वेस्ट नील वायरस से नीदरलैंड में पहला व्यक्ति संक्रमित, जानें, क्या है वेस्ट नील वायरस और इसके लक्षण

नीदरलैंड में पिछले हफ्ते वेस्ट नील वायरस से एक व्यक्ति के संक्रमित होने की खबर सामने आई है। यह नीदरलैंड में पहला ऐसा मामला है। आखिर क्या है वेस्ट नील वायरस? कैसे फैलता है, क्या कोरोना की ही तरह है खतरनाक, क्या हैं इसके लक्षण, जानें यहां...

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Written By: Anshumala | Updated : October 16, 2020 11:19 PM IST

नीदरलैंड में पिछले हफ्ते वेस्ट नाइल वायरस से एक व्यक्ति के संक्रमित होने की खबर सामने आई है। यह नीदरलैंड में पहला ऐसा मामला है। कहा जा रहा है कि उट्रेच क्षेत्र (Utrecht region) में मच्छर के काटने से आदमी संक्रमित हुआ था। सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी RIVM ने कहा कि ऐसा पहली बार है कि वेस्ट नाइल या नील वायरस का संक्रमण नीदरलैंड्स में एक व्यक्ति में पाया गया है। आमतौर पर वेस्ट नील वायरस (West Nile virus in hindi) से संक्रमित मनुष्यों में से एक प्रतिशत में इन्सेफेलाइटिस (Encephalitis) या गंभीर न्यूरोलॉजिकल रोग (Neurological Disease) विकसित होता है, जिसमें लगभग 20 प्रतिशत हल्के फ्लू जैसे लक्षण या बुखार होते हैं। बाकी कुछ लोगों में कोई भी लक्षण नहीं नजर आते हैं।

पिछले महीने एक जानवर में यह वायरस पाया गया था, जब उट्रेच क्षेत्र में एक पक्षी वेस्ट नील वायरस से संक्रमित हो गया था। अगस्त के अंत में भी उट्रेच क्षेत्र में वॉर्ब्लर पक्षी में यह वायरस डिटेक्ट होने के बाद पकड़ा गया था, जिसके बाद एरेसमस मेडिकल सेंटर द्वारा वॉर्निंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया था। “संक्रमित पक्षियों पर मच्छरों के बैठने से वे संक्रमित हो जाते हैं। उसके बाद इन मच्छरों के जरिए ही दूसरे पक्षी, इंसान और अन्य स्तनधारी जैसे घोड़ों में वायरस को फैलाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। यह वायरस इंसान से इंसान में या मानव से पशु में नहीं फैलता है।

क्या है वेस्ट नील वायरस (What Is West Nile Virus)

क्यूलेक्स मच्छर से फैलाता है वेस्ट नील वायरस, इसलिए इसे मच्छर जनित रोग भी कहा जाता है। गर्मियों में वेस्ट नील बुखार से मच्छर-जनित संक्रमणों या रोगों के होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है। इससे न्यूरोलॉजिकल बीमारी हो सकती है। इंसान संक्रमित मच्छरों के काटने से वेस्ट नील वायरस से होने वाले संक्रमण का शिकार हो सकता है। इतना ही नहीं, यह वायरस अन्य संक्रमित जानवरों, उनके खून या अन्य ऊतकों के संपर्क के माध्यम से भी फैल सकता है। इसकी पहचान वर्ष 1953 में नील डेल्टा क्षेत्र में हुई थी, तभी इसका नाम वेस्ट नील वायरस (West Nile virus in hindi) पड़ा। माना जाता है कि यह वायरस सबसे पहले घोड़ों में पाया गया था और घोड़ों के जरिए यह मच्छरों में जाते हैं और फिर इंसान इससे संक्रमित होते हैं।

वेस्ट नील वायरस के लक्षण (Symptoms Of West Nile Virus)

वेस्ट नील वायरस मच्छरों के जरिए इंसानों में प्रवेश करता है। जब आपके शरीर में यह वायरस प्रवेश कर जाता है, तो आपको सिरदर्द, बुखार, बदन दर्द, चक्कर, उल्टी आना, त्वचा पर निशान पड़ने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। इसके अलावा निम्न लक्षणों पर भी गौर करना चाहिए-

  • स्किन पर चकत्ते उभर आना
  • लिम्फ नोड्स में सूजन
  • गर्दन में अकड़न
  • ध्यान केंद्रित करने में समस्या, कोमा
  • दौरे पड़ना
  • मांसपेशियों में कमजोरी महसूस करना
  • याद्दाश्त चले जाना, भ्रम
  • चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन
  • बहुत गुस्सा आना आदि।

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