
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : May 8, 2025 1:46 PM IST
Ovarian cancer in hindi: अंडाशय का कैंसर महिलाओं के अंडाशय में होता है। अंडाशय महिलाओं के गर्भधारण में जरूरी अंग है, जहां अंडाणु (अंडे) बनते हैं। शुरू में इस कैंसर के लक्षण आसानी से नहीं दिखते। पेट फूलना, पेट में दर्द, बार-बार पेशाब आना और पेट साफ होने में बदलाव – ये इसके लक्षण हो सकते हैं। इस कैंसर का खतरा उम्र बढ़ने, परिवार में कैंसर का इतिहास और कुछ खास जीन्स (BRCA1, BRCA2) की वजह से बढ़ता है। इसलिए समय पर जांच और जागरूकता से जान बचाई जा सकती है।
डॉक्टरों के मुताबिक, ओवेरियन कैंसर के सबसे अहम जोखिम कारकों में से एक है आनुवंशिकता। जिन महिलाओं में BRCA1 और BRCA2 जैसे आनुवंशिक परिवर्तन पाए जाते हैं, उनमें इस कैंसर का खतरा अधिक होता है। ये आनुवंशिक परिवर्तन माता या पिता – किसी एक से भी आ सकते हैं। जिन महिलाओं के परिवार में स्तन या अंडाशय के कैंसर का इतिहास है, उन्हें जेनेटिक काउंसलिंग जैसी सलाह लेनी चाहिए। BRCA जैसे आनुवंशिक कारणों के अलावा, लिंच सिंड्रोम, कोलन कैंसर और एंडोमेट्रियल कैंसर से जुड़ी स्थितियां भी अंडाशय कैंसर का खतरा बढ़ाती हैं। इसके अलावा उम्र भी एक बड़ा कारण है। अधिकतर मामलों में यह कैंसर 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में पाया जाता है और उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा भी बढ़ता जाता है।
मुंबई के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. केकिन गाला ने कहा कि, अंडाशय, स्तन या गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का पारिवारिक इतिहास हो, तो उसका समय पर निदान इलाज की सफलता को काफी हद तक बढ़ सकता है। अगर बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो इससे पार पाना संभव है। पेट फूलना, निचले पेट में दर्द या आंतों की हरकतों में बदलाव जैसे लक्षणों के कारण कई बार निदान में देरी होती है और बीमारी का अंतिम चरण में निदान होता है। इसलिए इस कैंसर का समय पर पता लगाना और इलाज कराना बहुत जरूरी है।
झायनोव्हा शाल्बी अस्पताल के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. दीप वोरा ने कहा कि, ओवेरियन कैंसर के लिए कोई प्रभावी जांच उपलब्ध नहीं है, इसलिए जागरूकता बहुत जरूरी है। नियमित पेल्विक जांच, उच्च जोखिम वाले मामलों में अल्ट्रासाउंड इमेजिंग और लक्षणों को पहचानना समय पर निदान में मदद कर सकता है। जिन महिलाओं में पारिवारिक या आनुवंशिक जोखिम है, उन्हें नियमित जांच करानी चाहिए और अपने डॉक्टर से समय-समय पर चर्चा करते रहना चाहिए। उच्च जोखिम वालों के लिए ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड और CA-125 रक्त परीक्षण की सलाह दी जाती है। जीवनशैली में बदलाव भी इस कैंसर से बचाव में मददगार हो सकते हैं जैसे वजन नियंत्रित रखना, धूम्रपान से बचना और शारीरिक रूप से सक्रिय रहना। पारिवारिक इतिहास की जानकारी होना और लक्षणों को समझना उन महिलाओं को समय पर इलाज कराने में मदद करेगा। इसलिए समाज में इस कैंसर को लेकर जागरूकता फैलाना और आनुवंशिक जांच तथा जीवनशैली में सुधार के माध्यम से महिलाओं के लिए इसके खतरे को कम किया जा सकता है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।