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युवाओं के लिए कोविड का बूस्टर डोज लेना क्यों जरूरी है, एक्सपर्ट से जानिए 5 बड़े कारण

युवाओं के लिए कोविड का बूस्टर डोज लेना क्यों जरुरी है, इस बारे में विस्तार से जानकारी दे रही हैं डॉ विनीता सिंह टंडन (कंसल्टेंट- इंटरनल मेडिसिन, पीएसआरआई अस्पताल, दिल्ली).

Written by Atul Modi |Published : October 5, 2022 2:39 PM IST

जिस तरह से कोविड की लहर ने दुनिया भर में अपना कहर बरपाया, उसमें टीकों के चलते ही न केवल बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकी, बल्कि आम जीवन दुबारा पटरी पर लौट सका। वैज्ञानिकों के मुताबिक, करोड़ों जानें टीकों के चलते ही बचाई जा सकी। कोविड में खतरा सबसे अधिक गंभीर बीमारी व बड़ी उम्र के लोगों को ही होता है, जबकि स्वस्थ नौजवानों को अक्सर कोविड संक्रमण के बाद भी अस्पताल जाने की नौबत नहीं आती है। ऐसे में सवाल उठता है कि नौजवानों को क्यों कोविड का बूस्टर डोज लेना चाहिए।

नौजवानों को क्यों कोविड का बूस्टर डोज लेना चाहिए?

1. इस बारे में बात करते हुए डॉ विनीता सिंह टंडन (कंसल्टेंट- इंटरनल मेडिसिन, पीएसआरआई अस्पताल, दिल्ली) कहती हैं, "टीके अलग-अलग क़िस्म के होते हैं। जहां चेचक जैसी बीमारी के टीके का असर जीवन भर रहता है, वहीं कोविड टीके का असर कुछ महीने में ही कम होने लगता है। यह अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे होता है- टीका लेने के 6 महीने के बाद संक्रमण से प्रतिरोध 21% कम तथा गंभीर संक्रमण से प्रतिरोध 10% कम हो जाता है। हालांकि बढ़ती उम्र के साथ ये गिरावट बढ़ती जाती है; सभी उम्र के लोगों में टीके का असर समय के साथ कम होता है। इसलिए बूस्टर डोज लेना इसलिए जरूरी बन जाता है ताकि शरीर में कोविड से लड़ने की ताक़त बनी रहे।

2. डॉ विनीता सिंह टंडन आगे कहती हैं, "यह तो सच है कि नौजवानों में संक्रमण के बाद भी गंभीर लक्षण कम ही देखे जाते हैं, पर नौजवानों से संक्रमण ऐसे लोगों को जरूर हो सकता है जिनमें गंभीर लक्षण तुरंत आ जाएं। आपके आस-पास बुजुर्ग माता-पिता या फिर गर्भवती महिलाएँ हो सकती हैं जिनके लिए कोविड और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए भी आवश्यक है कि आप बूस्टर डोज जल्द से जल्द लें।"

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3. डॉ विनीता के मुताबिक, डॉक्टरों और वैज्ञानिकों में अभी भी लॉन्ग कोविड के कारणों को लेकर स्पष्टता नहीं है। 30% तक लोगों को कोविड संक्रमण के बाद भी लंबे वक्त तक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। टीकों से लॉन्ग कोविड के असर को रोका जा सकता है। बूस्टर डोज से इसके खतरे को और कम किया जा सकता है।

4. डॉक्‍टर ने बताया कि, कोविड से जुड़ा हुआ एक अहम पहलू है समय और ऊर्जा का नुकसान। भले ही कोविड के संक्रमण का असर कम हो, फिर भी संक्रमण का मतलब ही है काम या पढ़ाई का नुक्सान यानिकि सीधे तौर पर आर्थिक नुक्सान। बूस्टर डोज इन खतरों से आपको बचाएगा।

5. डॉक्‍टर ने कहा कि, पिछले 2 सालों में कोविड वायरस के अलग-अलग वैरिएंट्स सामने आते रहे हैं तथा वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसे वैरिएंट भविष्य में भी सामने आते रहेंगे। इस वैरिएंट्स से बचाव के लिए जरूरी है कि बहुसंख्यक जनसंख्या में कोविड से प्रतिरोध मौजूद रहे।

नौजवानों को भी जल्द से जल्द कोविड का बूस्टर डोज ले लेना चाहिए, जिससे वो खुद तो स्वस्थ सुरक्षित रहे हीं- अपने आस-पास परिवारजनों और दोस्तों को भी सुरक्षित रखें। तभी कोविड के खिलाफ़ लड़ाई जीती जा सकती है।

(Inputs By: Dr Vineeta Singh Tandon, Consultant - Internal Medicine, PSRI Hospital)

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