
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : August 10, 2021 2:07 PM IST
Image credits by: फाइब्रॉइड (Fibroids) जिसे गर्भाशय की गांठ, लेयोमोमा, मायोमा और मस्कुलर ट्यूमर भी कहते हैं।
महिलाओं का शरीर पुरुषों से कई मायनों में अलग होता है और उन्हें अपनी ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। यदि महिलाएं अपने घर की जिम्मेदारियों को पूरा करने के चक्कर अपने स्वास्थ्य को इग्नोर करें तो कई बीमारियों का शिकार हो सकती हैं। 35 साल की उम्र पास करते ही महिलाओं के शरीर में हॉर्मोनल बदलाव होने लगते हैं जिस कारण उन्हें कई बीमारियां अपनी चपेट में ले सकती हैं। इन्हीं में से एक है फाइब्रॉइड (Fibroids) जिसे गर्भाशय की गांठ, लेयोमोमा, मायोमा (Uterine Myoma) और मस्कुलर ट्यूमर भी कहते हैं। क्या होता है फाइब्रॉइड? (What is Fibroids) इसमें गर्भाश्य में गांठ बनने लगती हैं। यह गांठ तिल के दाने से लेकर खरबूजे जितनी बड़ी हो सकती है। गर्भाश्य में गांठ के लिए बढ़ती उम्र, हॉर्मोनल बदलाव और जेनेटिक कारण बड़ी भूमिका निभाते हैं। हालांकि घबराने की बात नहीं है क्योंकि यह कैंसर नहीं है। अगर समय पर इसके लक्षणों को समझकर इलाज शुरू किया जाए तो यह फाइब्रॉइड सही हो जाता है। आइए गर्भाशय की गांठ के बारे में विस्तार से जानते हैं।
जब किसी महिला को फाइब्रॉइड की समस्या होती है तो डॉक्टर सबसे पहले सामान्य पूछताछ के बाद कुछ टेस्ट कराते हैं जिसमें से एक पैल्विक एग्जामिनेशन भी हो सकता है। अगर गर्भाशय में गांठ की सही जगह पता नहीं चल रही है तो डॉक्टर एमआरआई या हिस्टेरोस्लिंगोग्राफी करने को कह सकते हैं। अगर गांठे छोटी होती हैं तो डॉक्टर पहले दवा देकर सही करने की कोशिश करते हैं। लेकिन अगर आपके गर्भाशय में गांठ एक से ज्यादा है और साइज में बड़ी हो चुकी है तो इसकी सर्जरी (Fibroids Surgery) हो सकती है।
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