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फाइब्रॉइड्स में सावधानी है जरूरी, हो सकती हैं दूसरी गंभीर समस्याएं

फाइब्रॉइड गर्भाशय में होने वाला कैंसर रहित ट्यूमर है। इनमें से 99 प्रतिशत मामले नॉनकैंसरस होते हैं।

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Written By: Anshumala | Published : October 17, 2018 8:41 AM IST

आजकल फाइब्रॉइड महिलाओं की सबसे आम समस्या बन गई है। फाइब्रॉइड के कारण महिलाओं में कई दूसरी समस्याएं भी शुरू हो जाती हैं। इनमें माहवारी के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग से लेकर पेट दर्द और पेशाब की थैली पर दबाव के लक्षण जिससे बार-बार बाथरूम जाना पड़ता है, शौच के दौरान समस्या जो कि पेट में बड़ी मात्रा में द्रव्य जमा होने की वजह से होता है। खासतौर से अविवाहित महिलाओं में फाइब्रॉइड्स के चलते बांझपन, गर्भपात और गर्भधारण में दिक्कत हो सकती है। आपको भी है जंक फूड खाने की लत ? हो सकती है इन्फर्टिलिटी की समस्या

क्या है फाइब्रॉइड

फाइब्रॉइड गर्भाशय में होने वाला कैंसर रहित ट्यूमर है। इनमें से 99 प्रतिशत मामले नॉनकैंसरस होते हैं। जेपी हॉस्पिटल की गायनोकोलॉजिस्ट व इंफर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉक्टर श्वेता गोस्वामी कहती हैं कि कुछ समय पहले तक फाइब्रॉइड हटाने के लिए महिलाओं की ओपन सर्जरी कराने का एकमात्र जरिया था जिससे उनके गर्भाशय में दिक्कत हो जाती थी। आजकल आधुनिक तकनीकों की मदद से किसी भी तरह के फाइब्रॉइड को लैप्रोस्कोपिक या हिस्टेरोस्कोपिक के जरिए निकाला जा सकता है। अगर अनुभवी हाथों से यह प्रकिया की जाए तो गर्भाशय को पूरी तरह सुरक्षित बचाया जा सकता है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि फाइब्रॉइड्स बार-बार आते रहते हैं। यहां तक कि सर्जरी के कुछ साल बाद ये दोबारा आ जाते हैं। इस समस्या से बचाव भी अब संभव है।

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लैप्रोस्कोपिक यूटरीन आर्टरी लाइगेशन तकनीक

आजकल खासतौर पर डिजाइन की गई लैप्रोस्कोपिक यूटरीन आर्टरी लाइगेशन नामक नई तकनीक फाइब्रॉइड के वापस आने की समस्या को रोकता है। यह फाइब्रॉइड रिमूवल के समय होने वाले रक्त के नुकसान को भी रोकता है। यह तकनीक लैप्रोस्कोपिक आधार पर इस्तेमाल की जाती है। इसमें यूटरीन आर्टरी को उसकी शुरू की जगह पर ही क्लिप कर दिया जाता है। यह तकनीक लैप्रोस्कोपिक के सभी फायदे मुहैया कराती है, जैसे के कम से कम रक्त का नुकसान, बल्ड चढ़ाने की जरूरत न पड़ना, ऑपरेशन के बाद कम से कम दर्द, सिर्फ एक दिन अस्पताल में रुकने की जरूरत, सामान्य दिनचर्या में जल्द से जल्द लौटाना जैसे लेप्रोस्कोपिक मायमेक्टमी के फायदों के साथ-साथ लैप्रोस्कोपिक यूटरीन आर्टरी लाइगेशन के 80 % मामलों में फाइब्रॉइड को वापस आने से रोकता है। ऐसा भविष्य में गर्भ संबंधी किसी भी तरह की दिक्क्तों की आशंका को पूरी तरह से खत्म करते हुए किया जाता है। महिलाएं भविष्य में जब चाहे गर्भवती हो सकती हैं। यूटरिन आर्टरी की क्लिपिंग के चलते उन्हें कोई समस्या नहीं आती।

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fibroids problem in women should be treated 1 फाइब्रॉइड महिलाओं की सामान्य समस्या है, जो प्रजनन उम्र वाली लगभग 77 % महिलाओं को प्रभावित करती है। © Shutterstock

प्रजनन उम्र में अधिक

हमारे देश में फाइब्रॉइड महिलाओं की सामान्य समस्या है और प्रजनन उम्र वाली लगभग 77 प्रतिशत महिलाओं को यह प्रभावित करती है। यह देखा गया है कि अपने जीवनकाल में चार में से एक महिला को एक या आधिक फाइब्रॉइड होता है। यह आमतौर पर 30 से 50 वर्ष की महिलाओं में विकसित होता है। कभी-कभी ये पीढ़ी दर पीढ़ी हो सकता है।

फाइब्रॉइड से ग्रस्त कई महिलाओं को अपने फाइब्रॉइड के बारे में पता नहीं होता है, जबकि कुछ फाइब्रॉइड को चिकित्सक के द्वारा अंदरूनी परीक्षण से भी महसूस किया जा सकता है। इसकी पुष्टि अल्ट्रासाउंड या अन्य जांचों से की जा सकती है। इसके कुछ लक्षण हैं-

- माहवारी के दौरान अधिक रक्तस्राव या अधिक दर्द।

- कमर दर्द के साथ-साथ पेट के निचले हिस्से में सूजन।

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- सामान्य की तुलना में अधिक बार पेशाब आना और कब्ज की शिकायत रहना।

- संभोग के दौरान दर्द या बेचैनी।

- गर्भपात या बांझपन।