टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों में बढ़ रहा Fatty Liver का खतरा- स्टडी

Fatty liver in type 1 diabetes: टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों में फैटी लिवर की बीमारी, शरीर के मेटाबॉलिज्म में होने वाली समस्या ज्यादा पाई जाती है।

WrittenBy

Written By: Ashu Kumar Das | Updated : May 12, 2026 12:10 PM IST

गलत खानपान, प्रदूषण, एक्सरसाइज की कमी समेत विभिन्न कारणों से भारत में फैटी लिवर और डायबिटीज दोनों ही बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अब तक फैटी लिवर को मुख्य रूप से मोटापा, शराब या टाइप 2 डायबिटीज से जुड़ी बीमारी माना जाता था, लेकिन हाल की रिसर्च में यह सामने आया है कि टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों में भी फैटी लिवर का खतरा बढ़ रहा है। पब मेड सेंट्रल की वेबसाइट की वेबसाइट पर छपी रिसर्च बताती है टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों में इस तरह से फैटी लिवर के मामले बढ़ते रहे, तो यह भविष्य में लिवर और हार्ट से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

क्या है फैटी लिवर?

फैटी ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। शुरुआत में इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते, लेकिन समय के साथ यह सूजन, लिवर डैमेज और यहां तक कि लिवर फेलियर का कारण भी बन सकता है। रिसर्च करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि इसे Metabolic Dysfunction-Associated Steatosis Liver Disease (MASLD) भी कहा जाता है। रिसर्च में पाया गया कि टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में फैटी लिवर का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है। खास बात यह है कि यह खतरा केवल मोटापे वाले मरीजों तक सीमित नहीं है।

Fatty Liver. (Image: AI Generated) Fatty Liver. (Image: AI Generated)

शोधकर्ताओं के अनुसार, लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर, विभिन्न कारणों से इंसुलिन का संतुलन बिगड़ना, खराब लाइफस्टाइल और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण लिवर में फैट जमा होने लगता है। जिन लोगों को पहले से टाइप- 1 डायबिटीज की समस्या है उनमें फैटी लिवर का खतरा ज्यादा रहता है।

टाइप- 1 डायबिटीज के कारण क्यों बढ़ रहा है फैटी लिवर?

  1. रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जब शरीर में लंबे समय तक ग्लूकोज का स्तर बढ़ा रहता है, तो इसका असर लिवर की कार्यक्षमता कम होने लगती है।
  2. टाइप 1 डायबिटीज में शरीर खुद इंसुलिन नहीं बनाता है। इससे कई बार इंसुलिन डोज और ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव का असर फैट मेटाबॉलिज्म पर पड़ सकता है। इसके कारण फैटी लिवर की समस्या होती है।
  3. भारत जैसे अन्य विकासशील देशों में एक बड़ा तबका डेस्क जॉब करता है। इस दौरान गलत खानपान और फिजिकल एक्टिविटी की कम होने से भी फैटी लिवर बढ़ रहा है।
  4. शोधकर्ताओं का कहना है कि केवल मोटापा ही फैटी लिवर का कारण नहीं है। टाइप 1 डायबिटीज वाले पतले या सामान्य वजन के लोगों में भी यह समस्या देखी जा रही है।

फैटी लिवर से जुड़ी सभी जानकारी यहां देखें

Fatty liver Fatty liver (image source: ChatGPT)

टाइप- 1 डायबिटीज में किन बातों का ध्यान रखें

रिसर्च में यह बात सामने आई है कि टाइप- 1 डायबिटीज के कारण फैटी लिवर जैसी बीमारी न हो, इसके लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

  1. हमेशा ब्लड शुगर कंट्रोल में रखें
  2. रोजाना 30 मिनट से 1 घंटा एक्सरसाइज करें
  3. प्रोसेस्ड और जंक फूड को डाइट से हटाएं
  4. वजन को कंट्रोल करने की कोशिश करें।
  5. साल में 1 से 2 बार लिवर टेस्ट करवाएं।

सिर दर्द, बुखार और सर्दी- खांसी की समस्या होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का सेवन बिल्कुल न करें।

Disclaimer: टाइप 1 डायबिटीज केवल ब्लड शुगर की बीमारी नहीं है। यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकती है, इसलिए मरीजों को लिवर हेल्थ पर भी ध्यान देना चाहिए। नई रिसर्च यह संकेत देती है कि टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों में फैटी लिवर का खतरा पहले की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी व्यक्ति को टाइप- 1 डायबिटीज की परेशानी है तो रेगुलर हेल्थ चेकअप जरूर करवाएं।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source