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आई ड्रॉप या लेजर सर्जरी, ग्लूकोमा के इलाज के लिए क्या है बेस्ट, जानिए डिटेल में

ग्लूकोमा एक आई डिसऑर्डर है, जो ऑप्टिक नर्व को डैमेज कर देती है। इससे आपकी आंखों की रोशनी भी खो सकती है।

Written By Atul Modi
Updated : March 15, 2024 3:01 PM IST

एक उम्र के बाद अधिकांश लोगों को आंखों में ग्लूकोमा या मोतियाबिंद की शिकायत होने लगती है। यह एक आई डिसऑर्डर है, जो ऑप्टिक नर्व को डैमेज कर देती है। इसके उपचार में देरी के कारण आंखों की रोशनी भी खो सकती है। इसके कारण आंखों में लिक्विड जमा होने लगता है और  इंट्राऑकुलर दबाव यानी आईओपी बढ़ने लगता है। प्राइमरी ओपन-एंगल, क्लोज्ड-एंगल, नॉर्मल-टेंशन और जन्मजात ग्लूकोमा के सामान्य प्रकार हैं। आमतौर पर ग्लूकोमा को दूर करने के दो समाधान हैं। आइए जानते हैं ग्लूकोमा से जुड़ी हर एक जानकारी।

यह है शुरुआती उपचार

ग्लूकोमा का शुरुआती स्तर पर पता लगने पर आई ड्रॉप के माध्यम से इसका उपचार संभव है। यह मरीजों के आईओपी और ऑक्यूलर या सिस्टमेटिक कंडीशन के अनुसार होता है। यह सिंगल और कॉम्बिनेशन फॉर्मूलेशन पर काम करता है। इससे आंखों में लिक्विड का प्रोडक्शन और निकास सुचारू रूप से होता है।

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लेजर सर्जरी है कारगर

लेजर सर्जरी ग्लूकोमा का कारगर उपचार है। लेजर सर्जरी दो प्रकार की होती है।

1. ट्रैबेकुलोप्लास्टी लेजर सर्जरी : ट्रैबेकुलोप्लास्टी लेजर सर्जरी आंख के अंदर तरल पदार्थ के निकास को बेहतर बनाने के लिए आंख के जल निकासी तंत्र यानी ट्रैबेक्यूला को सुधारती है। यह आंखों में दबाव को कम करने में मदद करती है और दृष्टि हानि को रोकने में मदद करती है। ट्रैबेकुलोप्लास्टी आमतौर पर एक आउटपेशेंट प्रक्रिया होती है और इसमें एनेस्थीसिया की भी जरूर नहीं होती है। यह ग्लूकोमा के शुरुआती चरणों में सबसे प्रभावी है। इसे आंखों के अंदर पिगमेंटेड ट्रैब्युलर मेशवर्क कोशिकाओं को टारगेट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे इंट्राऑकुलर प्रेशर कम हो जाता है।

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2. लेजर पेरिफेरल इरिडोटॉमी : लेजर पेरिफेरल इरिडोटॉमी सर्जरी आंख के अंदर दबाव यानी इंट्राऑकुलर प्रेशर को कम करने में मदद करती है। इंट्राऑकुलर प्रेशर ग्लूकोमा का मुख्य कारण है। यह सर्जरी आंख के आइरिस में एक छोटा सा छेद बनाती है। यह छेद आंख के अंदर तरल पदार्थ यानी एक्वियस ह्यूमर को बेहतर ढंग से बहने में मदद करता है, जिससे आंखों का दबाव कम होता है। इसके बाद आंखें पूरी तरह से ठीक होने की संभावना ज्यादा होती है।

ट्रैबेकुलोप्लास्टी और लेजर पेरिफेरल इरिडोटॉमी में अंतर

ट्रैबेकुलोप्लास्टी आमतौर पर ओपन एंगल ग्लूकोमा के इलाज के लिए उपयोगी होती है, जो ग्लूकोमा का सबसे आम प्रकार है। वहीं लेजर पेरिफेरल इरिडोटॉमी आमतौर पर नेरो एंगल  ग्लूकोमा के इलाज के लिए उपयोगी होती है, जो ग्लूकोमा का एक गंभीर प्रकार है। ट्रैबेक्युलेटोप्लास्टी लंबे समय तक आंखों का दबाव कम करने में अधिक प्रभावी हो सकती है। वहीं

लेजर पेरिफेरल इरिडोटॉमी आंखों का दबाव कम करने में तुरंत प्रभावी होती है, लेकिन इसका प्रभाव स्थायी होने में संशय रहता है।

क्या है आपके लिए बेस्ट

आई ड्रॉप और लेजर सर्जरी दोनों ही ग्लूकोमा की समस्या को दूर करने में असरदार है। इन दोनों के ही अपने फायदे और नुकसान भी हैं। समय पर ग्लूकोमा का पता चलने पर आई ड्रॉप से सरलता से इसका उपचार संभव है। वहीं लेजर सर्जरी के अपने फायदे हैं, जो लंबे समय तक असरदार रहते हैं।

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