
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Shubham Garg
World Cancer Day: आपने देखा होगा कि जब किसी को जानने वाले व्यक्ति को कैंसर होने के बारे में पता चलता है, तो सभी घबरा जाते हैं। खासकर अगर किसी महिला को अपने ब्रेस्ट के पास गांठ या मोटा सा महसूस हो या फिर किसी पुरुष को प्रोस्टेट में कुछ गांठ सा फील होता है तो वह भी परेशान हो जाते हैं। क्योंकि इस स्थिति में सबको कैंसर होने की संभावना याद आती है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि एक मामूली सी गांठ कैंसर ही हो। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि नारायणा हॉस्पिटल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर शुभम गर्ग कह रहे हैं।
डॉक्टर ने सवाल-जवाब के दौरान बताया कि 'आज के समय में कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ी है, जो अपने आप में अच्छी बात है। लेकिन इसके साथ-साथ एक नई समस्या भी सामने आ रही है। कैंसर का डर या कैंसर फोबिया। कई लोग शरीर में किसी भी छोटी-सी गांठ, दर्द या बदलाव को तुरंत कैंसर से जोड़ लेते हैं। यह सोच न सिर्फ अनावश्यक डर पैदा करती है, बल्कि मानसिक तनाव, घबराहट और कभी-कभी अवसाद तक का कारण बन जाती है।' आप इस तनाव से कैसे निपट सकते हैं, आइए आपको बताते हैं।
कैंसर फोबिया एक मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार यह डर सताता रहता है कि उसे कैंसर हो सकता है, भले ही मेडिकल जांच में इसकी पुष्टि न हुई हो। उदाहरण के लिए- त्वचा पर छोटी-सी गांठ, बगल या गर्दन में सूजन, हल्का दर्द या खिंचाव, वजन में मामूली बदलाव आदि। इन सामान्य लक्षणों को लोग गंभीर बीमारी मान लेते हैं और इंटरनेट पर जानकारी खोज-खोज कर डर और बढ़ा लेते हैं।
डॉक्टर कहते हैं कि यह समझना बहुत जरूरी है कि हर गांठ कैंसर नहीं होती। शरीर में गांठ बनने के कई सामान्य कारण हो सकते हैं, जैसे- इंफेक्शन या सूजन, फैटी टिश्यू, सिस्ट, हार्मोनल बदलाव, मांसपेशियों में खिंचाव। अधिकांश गांठें सौम्य होती हैं और इलाज या दवा से ठीक हो जाती हैं। कैंसर की गांठ आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ती है, सख्त होती है और लंबे समय तक बनी रहती है।
लगातार डर में रहने से व्यक्ति हर समय बेचैनी और घबराहट महसूस करता है, नींद ठीक से नहीं ले पाता, बार-बार डॉक्टर बदलता है, सोशल मीडिया या गूगल से खुद को डराता रहता है, काम और रिश्तों पर असर पड़ने लगता है। यह स्थिति शरीर से ज्यादा मन को नुकसान पहुंचाती है।
कैंसर के प्रति जागरूक होना जरूरी है, लेकिन हर समय डर में जीना नहीं। समय पर जांच, सही जानकारी और संतुलित सोच ही सबसे बड़ा बचाव है। मामूली गांठ या सामान्य लक्षण को तुरंत कैंसर समझ लेना मानसिक तनाव को जन्म देता है। याद रखें, ज्यादातर मामलों में डर की वजह कैंसर नहीं, बल्कि गलत जानकारी और चिंता होती है। डॉक्टर पर भरोसा रखें, अपने मन का भी इलाज करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, यही सही रास्ता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।