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बढ़ती उम्र के कारण कम हो गई है आंखों की रोशनी, रेड लाइट थेरेपी से दृष्टि में हो सकता है सुधार
Red Light Therapy: बढ़ती उम्र के साथ आंखों की रोशनी भी कमजोर होने लगती है, लेकिन अब इस समस्या से बच सकते हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि रेड लाइट या निकट-अवरक्त प्रकाश (Near-infrared Light) के संपर्क में आने से आंखों के माइटोकॉन्ड्रिया के कार्य में सुधार हो सकता है। इससे दृष्टि में मामूली लेकिन स्थायी रूप से सुधार हो सकता है। इस बात की जांच करने के लिए यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में हुए एक छोटे से अध्ययन में 24 लोगों को शामिल किया गया। यह धुंधली दृष्टि के लिए एक प्रकार का असामान्य प्रायोगिक ट्रीटमेंट है। इसमें माइटोकॉन्ड्रिया की गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए कुछ मिनट तक आंखों में रेड लाइट चमकाया जाता है। इसके जरिए सूक्ष्म संरचनाएं आंखों की कोशिकाओं के अंदर ऊर्जा को बढ़ावा देती हैं।
आंखों की रोशनी सही तरह से काम कर रही है या नहीं इसके लिए एक छोटी सी जांच में 24 लोगों को शामिल किया गया। रेड लाइट को इनकी आंखों में एक्सपोज किया गया। इस छोटे से रेड लाइट के आंखों में जाने से ही कई दिनों तक रंग दृष्टि के परीक्षण में लोगों के प्रदर्शन में थोड़ा सुधार देखा गया। इस अध्ययन के प्रमुख लेखक यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के ऑप्थल्मोलॉजी इंस्टीट्यूट में प्रमुख और अध्ययन के लेखक ग्लेन जेफरी (Glen Jeffery) हैं। इनका कहना है कि रेड लाइट थेरेपी एक बेहद ही आसान एक्सपोजर के जरिए लाइट वेवलेंथ का इस्तेमाल करती है। इससे रेटिना में मौजूद सेल्स में एनर्जी सिस्टम में आई कमी को दोबारा से बढ़ाकर ऊर्जा का संचार करती है।
पहले भी हुए अध्ययन में डीप रेड लाइट और नियर-इन्फ्रारेड लाइट को सेल-आधारित और पशुओं पर किए गए प्रयोगों में माइटोकॉन्ड्रिया के कार्य में सुधार देखा गया है। ये तरंग दैर्ध्य (Wavelengths) माइटोकॉन्ड्रिया के अंदर मौजूद प्रमुख आणविक संरचनाओं के प्रदर्शन में सुधार करके काम करते हैं। इन्हें एटीपी सिंथेज पंप्स कहा जाता है। इस पंप के जरिए एटीपी नाम के एक अणु का निर्माण होता है, जिसे कोशिकाएं माइटोकॉन्ड्रिया के पानी वाले वातावरण में घुमाकर ऊर्जा के लिए उपयोग करती हैं।