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Written By: Anshumala | Published : September 1, 2018 2:06 PM IST
भारत में अभी भी नेत्रदान का आंकड़ा बहुत कम बना हुआ है। © Shutterstock.
नेत्रदान में एक व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का वचन देता है। भारत में, लाखों लोगों को दोबारा अपनी आंखों की रोशनी हासिल करने के लिए कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की जरूरत है। दुर्भाग्य से, 10 प्रतिशत से भी कम लोगों को इसका लाभ मिल पाता है और बहुत सारे लोगों को दृष्टिहीन रहना पड़ता है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में 1.2 करोड़ लोग कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के लिए इंतजार कर रहे हैं।
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल (नई दिल्ली) की वरिष्ठ सलाहकार एवं नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. उमा मलीहा का कहना है कि पूरी दुनिया की दृष्टिहीन जनसंख्या का एक चौथाई हिस्सा भारत में है, जिसमें से अधिकांश बच्चे हैं। इन चौंकाने वाले आंकड़ों की वजह से मृत्यु के बाद नेत्र दान को अनिवार्य बनाने जैसे प्रस्ताव आगे आए हैं।
डॉ. उमा मलीहा कहती हैं कि भारत में नेत्रदान को बढ़ाने की जरूरत के बारे में जन जागरूकता फैलाने के लिए सरकार, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और निजी संस्थानों द्वारा काफी प्रयास किए गए हैं। अभी भी दान का आंकड़ा बहुत कम बना हुआ है। मृत्यु पश्चात नेत्रदान में संकोच का कारण प्रक्रिया के बारे में कम जागरूकता के साथ-साथ अंधविश्वास है, जो अंग दान के बारे में कम जानकारी की कमी से उत्पन्न होता है।
डॉ. उमा नेत्रदान के बारे में ऐसी पांच चीजों के बारे में जानकारी दे रही हैं जो अधिकांश लोगों को ऐसा करने से रोकती हैं-
नहीं होती पूरी आंख ट्रांसप्लांट
वर्तमान में, केवल कॉर्निया और स्क्लेरा का उपयोग ट्रांसप्लांटेशन के लिए किया जा सकता है न कि पूरी आंख का। कॉर्निया एक ट्रांसप्लांट परत है, जो आंख के अगले हिस्से को कवर करता है और स्क्लेरा आंख का सफेद भाग है। वास्तव में, कॉर्निया ट्रांसप्लांट वर्तमान में मानवों में सबसे अधिक उपयोग होने वाली सामान्य ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में से एक है।
पूरी दुनिया की दृष्टिहीन जनसंख्या का एक चौथाई हिस्सा भारत में है। © Shutterstock.
नेत्रदान करने की कोई उम्र सीमा नहीं
यदि कोई व्यक्ति अपनी आंख दान करने का वचन देता है तो उन्हें केवल उसकी मृत्यु के पश्चात ही प्राप्त किया जाता है। अधिकांश मामलों में, आंखों का उपयोग जरूरमंद को रोशनी का उपहार देने में किया जाता है, लेकिन 80 साल की उम्र के बाद कई बार आंख दान के लिए अनुपयोगी हो सकती है। मृत्यु होने के 4-6 घंटों के भीतर आंख को प्राप्त करना चाहिए और दान की गई आंखों का उपयोग 4 दिन के भीतर किया जाना चाहिए।
नेत्रदान मेरे धर्म के खिलाफ है
दुनिया के सभी प्रमुख धर्म नेत्रदान का समर्थन करते हैं और इसे एक महान सामाजिक सेवा के रूप में प्रोत्साहित करते हैं, जो किसी को बेहतर गुणवत्ता वाला जीवन जीने की क्षमता प्रदान करती है। रोशनी का यह उपहार उन अच्छे मूल्यों के अनुरूप है, जिन्हें दुनिया के धर्मों द्वारा प्रचारित किया जाता है।
दानदाता का परिवार न तो पैसा देगा या प्राप्त करेगा
यह समाज सेवा का पूरी तरह से स्वैच्छिक कार्य है, जिसके लिए दानदाता या उसके परिवार को कोई पैसा नहीं दिया जाता है, क्योंकि अंगों की बिक्री या खरीद गैर-कानूनी है। दानदाता के परिवार को नजदीकी नेत्र बैंक से संपर्क करना चाहिए ताकि चिकित्सक आकर परीक्षण कर सके और आंखों को प्राप्त कर सके। इस पूरी प्रक्रिया में मुश्किल से आधा घंटे का समय लगता है। दानदाता के परिवार से नेत्रदान की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए किसी भी तरह की राशि का भुगतान करने के लिए नहीं कहा जाता है।
हर कोई नेत्रदान करने के लिए योग्य नहीं है
आंखें दान करने के लिए सबसे आसान अंगों में से एक है। कमजोर दृष्टि और यहां तक कि मोतियाबिंद का इलाज करवा चुकी आंखों को भी दान करने में कोई परेशानी नहीं है। दानदाता को उच्च जोखिम वाली बीमारियों जैसे एचआईवी, हेपेटाइटिस, सिफिलिस आदि के लिए परीक्षण कराने की जरूरत होती है। ऐसे मामलों में जहां आंखों के टिशू दान के लिए उपयुक्त नहीं हैं, उन्हें मेडिकल रिसर्च के लिए उपयोग किया जाता है।