
... Read More
Written By: Anshumala | Published : June 27, 2021 7:02 AM IST
नींद क्यों है जरूरी? जानें, इन्सोम्निया के लक्षण और निदान....
Symptoms of Insomnia in Hindi: आज के इस कोरोना काल में लोगों में अवसाद, एंग्जायटी, तनाव, डर इतना बैठ गया है कि रात में वे चैन से सो भी नहीं पाते हैं। लगातार इस तरह की आदत आपको अनिद्रा का शिकार (Insomnia problem during corona) बना सकता है। लगातार नींद ना आने से आप स्लीपिंग डिसऑर्डर के शिकार हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप अनिद्रा के लक्षणों को पहले ही पहचानकर इसका इलाज करवाएं। अनिद्रा को इन्सोम्निया (Insomnia) भी कहते हैं। इससे ग्रस्त लोग रात-भर जगे रह जाते हैं। अनिद्रा से पीड़ित व्यक्तियों में नींद आने और सोते रहने में समस्या होती है। जो लोग इन्सोम्निया से ग्रस्त होते हैं, उनकी नींद जल्दी टूट जाती है। दोबारा से नींद आने में उन्हें काफी समस्या होती है। यदि अनिद्रा की समस्या लगातार एक से दो महीने तक बनी रहे, तो इससे ना सिर्फ आप कई रोगों के शिकार हो सकते हैं बल्कि आपकी कार्यक्षमता और दिनचर्या भी प्रभावित हो सकती है।
जब आप रात में 7-8 घंटे की अंच्छी नींद नहीं ले पाते हैं, तो आपको अगले दिन नींद आना, चिड़चिड़ापन, आलस, सुस्ती, मूड में बदलाव, एंग्जायटी आदि महसूस कर सकते हैं। इन्सोम्निया (Types of Insomnia) मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है, क्षणिक (Transient insomnia), एक्यूट (Acute insomnia) और क्रोनिक इन्सोम्निया (Chronic insomnia)। सबसे ज्यादा खतरनाक क्रोनिक अनिद्रा की समस्या होती है, जो सालों आपको परेशान कर सकती है।
नींद आपके शरीर के दूसरे अंगों को बेहतर तरीके से कार्य करने के लिए जरूरी है। यह एक महत्वपूर्ण शारीरिक क्रिया है। जब आप सोए रहते हैं, तो आपका दिमाग कई तरह के कार्य करता है। नींद भरपूर ना लेने से क्रोनिक डिसऑर्डर्स, डिप्रेशन, एंग्जायटी आदि की समस्या हो सकती है। इन्सोम्निया या अनिद्रा की समस्या कई कारणों से हो सकती है जैसे कैफीन का सेवन, हार्मोनल असंतुलन, तनाव, कुछ दवाओं का लगातार सेवन, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा आदि।
नींद में जागकर चलना
बहुत जल्दी नींद टूट जाना
सोने के बावजूद भी थकान महसूस करना
दिन में नींद आना
सिरदर्द
चिड़चिड़ापन
तनाव (Symptoms of Insomnia)
एकाग्रता और ध्यान में कमी
सोशल स्किल्स से समझौता करना
डाइजेस्टिव डिसऑर्डर
यदि आपको नींद नहीं आती और इन्सोम्निया से जुड़े अन्य संकेत व लक्षण नजर आते हैं, तो आप तुरंत ही स्लीप स्पेशलिस्ट से मिलें। स्लीप स्पेशलिस्ट सबसे पहले आपके मेडिकल हिस्ट्री का मूल्यांकन करेगा। उसके बाद आपके स्लीप-वेक पैटर्न (sleep-wake pattern) की समीक्षा करेगा। स्पेशलिस्ट आपसे दिन में नींद आने, थकान अनुभव करने से संबंधित सवाल भी कर सकता है। इससे आपके स्लीप शेड्यूल को समझने में मदद मिलेगी। एक बेहतर निदान के लिए स्लीप विशेषज्ञ मस्तिष्क की तरंगों, ब्रीदिंग, दिल की धड़कनों, आंखों और शरीर की गतिविधियों को मॉनिटर करने के लिए प्रयोगशाला में रात भर टेस्ट करवाने की सलाह दे सकता है। एक्टिग्राफी (Actigraphy) नींद से संबंधित समस्याओं का पता लगाने की एक अन्य बेहतर तरीका है। एक्टिग्राफ एक पहनने वाला डिवाइस है, जो आपके नींद लेने और जागने के पैटर्न को मापता है।