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फाइब्रोमायल्जिया एक सिंड्रोम (Fibromyalgia Syndrome) है जिसके लक्षण इतने सामान्य लगते हैं कि व्यक्ति उसे किसी बीमारी का रूप नहीं दे पाता है। जैसे कि 7-8 घंटे सोने के बाद भी नींद आना, आराम मिलने के बाद भी थका हुआ महसूस करना, मांसपेशियों में दर्द होना, हड्डियों में दर्द, सिर में दर्द, डिप्रेशन, एंग्जाइटी, ड्राई आई, किसी चीज पर फोकस करने में दिक्कत होना और ब्लैडर प्रॉब्लम आदि फाइब्रोमायल्जिया के लक्षण (Fibromyalgia symptoms) हो सकते हैं। कुछ लोग फाइब्रोमायल्जिया की तुलना गठिया रोग (Arthritis) से भी करते हैं। रिसर्च बताती हैं वैसे तो फाइब्रोमायल्जिया सिंड्रोम किसी को भी हो सकता है लेकिन यह महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को शिकार बनाता है। आज इतनी टेक्नोलॉजी आ जाने के बाद भी फाइब्रोमायल्जिया का कोई इलाज नहीं है। लेकिन इसके लक्षणों को समझकर, दवाओं का सेवन कर, थेरपी और लाइफस्टाइल में बदलाव कर इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
फाइब्रोमायल्जिया होने पर आपका मस्तिष्क और नर्व ओवर रिएक्ट कर सकते हैं या इनमें ज्यादा दर्द हो सकता है। ऐसा मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन के कारण होता है। फाइब्रोमायल्जिया आपके इमोशन्स (Emotions) और एनर्जी लेवल (Energy Level) को भी प्रभावित कर सकता है।
कुल साल पहले तक फाइब्रोमायल्जिया सिंड्रोम सिर्फ महिलाओं में देखा जाता था लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि पुरुष इस बीमारी की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। जिसके चलते उनमें इमोशन संबंधी बदलाव, शरीर में दर्द और तनाव जैसे लक्षण दिख रहे हैं। अमेरिकन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित 2018 की एक रिसर्च के अनुसार फाइब्रोमायल्जिया पुरुषों की क्वॉलिटी ऑफ लाइफ, करियर और रिलेशनशिप को तेजी से प्रभावित करता है। लेकिन पुरुष समाज में अपने स्टेटज को बनाए रखने के लिए और वह कमजोर न दिखें इसलिए न ही डॉक्टर के पास जाते हैं और न ही इसका इलाज कराते हैं। जिसमें चलते यह बीमारी पुरुषों को कई मानसिक रोगों का शिकार भी बना रही है।
डॉक्टर फाइब्रोमायल्जिया का इलाज टेस्ट के साथ शुरू करते हैं। इसमें डॉक्टर एरिथ्रासाइट सेडीमेंटेशन रेट टेस्ट, सीबीसी, गठिया, साइक्लिक सिट्रुलिनेटेड पेप्टाइड टेस्ट और थायराइड फंक्शन टेस्ट करवाने को बोलते हैं। इसके बाद डॉक्टर ऐसी दवा या थेरेपी करते हैं जिससे सबसे पहले मरीज को दर्द से आराम मिले। डॉक्टर मरीज को दर्द निवारक दवाएं, एंटीडिप्रेसेंट्स, एंटीसीजर ड्रग्स लेने को कह सकते हैं। थेरेपी, एक्सरसाइज, योग, मसाज, संतुलित डाइट, एक्यूपंचर, मेडिटेशन और पर्याप्त नींद लेने को कहते हैं।