश्किल लगता है। वैसे तो मोटापे के बढ़ने का सबसे प्रमूख कारण हमारा गलत खान-पान है लेकिन हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि हमारे घरों में साफ-सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले फ्लोर-क्लीनर्स बच्चों के मोटापे का कारण बन रहे हैं। हम सभी अपने घरों के फर्श को चमकदार बनाए रखना चाहते हैं इसीलिए बाज़ार में मौजूद तमाम तरह के फ्लोर क्लीनर्स से घरों की सफाई करते हैं ताकि घर चमके भी और महके भी, यही फ्लोर क्लीनर्स आपके बच्चों के मोटापे की वजह बन सकते हैं।
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हाल ही में हुई एक रिसर्च के मुताबिक शोधार्थियों ने यह दावा किया है कि घरों में साफ - सफाई के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले कीटाणुनाशक और अन्य केमिकल बच्चों में मोटापे की समस्या बढ़ा सकते हैं। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि फिनायल, हारपिक, लाइजोल और इस तरह के अन्य उत्पाद बच्चों के ‘गट माइक्रोब्स’ (मानव के पाचन तंत्र में रहने वाले सूक्ष्म जीव) में बदलाव कर बच्चों में वजन बढ़ने की प्रवृत्ति को बढ़ा सकते हैं।
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कैनेडियन मेडिकल ऐसोसिएशन जर्नल में इस बारे में एक अध्ययन प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन के लिए कनाडा की अल्ब्रेटा यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने 3-4 महीने की आयु के 757 शिशुओं के ‘गट माइक्रोब्स’ का विश्लेषण किया। अध्ययन के दौरान घरों में इस्तेमाल किए जाने वाले कीटाणुनाशक, सफाई सामग्री और अन्य पर्यावरण हितैषी उत्पाद के प्रभावों का विश्लेषण करते हुए बच्चों का वजन मापा गया।
अध्ययन में यह पाया गया कि घरों में कीटाणुनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल किए जाने से 3-4 माह की आयु वाले बच्चों के ‘गट माइक्रोब्स’ में बदलाव आया। उन्होंने पाया कि अन्य डिटर्जेंट और सफाई में इस्तेमाल होने वाले अन्य उत्पादों का भी बच्चों पर ऐसा ही प्रभाव पड़ा।