आई ड्रॉप या लेजर सर्जरी, काला मोतिया के इलाज के लिए क्या है बेस्ट

Eye drops or laser surgery What is the best treatment for glaucoma: आई ड्रॉप और लेजर सर्जरी दोनों ही ग्लूकोमा की समस्या को दूर करने में असरदार है। इन दोनों के ही अपने फायदे और नुकसान भी हैं। आइए डॉ. पुरेंद्र भसीन से जानते हैं इसके बारे (Eye drops or laser surgery glaucoma ke ilaz ke liye kya best hai) में।

आई ड्रॉप या लेजर सर्जरी, काला मोतिया के इलाज के लिए क्या है बेस्ट
VerifiedVERIFIED By: Dr. Purendra Bhasin

Written by Ashu Kumar Das |Published : January 13, 2026 6:13 PM IST

Eye drops or laser surgery What is the best treatment for glaucoma: जनवरी का महीना (काला मोतिया) अवेयरनेस मंथ (Glaucoma Awareness Month) के तौर पर मनाया जाता है। काला मोतिया के मरीज अक्सर ये सवाल पूछते हैं कि उनके लिए आई ड्रॉप ज्यादा अच्छा है या फिर लेजर सर्जरी ही काला मोतिया का इलाज कर सकता है। डॉ. पुरेंद्र भसीन के अनुसार, काला मोतिया का पता अगर शुरुआती स्टेज में चलता है तो आई ड्रॉप से इसका इलाज (Kala Motia Ka Ilaj Kya Hai) संभव है।

वहीं, काला मोतिया के एडवांस स्टेज पर पहुंचने पर लेजर सर्जरी से इसका इलाज संभव है। काला मोतिया के लिए लेजर सर्जरी एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें लेजर बीम की मदद से आंख के अंदर द्रव निकास प्रणाली को बेहतर किया जाता है, जिससे आंखों का दबाव कम होता है।

काला मोतिया क्या है?

डॉ. पुरेंद्र भसीन बताते हैं कि ग्लूकोमा यानी की काला मोतिया एक गंभीर आंखों की बीमारी है, जिसे अक्सर “साइलेंट विजन किलर” कहा जाता है। काला मोतिया के लक्षण शुरुआती स्टेज में आमतौर पर स्पष्ट नजर नहीं आते हैं। इस बीमारी में आंखों पर पड़ने वाला धीरे-धीरे बढ़ता है। इससे आंखों की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है। काला मोतिया के मरीज का समय पर इलाज न किया जाए तो इससे आंखों की रोशनी पूरी तरह से छीन सकती है। भारत में काला मोतिया के इलाज के लिए प्रमुख रूप से 2 विकल्प मौजूद हैं। इनमें आई ड्रॉप और लेजर सर्जरी शामिल है।

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आई ड्रॉप से काला मोतिया का इलाज

काला मोतिया का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए तो इसका इलाज आई ड्रॉप से किया जा सकता है। आई ड्रॉप का यूज करने से आंखों में बनने वाले द्रव (Aqueous Humor) कम बनता है। इससे आंखों पर पड़ने वाला दबाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। आई ड्रॉप शुरुआती अवस्था में काफी प्रभावी हो सकता है और अगर आई ड्रॉप को सही समय व डॉक्टर के दिशा-निर्देशों के तहत दिया जाए, तो काला मोतिया ठीक हो सकता है। कई मामलों में आई ड्रॉप डालने से काला मोतिया के मरीजों को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है।

काला मोतिया में आई ड्रॉप के नुकसान

  • काला मोतिया में आई ड्रॉप की दवा भूलने से इसका असर कम होने की संभावना रहती है।
  • कुछ मरीजों को आई ड्रॉप डालने से आंखों में जलन, लालिमा, सूखापन की समस्या होती है।
  • काला मोतिया के कुछ मामलों में आई ड्रॉप डालने से हार्मोनल संबंधी समस्या हो सकती है।

लेजर सर्जरी से ग्लूकोमा का इलाज- Laser surgery to treat glaucoma

डॉ. पुरेंद्र भसीन बताते हैं कि जब आई ड्रॉप से आंखों का दबाव संतोषजनक रूप से नियंत्रित नहीं हो पाता या मरीज लंबे समय तक दवाइयां नहीं ले पाता, तब लेजर सर्जरी का विकल्प काला मोतिया के इलाज के लिए अपनाया जाता है। लेजर सर्जरी की प्रक्रिया में आंखों के ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर किया जाता है ताकि तरल आसानी से बाहर निकल सके और दबाव कम हो जाए। लेजर सर्जरी आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती है, कम समय में पूरी हो जाती है। लेजर सर्जरी से आंखों पर पड़ने वाला प्रेशर कम होता है। काला मोतिया की लेजर सर्जरी के लिए SLT (Selective Laser Trabeculoplasty), ALT (Argon Laser Trabeculoplasty), Laser Peripheral Iridotomy (LPI) जैसे विकप्ल मौजूद हैं। काला मोतिया में लेजर सर्जरी करवाने से आंखों में रोज- रोज दवाएं नहीं डालनी पड़ती है।

काला मोतिया के लिए लेजर सर्जरी के नुकसान

  • काला मोतिया के हर मरीज को लेजर सर्जरी की जरूरत नहीं होती है।
  • समय के साथ काला मोतिया की लेजर सर्जरी का प्रभाव धीरे- धीरे कम होने लगता है।
  • सर्जरी के बाद कुछ समय के लिए आंख में हल्का दर्द या अस्थायी धुंधलापन की समस्या होती है।

काला मोतिया के इलाज में Eye Drop vs Laser Surgery

प्वाइंट्सआई ड्रॉपलेजर सर्जरी
असर  धीरे-धीरेज्यादा तेजी से असर होता है
स्थायित्वजब तक दवा ली जाए तभी तक असर 2 से 5 साल तक असर रहता है
सुविधा रोजाना लेने की जरूरत पड़ती हैसर्जरी की प्रक्रिया 1 या 2 बार होती है
लागत कम लेकिन लंबे समय में ज्यादा1  बार से ही होता है
साइड इफेक्टबहुत ही कम होता हैमरीज की स्थिति पर निर्भर करता है

निष्कर्ष

डॉ. पुरेंद्र भसीन के साथ बातचीत के आधार पर हम ये कह सकते हैं कि काला मोतिया के इलाज में आई ड्रॉप और लेजर सर्जरी दोनों ही अहम भूमिका निभाते हैं। किसी मरीज में काला मोतिया अगर शुरुआती स्टेज में हैं, तो आई ड्रॉप प्रभावी होती हैं जबकि मध्यम से गंभीर ग्लूकोमा में लेजर सर्जरी ज्यादा लाभदायक साबित हो सकती है।

Highlights

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  • काला मोतिया के लिए आई ड्रॉप अच्छा ऑप्शन है।
  • आई ड्रॉप से राहत न मिलने पर लेजर सर्जरी होती है।
  • काला मोतिया की सर्जरी के बाद आराम जरूरी है।