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इस विटामिन की कमी होते ही तलवों में होने लगती है जलन, जानें अन्य कारण और साथ ही बचाव

अगर आप बार-बार तलवों में जलन की समस्या हो रही है तो आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

Written By Sadhna Tiwari
Updated : June 10, 2024 5:30 PM IST

Burning Sensation In Feet: गर्मियों में कुछ लोगों को पैरों में दर्द औऱ तलवों में जलन के साथ सरसराहट या दर्द महसूस होता है। पैरों में जलन की यह समस्या यूं तो साधारण हो सकती है लेकिन अगर आपको बार-बार ये परेशानी हो रही हो तो आपको इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। दरअसल, आमतौर पर लोगों को डाइजेस्टिव सिस्टम से जुड़ी किसी परेशानी ( digestive system related problems) की वजह से तलवों में जलन की समस्या हो सकती है। लेकिन, कुछ गम्भीर बीमारियों का एक महत्वपूर्ण लक्षण तलवों में होनेवाली यह जलन भी हो सकती है। इसीलिए, अगर आप बार-बार तलवों में जलन (talvon mein jalan) की समस्या हो रही है तो आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए। यहां पढ़ें तलवों में जलन की समस्या के कारण (burning sensation in feet causes) और साथ ही इसके इलाज के उपाय।

तलवों में जलन महसूस होने के कारण (Reasons of burning sensation in feet)

विटामिन बी12 की कमी (Vitamin B12 deficiency)

शरीर को सही तरह से पोषण ना मिल पाने की स्थिति में भी तलवों में जलन की समस्या हो सकती है। जैसे जब विटामिन बी12 की कमी (vitamin B12 deficiency) हो जाती है तो इससे मांसपेशियों में खिंचाव महसूस हो सकता है। इससे तलवों में दर्द और जलन महसूस हो सकती है।

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थायराइड (Thyroid)

थायराइड ग्लैंड से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण भी तलवों में भी जलन (burning sensation foot soles) की समस्या हो सकती है। थायराइड की बीमारी के कारण पैरों में झनझनाहट (sensation in feet) भी महसूस हो सकती है। थायराइड का लेवल कम होने पर पैरों में झुनझुनी और जलन की समस्या बार-बार हो सकती है।

हाई ब्लड शुगर (High blood sugar level)

डायबिटीज के मरीजों को भी बार-बार झुनझुनी और तलवों में जलन की समस्या महसूस हो सकती है। जब शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है तो इससे नसें अंदर से कमजोर होने लगती हैं। इससे नर्व्स तक ऑक्सीजन की सप्लाई सही तरीके से नहीं हो पाती और ऐसे में तलवों में जलन की समस्या हो सकती है।

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Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।