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कोरोना संक्रमण के बाद हमेशा महसूस होती है थकान, तो जान लें कब लेनी पड़ सकती है डॉक्टर की मदद

कोविड संक्रमण के बाद कुछ लोगों को आराम करने और अच्छी नींद सोने के बाद बहुत अधिक थकान हो सकती है। लेकिन, कई बार इस थकान से राहत पाने के लिए डॉक्टर की मदद की जरूरत पड़ सकती है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : June 24, 2022 6:01 AM IST

कोविड संक्रमण से उबरने के बाद लॉन्ग कोविड की स्थिति कोरोना संक्रमितों मं देखी जाती है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पीड़ित व्यक्तियों में कोरोना से उबरने के बाद कई महीनों तक कोविड संक्रमण से जुड़े कई लक्षण दिखायी देते हैं।  एक्सपर्ट्स के अनुसार लॉन्ग कोविड से उबरने में हर मरीज को अलग-अलग समय लग सकता है। हालांकि, लॉन्ग कोविड के लक्षणों की गम्भीरता इस बात पर बिल्कुल निर्भर नहीं करता कि मरीज को कोरोना संक्रमण कितना गम्भीर हुआ था। वहीं, कुछ एक्सपर्ट्स का यह भी दावा है कि ऐसे लोग जिन्हें कोरोना संक्रमण के कम गम्भीर लक्षण दिखायी दिए उनमें लॉन्ग कोविड के लक्षण लम्बे समय तक दिखायी दे सकते हैं।

थकान है लॉन्ग कोविड का प्रमुख लक्षण

बता दें कि, लॉन्ग कोविड से पीड़ित लोगों में जो लक्षण सबसे अधिक दिखायी देते हैं उनमें थकान प्रमुख समस्या होती है। बहुत से लोगों को  चलने-फिरने, काम करने, कसरत करने या सीढ़ियां चढ़ने जैसे काम करने के बाद बहुत थकान महसूस होती है। लेकिन, कोविड संक्रमण के बाद कुछ लोगों को आराम करने और अच्छी नींद सोने के बाद बहुत अधिक थकान हो सकती है।  वहीं, कुछ लोगों को हमेशा थकान महसूस हो सकती है जिससे वे हमेशा कमजोरी और सुस्ती महसूस कर सकते हैं। साथ ही ऐसे लोगों को छोटी-छोटी जानकारियां याद रखने या अपने काम पर फोकस करने में भी दिक्कत होती है।

कोविड के बाद महसूस होनेवाली थकान क्या है गम्भीर समस्या ?

विभिन्न प्रकार की बीमारियों और वायरल इंफेक्शन्स के बाद थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। वहीं, एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर 4 सप्ताह से अधिक समय तक लोगों को थकान महसूस हो और उसके साथ कोविड संक्रमण से जुड़ी समस्याएं महसूस हो तो ऐसे में डॉक्टर से सम्पर्क करें। कई बार थकान के साथ कई बार लोगों को ब्रेन फॉग, मांसपेशियों में दर्द या तनाव और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं। हालांकि, इस तरह के लक्षणों को बहुत गम्भीर नहीं माना जाता है। पर अपने डॉक्टर को इस बारे में सूचित जरूर करें। लेकिन, डॉक्टर को अगर आपकी स्थिति के बारे में पूरी जानकारी समय पर उपलब्ध होगी तो क्रोनिक फटिग सिंड्रोम जैसी किसी गम्भीर समस्या के खतरे का भी सही समय पर पता लगाया जा सकेगा और मरीज को जल्द रिकवर होने में भी मदद हो सकती है।