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नेशन एड्स कंट्रोल आर्गेनाइजेशन (एनएसीओ) की साल 2015 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय महिलाओं में एचआईवी का प्रसार 0.22 फीसदी है। यानि एचआईवी / एड्स से पीड़ित 2.5 मिलियन लोगों में से करीब एक मिलियन महिलाएं हैं। वर्ल्ड एड्स डे पर हम आपको एचआईवी / एड्स से पीड़ित महिलाओं के बारे में कुछ चौकानें वाले तथ्य बता रहे हैं।
1) महिलाओं को ज्यादा खतरा
सेक्स के दौरान योनि, गर्भाशय ग्रीवा, गर्भाशय शामिल होते हैं। इस वजह से पुरुष से महिला को फ्लूइड के ट्रांसफर होने का ज्यादा चांस होता है। जिससे उन्हें एचआईवी / एड्स का खतरा 2-4 गुना अधिक होता है।
2) युवा महिलाओं का ज्यादा खतरा
यूनिसेफ के आंकड़ों से पता चलता है कि 15 से 24 साल की लड़कियों का इसका ज्यादा खतरा होता है। क्योंकि उनके साथ रेप होने का अधिक खतरा होता है। एक मिथक यह भी है कि एसटीडी से पीड़ित व्यक्ति को कुंवारी लड़की के साथ सेक्स करने से उसका रोग ठीक हो सकता है।
3) आर्थिक कारणों से एड्स का खतरा
महिलाओं को वेश्यावृत्ति, तस्करी और लेनदेन संबंधी यौन संबंधों से भी इसका खतरा अधिक होता है। उनके पास सुरक्षित सेक्स के लिए बातचीत करने का हक भी बहुत कम होता है।
4) फीमेल सेक्स वर्कर्स को अधिक खतरा
एनएसीओ के अनुसार, भारत में एड्स से पीड़ित महिलाओं की संख्या में 4.9 फीसदी केवल सेक्स वर्कर्स महिलाएं हैं। इन्हें सामान्य जनसंख्या की तुलना में एचआईवी का खतरा 10 गुना अधिक है।
5) यौन सुरक्षा के लिए साधन नहीं
महिलाओं के लिए एड्स की रोकथाम के लिए कंडोम उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उन्हें नुकसान होने का अधिक खतरा होता है। महिलाओं को रोग की रोकथाम के लिए पुरुषों पर निर्भर रहना पड़ता है।
6) महिलाओं को दोषी ठहराया जाता है
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को एचआईवी टेस्ट के लिए कहा जाता है और इन्फेक्शन के लिए उन्हें दोषी ठहराया जाता है। उन्हें बेवफा कहा जाता है और समाज द्वारा खारिज कर दिया जाता है।
7) विवाह महिलाओं को नुकसान में डालता है
2004 के अनुसार, एचआईवी / एड्स से पीड़ित 75 फीसदी महिलाओं को शादी के पहले कुछ वर्षों में पॉजिटिव बना दिया गया है। जल्दी शादी होने से महिलाओं को इन्फेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।
8) महिलाओं के इलाज की अनदेखी
पुरुषों की तुलना में महिलाओं के उपचार की संभावना कम हती है। उनके पास स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक कम पहुंच है क्योंकि स्वास्थ्य हो या परिवार के अन्य काम, उन्हें फैसले लेने का अधिकार कम होता है।
9) महिलाओं में एड्स के लिए हिंसा भी है बड़ा कारण
एनएसीओ की रिपोर्ट के अनुसार, बलात्कार, व्यभिचार, परिवार के सदस्यों और दोस्तों द्वारा हमला, तस्करी या कार्यस्थल पर होने वाली हिंसा ने महिलाओं के लिए एचआईवी / एड्स का खतरा बढ़ा दिया है।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock