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दो मरीजों के गले में फंसे मछली के कांटे, डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक निकाले

नवी मुंबई स्थित मेडिकवर अस्पताल में दो ऐसे केस आए जो बहुत ही ज्यादा चौंकाने वाले थे। इसमें एक महिला और एक पुरुष के गले में मछली खाते समय उसका कांटा फंस गया था, जिसे डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक उन कांटे को निलाना।

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Written By: Vidya Sharma | Published : July 28, 2026 4:22 PM IST

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Medically Verified By: Dr Rajendra Waghela

अक्सर लोग मछली खाते समय इस बात का ध्यान रखते हैं कि उसका कांटा गले में न फंस जाए, लेकिन नवी मुंबई के मेडिकवर अस्पताल में एक ऐसा केस देखने को मिला जिसमें दो लोगों के गले में मछली के कांटे फंस गए। जी हां, यह चौंकाने वाली खबर ज़रूर है, लेकिन इससे सबक लेने की भी जरूरत है। दरअसल, पिछले कुछ दिनों में डॉक्टरों के पास ऐसे कई मामले सामने आए हैं। मेडिकव्हर हॉस्पिटल के ईएनटी एवं एंडोस्कोपिक सर्जन डॉ. राजेंद्र वाघेला, अगर कांटा गले में गहराई तक फंस जाए या गर्दन के अंदर के नरम हिस्से में चला जाए, तो इससे गंभीर संक्रमण, सांस लेने में दिक्कत और जान का खतरा भी हो सकता है। 

ऐसे ही दो मामलों में एक महिला और एक पुरुष ने अलग-अलग समय पर खाना खाते हुए गलती से मछली का कांटा निगल लिया। शुरुआत में दोनों ने इसे छोटी समस्या समझा, लेकिन बाद में कांटा गर्दन के अंदर गहराई तक पहुंच गया और उनकी हालत गंभीर हो गई। ऐसी स्थिति में मेडिकवर अस्पताल के डॉक्टरों ने तुरंत इलाज करके दोनों की जान बचाई है।

क्या है पहला केस?

पहला केस रोमा खन्ना (बदला हुआ नाम) का है, जो 53 वर्ष की हैं। वह खोपोली की रहने वाली हैं। हुआ यह कि रात के खाने में मछली खाते समय उन्होंने गलती से मछली का कांटा निगल लिया। इसके बाद उनके गले में तेज दर्द होने लगा और खाना निगलने में परेशानी होने लगी। धीरे-धीरे उनकी तकलीफ बढ़ती गई और एक सप्ताह के भीतर उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी।

क्या है दूसरा केस?

पहला केस महिला का था और दूसरा केस पुरुष का है। नरेश सूरी (बदला हुआ नाम) 60 साल के हैं और शिक्षक हैं। दोपहर के भोजन के दौरान मछली खाते समय उन्होंने भी गलती से मछली का कांटा निगल लिया। इसके बाद उन्हें गले में कुछ फंसा हुआ महसूस हुआ और तेज दर्द शुरू हो गया। उन्होंने पहले चावल का गोला निगला, फिर केला खाकर कांटा निकालने की कोशिश की, लेकिन इससे कोई राहत नहीं मिली। 

दोनों ही व्यक्ति इसके बाद अस्पताल पहुंचे, जहां से उन्हें मेडिकवर हॉस्पिटल्स भेजा गया। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के मामले अब पहले से ज्यादा सामने आ रहे हैं। अगर समय पर सही इलाज न मिले, तो मरीज की जान को भी खतरा हो सकता है।

महिला की सर्जरी में क्या परेशानियां हुईं?

मेडिकवर अस्पताल के ईएनटी एवं एंडोस्कोपिक सर्जन डॉक्टर राजेंद्र वाघेला ने कहा, "महिला मरीज गंभीर हालत में हमारे पास आई थीं। शुरुआती जांच में वीडियो लैरिंगोस्कोपी के दौरान गले के दाईं तरफ सूजन दिखाई दी, लेकिन मछली का कांटा नजर नहीं आया। इसके बाद सीईसीटी (CECT) स्कैन किया गया, जिसमें पता चला कि कांटा गले से निकलकर गर्दन के अंदर एडम्स एप्पल के ऊपर गहराई में फंस गया था।"

"वहां मवाद भी बन गया था। जांच के दौरान मरीज को सांस लेने में ज्यादा परेशानी होने लगी और उनका ब्लड प्रेशर भी काफी बढ़ गया। आगे हृदय की जांच में पता चला कि उन्हें हार्ट अटैक (NSTEMI) आया था और उनका दिल भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। एंजियोग्राफी में हृदय की कई धमनियों में रुकावट पाई गई।"

डॉक्टरों के सामने बड़ी चुनौती क्या थी?

डॉक्टरों के सामने बड़ी चुनौती थी कि उन्हें मरीज के हृदय की स्थिति को संभालने के लिए पहले एंजियोप्लास्टी और ब्लड थिनर देना जरूरी था। लेकिन अगर ब्लड थिनर दिया जाता, तो गर्दन की सर्जरी के दौरान ज्यादा खून बहने का खतरा होता। इसलिए ईएनटी सर्जन डॉ. राजेंद्र वाघेला और डॉक्टर विष्णु पूजारी, कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर तमीरुद्दीन दानावड़े और एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर मेघना चौधरी ने मिलकर पूरी स्थिति पर चर्चा की और सभी की सहमति से मरीज की सर्जरी करने का फैसला लिया।

सर्जरी के दौरान गर्दन में सूजन और संक्रमण होने की वजह से मछली का कांटा ढूंढना आसान नहीं था। इसलिए ऑपरेशन के दौरान अल्ट्रासाउंड मशीन की मदद ली गई। अल्ट्रासाउंड की मदद से कांटे की सटीक स्थिति का पता चला। इसके बाद गर्दन के नरम हिस्से में हायॉइड हड्डी के पास फंसे मछली के कांटे को सुरक्षित तरीके से निकाल लिया गया। यह पूरी सर्जरी करीब एक घंटे में सफलतापूर्वक पूरी हुई।

ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत कैसी थी?

कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर तमीरुद्दीन दानावडे ने बताया "ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर रही और उन्हें लगातार निगरानी में रखा गया। बाद में चरणबद्ध तरीके से एंजियोप्लास्टी की गई और हृदय की दोनों धमनियों का सफल इलाज किया गया। इसके बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर चली गईं। यह मामला काफी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि सर्जरी न करने पर मरीज की सांस की नली बंद हो सकती थी। साथ ही, हार्ट की गंभीर समस्या के बावजूद जनरल एनेस्थीसिया देना भी जोखिम भरा था। यह सफल इलाज सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों के मिलकर किए गए प्रयास का परिणाम है।"

डॉक्टरों ने केवल महिला मरीज की ही नहीं, बल्कि इसी तरह की समस्या लेकर आए एक पुरुष मरीज की भी समय पर इलाज करके उनकी जान बचाई।

डिस्क्लेमर: जब भी आप मछली या इस तरह की बारीक और गले में फंसने वाली चीज खाएं, तो ध्यान से खाएं। अगर ऐसी स्थिति कभी बन जाए तो घर में अलग-अलग तरीका अपनाने की बजाय डॉक्टर के पास जाएं और डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। खुद से उठाया गया कोई भी कदम जोखिम बढ़ा सकता है।