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Eye drops or laser surgery What is the best treatment for glaucoma: जनवरी का महीना (काला मोतिया) अवेयरनेस मंथ (Glaucoma Awareness Month) के तौर पर मनाया जाता है। काला मोतिया के मरीज अक्सर ये सवाल पूछते हैं कि उनके लिए आई ड्रॉप ज्यादा अच्छा है या फिर लेजर सर्जरी ही काला मोतिया का इलाज कर सकता है। डॉ. पुरेंद्र भसीन के अनुसार, काला मोतिया का पता अगर शुरुआती स्टेज में चलता है तो आई ड्रॉप से इसका इलाज (Kala Motia Ka Ilaj Kya Hai) संभव है।
वहीं, काला मोतिया के एडवांस स्टेज पर पहुंचने पर लेजर सर्जरी से इसका इलाज संभव है। काला मोतिया के लिए लेजर सर्जरी एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें लेजर बीम की मदद से आंख के अंदर द्रव निकास प्रणाली को बेहतर किया जाता है, जिससे आंखों का दबाव कम होता है।
डॉ. पुरेंद्र भसीन बताते हैं कि ग्लूकोमा यानी की काला मोतिया एक गंभीर आंखों की बीमारी है, जिसे अक्सर “साइलेंट विजन किलर” कहा जाता है। काला मोतिया के लक्षण शुरुआती स्टेज में आमतौर पर स्पष्ट नजर नहीं आते हैं। इस बीमारी में आंखों पर पड़ने वाला धीरे-धीरे बढ़ता है। इससे आंखों की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है। काला मोतिया के मरीज का समय पर इलाज न किया जाए तो इससे आंखों की रोशनी पूरी तरह से छीन सकती है। भारत में काला मोतिया के इलाज के लिए प्रमुख रूप से 2 विकल्प मौजूद हैं। इनमें आई ड्रॉप और लेजर सर्जरी शामिल है।
काला मोतिया का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए तो इसका इलाज आई ड्रॉप से किया जा सकता है। आई ड्रॉप का यूज करने से आंखों में बनने वाले द्रव (Aqueous Humor) कम बनता है। इससे आंखों पर पड़ने वाला दबाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। आई ड्रॉप शुरुआती अवस्था में काफी प्रभावी हो सकता है और अगर आई ड्रॉप को सही समय व डॉक्टर के दिशा-निर्देशों के तहत दिया जाए, तो काला मोतिया ठीक हो सकता है। कई मामलों में आई ड्रॉप डालने से काला मोतिया के मरीजों को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है।
डॉ. पुरेंद्र भसीन बताते हैं कि जब आई ड्रॉप से आंखों का दबाव संतोषजनक रूप से नियंत्रित नहीं हो पाता या मरीज लंबे समय तक दवाइयां नहीं ले पाता, तब लेजर सर्जरी का विकल्प काला मोतिया के इलाज के लिए अपनाया जाता है। लेजर सर्जरी की प्रक्रिया में आंखों के ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर किया जाता है ताकि तरल आसानी से बाहर निकल सके और दबाव कम हो जाए। लेजर सर्जरी आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती है, कम समय में पूरी हो जाती है। लेजर सर्जरी से आंखों पर पड़ने वाला प्रेशर कम होता है। काला मोतिया की लेजर सर्जरी के लिए SLT (Selective Laser Trabeculoplasty), ALT (Argon Laser Trabeculoplasty), Laser Peripheral Iridotomy (LPI) जैसे विकप्ल मौजूद हैं। काला मोतिया में लेजर सर्जरी करवाने से आंखों में रोज- रोज दवाएं नहीं डालनी पड़ती है।
| प्वाइंट्स | आई ड्रॉप | लेजर सर्जरी |
| असर | धीरे-धीरे | ज्यादा तेजी से असर होता है |
| स्थायित्व | जब तक दवा ली जाए तभी तक असर | 2 से 5 साल तक असर रहता है |
| सुविधा | रोजाना लेने की जरूरत पड़ती है | सर्जरी की प्रक्रिया 1 या 2 बार होती है |
| लागत | कम लेकिन लंबे समय में ज्यादा | 1 बार से ही होता है |
| साइड इफेक्ट | बहुत ही कम होता है | मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है |
डॉ. पुरेंद्र भसीन के साथ बातचीत के आधार पर हम ये कह सकते हैं कि काला मोतिया के इलाज में आई ड्रॉप और लेजर सर्जरी दोनों ही अहम भूमिका निभाते हैं। किसी मरीज में काला मोतिया अगर शुरुआती स्टेज में हैं, तो आई ड्रॉप प्रभावी होती हैं जबकि मध्यम से गंभीर ग्लूकोमा में लेजर सर्जरी ज्यादा लाभदायक साबित हो सकती है।