बच्चों में आई फ्लोटर्स के लक्षण क्या हैं? क्यों है ये चिंता का विषय

Eye Floaters Signs in Children : बच्चों में आई फ्लोटर्स की शिकायत सामान्य नहीं होती है। ऐसे में इसके लक्षण दिखने पर तुरंत जांच की जरूरत होती है। आइए जानते हैं इस विषय के बारे में विस्तार से-

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Written By: Kishori Mishra | Published : August 10, 2025 11:25 AM IST

Eye Floaters Symptoms in Children :  आंखों के सामने तैरने वाले छोटे-छोटे धब्बे को आई फ्लोटर्स कहा जाता है। इसमें आंखों के अंदर धागे या मकड़ी के जाले जैसे दिखाई देने वाले धब्बे होते हैं। ये आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होती है, लेकिन कुछ बच्चों को भी यह परेशानी हो सकती है। बच्चों में इस स्थिति को नजरअंदाज करने से बचना चाहिए। यह स्थिति तब होती है, जब आपकी आंखों के अंदर का जेली जैसा पदार्थ (विट्रियस) सिकुड़ जाता है और उसमें गांठें बन जाती हैं। आइए नई दिल्ली स्थिति लाजपत नगर में स्थित आई7 हॉस्पिटल के सीनियर मोतियाबिंद और रेटिना सर्जन डॉ. पवन गुप्ता से जानते हैं बच्चों में आई फ्लोटर्स के लक्षण क्या हैं और बच्चों के लिए क्यों है चिंता का विषय?

बच्चों में आई फ्लोटर्स के लक्षण क्या हैं?

बच्चों को आई फ्लोटर्स की परेशानी होने पर कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं, जो निम्न हैं- 

छोटे, काले धब्बे दिखाई देना - आई फ्लोटर्स की परेशानी होने पर आंखों में धब्बे या रेखाएं विभिन्न आकृतियों में दिखाई देती हैं। ये बिंदु, टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं या छल्ले की तरह नजर आ सकती हैं। अगर आपको अपने बच्चों की आंखों में इस तरह के संकेत दिख रहे हैं, तो एक बार अपनी जांच करा लें। 

धब्बे आंखों की गति के साथ चलता नजर आना - आई फ्लोटर्स आमतौर पर आंखों की गति के साथ चलते हुए नजर आते हैं। वहीं, जब बच्चा किसी एक निश्चित बिंदु पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करता है, तो वे दूर चले जाते हैं। 

धुंधली दृष्टि होना - कुछ मामलों में बच्चों को फ्लोटर्स की परेशानी होने पर आंखों की दृष्टि धुंधली नजर आ सकती है। खासकर अगर फ्लोटर्स काफी बड़े हैं, तो इस तरह की परेशानी हो सकती है। 

बच्चों में है चिंता का विषय

डॉक्टर पवन का कहना है कि वयस्कों में फ्लोटर्स हमेशा चिंताजनक नहीं होते, लेकिन बच्चों में ये किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। मुख्य रूप से यह कोट्स डिजीज, जन्मजात विकृतियां, रेटिना में दरार या आंखों के अंदर सूजन जैसी स्थितियों की ओर इशारा करते हैं। 

बच्चों में सामान्य नहीं है आई फ्लोटर्स

डॉक्टर का कहना है कि बच्चों में फ्लोटर्स असामान्य होते हैं, इसलिए इन्हें कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस स्थिति में तुरंत और पूरी आंखों की जांच जरूरी है। इसमें बच्चे की दृष्टि की जांच, चश्मे का प्रिस्क्रिप्शन तय करना और सबसे जरूरी, किसी भी दृष्टि-संबंधी समस्या का पता लगाने के लिए रेटिना की विस्तृत जांच शामिल होनी चाहिए। समय पर पता लगाने से दृष्टि की सुरक्षा और जटिलताओं को रोकने में बहुत मदद मिल सकती है।

Note - ध्यान रखें कि वयस्कों में फ्लोटर्स अक्सर हानिरहित होते हैं, लेकिन बच्चों में ये गंभीर आई डिजीज का संकेत हो सकते हैं। इसके जल्द से जल्द निदान के लिए किसी अच्छे आई केयर एक्सपर्ट की जरूरत होती है। बच्चों की आंखों के मामले में, हमेशा सतर्क रहना बेहतर होता है, क्योंकि आज समय पर की गई कार्रवाई आने वाले वर्षों तक उनके आंखों की रोशनी की रक्षा कर सकती है।