Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
चाइल्डहुड कैंसर पर जागरुकता माह के अवसर पर भारत में कैंसर के खिलाफ़ जंग लड़ रहे ज़रूरतमंद बच्चों को पोषण में सहयोग उपलब्ध कराने वाले एनजीओ कडल्स फाउन्डेशन ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट फूड हील्सTM: एक्सप्लोरिंग न्यूट्रिशनल आस्पेक्ट्स ऑफ चाइल्डहुड कैंसर इन इंडिया जारी की है। रिपोर्ट भारत में पीडिएट्रिक ओंकोलोजी केयर में पोषण की भूमिका पर रोशनी डालती है। यह इस बात पर ज़ोर देती है कि कुपोषण बच्चों में कैंसर के प्रभावी इलाज में बड़ी बाधा है, जिसके चलते हज़ारों बच्चों के ठीक होने की संभावना और जीवन की गुणवत्ता कम हो जाती है।रिपोर्ट भारत में पीडिएट्रिक ओंकोलोजी केयर में पोषण की भूमिका पर रोशनी डालती है। यह इस बात पर ज़ोर देती है कि बच्चों में कुपोषण कैंसर के प्रभावी इलाज में बड़ी बाधा है, जिसके चलते हज़ारों बच्चों के ठीक होने की संभावना और जीवन की गुणवत्ता कम हो जाती है।
एक अनुमान के अनुसार भारत में हर साल 76,000 बच्चे कैंसर का शिकार होते हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार कैंसर से पीड़ित 57 से 61 फीसदी बच्चे शुरूआती कन्सलटेशन के समय कुपोषण से पीड़ित होते हैं- इन आंकड़ों में पिछले तीन सालों के दौरान कोई बदलाव नहीं आया है। पोषण की कमी उनके कैंसर उपचार को सहन करने की क्षमता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है, जिसकी वजह से उपचार के दौरान जटिलताओं और इन्फेक्शन की संभावना कहीं अधिक बढ़ जाती है और उपचार के उचित परिणाम नहीं मिल पाते।
कडल्स फाउंडेशन की संस्थापक और सीईओ, पूर्णता दत्ता बहल कहती हैं कि बढ़ती जागरूकता, सरकारी और सार्वजनिक सहयोग के साथ, पोषण उन परिवारों के लिए एक चिंता कम कर सकता है जो कैंसर से लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, "फूड हील्स रिपोर्ट 2024 के निष्कर्ष एक दिल दहला देने वाली सच्चाई को उजागर करते हैं — कुपोषण आज भी कैंसर से पीड़ित बच्चों के उपचार एवं देखभाल में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। कडल्स फाउन्डेशन में हम इस बात पर ध्यान देते हैं कि किस तरह से उचित पोषण कैंसर के खिलाफ़ बच्चों की लड़ाई में कारगर हो सकता है। पोषण मिलने से इन बच्चों को मुश्किल इलाज झेलने की ताकत मिलती है और इनके ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। हमें इन बच्चों के लिए पोषण विशेषज्ञों की कमी को जल्द से जल्द हल करना चाहिए, प्रशिक्षण में निवेश करना चाहिए और कैंसर की देखभाल में पोषण को प्राथमिकता देनी चाहिए। एक साथ मिलकर हम सुनिश्चित कर सकते हैं कि कोई भी बच्चा पोषण की कमी की वजह से इस लड़ाई को हार न जाए।
इसके अलावा रिपोर्ट बताती है कि जिन बच्चों में कैंसर का नया निदान हुआ है, वे रोज़ाना की ज़रूरत से आधी से भी कम कैलोरीज़ और प्रोटीन का सेवन करते हैं। उचित पोषण न मिलने के कारण उनकी उपचार झेलने की क्षमता कम हो जाती है, इन्फेक्शन की संभावना बढ़ती है, जिसका असर उनके विकास एवं उपचार की गुणवत्ता पर पड़ता है।
‘कैंसर से पीड़ित बच्चों के भविष्य में बदलाव लाने की शुरूआत उचित पोषण के साथ होती है।’सर गंगा राम अस्पताल, नई दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. मानस कलरा ने कहा,, ‘‘अक्सर पीडिएट्रिक ओंकोलोजी में पोषण की अनदेखी की जाती है, जो इन बच्चों में उपचार के उचित परिणाम पाने के लिए ज़रूरी है। हमें इस बात को समझना होगा कि इलाज भी तभी अच्छा परिणाम देता है, जब मरीज़ को उचित पोषण मिले। कैंसर के मामले में निदान से लेकर ठीक होने तक हर अवस्था में पोषण बहुत अधिक मायने रखता है।’
वर्तमान में, अस्पतालों में मान्यता प्राप्त कैंसर अस्पतालों में पोषण विशेषज्ञों का रोगी अनुपात 1:54 है, जबकि गैर-मान्यता प्राप्त सुविधाओं में यह अनुपात 1:407 है, जो और भी अधिक चिंताजनक है। पोषण सेवाओं में निवेश बढ़ाने, पोषण विशेषज्ञों के लिए विशेष प्रशिक्षण और
रिपोर्ट देश के अस्पतालों में पोषण विशेषज्ञों की कमी पर भी रोशनी डालती है। पोषण सेवाओं में निवेश बढ़ाने, पोषण विशेषज्ञों के लिए विशेष प्रशिक्षण और पीडिएट्रिक ओंकोलॉजी केयर में संरचित पोषण देखभाल प्रक्रिया को शामिल करने की आवश्यकता है।
मरीज़ों के पोषण की देखभाल व्यक्तिगत रूप से करना ज़रूरी है, क्योंकि इससे मरीज़ ज़ल्दी ठीक होता है और उसके स्वास्थ्य के परिणामों में सुधार आता है। उचित पोषण पीडिएट्रिक ओंकोलोजी केयर में सबसे ज़्यादा मायने रखता है, यह सुनिश्चित करता है कि कैंसर की जंग लड़ रहे बच्चों को ज़रूरी सहयोग मिले। यह रिपोर्ट देश भर में कैंसर से पीड़ित बच्चों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पीडिएट्रिक ओंकोलोजी में पोषण विशेषज्ञों की नियुक्ति, उनके प्र्रशिक्षण और इस क्षेत्र के लिए फंडिंग की आवश्यकता पर ज़ोर देती है।
यह रिपोर्ट पीडिएट्रिक कैंसर उपचार में पोषण के प्रति नया नज़रिया अपनाने का आह्वान है। उचित प्रयासों और निवेश के द्वारा सुनिश्चित किया जा सकता है कि कैंसर की जंग लड़ रहा कोई भी बच्चा कुपोषण के कारण इस जंग में हार न जाए।