फैट सेल्स की गड़बड़ी बढ़ा सकता है डायबिटीज होने का खतरा, नई रिसर्च में बताया इसका कारण

जब भी किसी व्यक्ति को डायबिटीज होता है, तो अक्सर हम इसे मोटापे या फिर लाइफस्टाइल से जोड़ने लग जाते हैं। लेकिन हाल ही में हुई स्टडी में बताया गया है कि डायबिटीज मोटापे और खराब लाइफस्टाइल के साथ-साथ फैट सेल्स में गड़बड़ी के कारण भी हो सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में-

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Written By: Kishori Mishra | Published : April 30, 2026 4:25 PM IST

डायबिटीज को आमतौर पर मोटापे और खराब लाइफस्टाइल से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन हाल ही में सामने आई एक स्टडी आपकी इस सोच को बदल सकती है। रिसर्च के मुताबिक, शरीर में फैट की असामान्य कमी या उसका गलत तरीके से जमा होना भी डायबिटीज का कारण बन सकता है। मुख्य रूप से इसकी वजह से फैमिलियल पार्शियल लाइपोडिस्ट्रॉफी टाइप 2 (FPLD2) नाम की एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी इस खतरे को बढ़ा सकती है।

क्या है FPLD2?

फैमिलियल पार्शियल लाइपोडिस्ट्रॉफी टाइप 2 एक रेयर जेनेटिक डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर के कुछ हिस्सों जैसे-  हाथ, पैर और कूल्हों से धीरे-धीरे फैट कम होने लगता है। वहीं, गर्दन, चेहरा और पीठ के ऊपरी हिस्से में फैट जमा हो सकता है। इस असंतुलन की वजह से शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है।

कैसे बढ़ता है डायबिटीज का खतरा?

रिसर्च के अनुसार, इस बीमारी में फैट सेल्स ठीक से काम नहीं कर पाते। इससे शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं, जिसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगना, ब्लड शुगर कंट्रोल करना मुश्किल होना, फैटी लिवर का खतरा बढ़ना, शरीर में सूजन बढ़ना और आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज होना इत्यादि हो सकता है।

फैट सिर्फ वजन बढ़ाने वाला तत्व नहीं

एक्सपर्ट के अनुसार, शरीर में मौजूद फैट सिर्फ कैलोरी स्टोर करने का काम नहीं करता, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण मेटाबॉलिक ऑर्गन की तरह काम करता है। यह हार्मोन रिलीज करता है, शरीर में ऊर्जा संतुलित रखता है और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है। ऐसे में फैट टिश्यू का अनहेल्दी होना शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

इन लक्षणों को न करें इग्नोर

अगर किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है-

  1. हाथ-पैरों में फैट कम दिखना
  2. गर्दन या चेहरे पर असामान्य फैट जमा होना
  3. कम उम्र में डायबिटीज होना
  4. हाई ट्राइग्लिसराइड्स
  5. फैटी लिवर
  6. महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन या PCOS जैसी दिक्कतें, इत्यादि।

स्टडी क्यों है जरूरी?

यह रिसर्च बताती है कि डायबिटीज सिर्फ मोटापे की बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर में फैट के डिस्ट्रीब्यूट और उसकी कार्यक्षमता से भी इसका गहरा संबंध है। इससे फ्यूचर में ऐसे नए इलाज विकसित करने की राह खुल सकती है, जो मेटाबॉलिक बीमारियों को बेहतर तरीके से रोकने में मदद करें।

अगर शरीर में फैट का संतुलन बिगड़ता है, चाहे वह ज्यादा हो या बहुत कम, दोनों ही स्थितियां स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसलिए सिर्फ वजन पर नहीं, बल्कि मेटाबॉलिक हेल्थ पर ध्यान देने की जरूरत होती है।

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