
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
soft tissue sarcoma (AI generated image)
कैंसर के बारे में तो हर कोई जानता है, लेकिन कैंसर के सभी प्रकारों के बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं होती है। सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा भी उनमें से एक है, जो एक बेहद दुर्लभ प्रकार का कैंसर होने के साथ एक बेहद खतरनाक प्रकार का कैंसर भी है। बहुत ही कम लोगों को लगता है कि यह हमारे शरीर के नरम ऊतकों जैसे मांसपेशियां, फैट, नसें और टेंडन्स आदि में विकसित होता है और इसलिए इसे सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा कहा जाता है। राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा समिट 2026, में देश-विदेशों एक्सपर्ट्स ने भाग लिया और सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा जैसे दुर्लभ और जटिल कैंसर पर विशेष चर्चा की गई, जिसके उपचार के लिए विशेषज्ञों की संयुक्त टीम और विशेष चिकित्सा दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।
4 और 5 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के रोहिणी स्थित होटल क्राउन प्लाज़ा में आयोजित इस दो दिवसीय शैक्षणिक सम्मेलन के दौरान राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र के ऑर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजिस्ट आयोजन समिति के सदस्य डॉ. हिमांशु रोहेला ने TheHealthsite को बताया कि सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा को अगर सरल भाषा में समझाएं तो शरीर में होने वाली एक तरह की गांठ ही होती है। ऐसा भी हो सकता है कि यह गांठ लंबे समय से आपके शरीर में बिना किसी तरह का दर्द किए मौजूद रहे।
आगे डॉ. रोहेला ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को शरीर में 2 महीने से गांठ शरीर में मिलती है, तो उसे बिल्कुल भी इग्नोर नहीं किया जाना चाहिए बल्कि जल्द से जल्द किसी अच्छे सर्जन से संपर्क करना चाहिए। साथ ही किसी अच्छे सर्जन से सलाह लेने के साथ-साथ आपको किसी अच्छे व बड़े कैंसर सेंटर से ले लेना चाहिए। हालांकि, जरूरी नहीं है कि हर गांठ कैंसर की ही हो, लेकिन फिर भी जांच कराना बेहद जरूरी होता है। इसलिए शरीर के किसी भी हिस्से में अगर 2 हफ्ते से ज्यादा समय तक गांठ रहती है, तो डॉक्टर से संपर्क जरूर कर लेना चाहिए।
soft tissue sarcoma summit
इस खास समिट में आरजीसीआईआरसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र सिंह गंगवार और उनके साथ-साथ डॉ. उल्लास बत्रा, सह-निदेशक, मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं चीफ, थोरैसिक मेडिकल ऑन्कोलॉजी, आरजीसीआईआरसी और कई कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टर व अन्य हेल्थ एक्सपर्ट्स भी शामिल हुए।
डॉ. हिमांशु रोहेला ने समिट के दौरान यह भी कहा कि “सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा के प्रभावी उपचार के लिए सटीक जांच, सही स्टेजिंग और विभिन्न विशेषज्ञों के बीच एक सही कोर्डिनेशन होना आवश्यक है। इस सम्मेलन ने विशेषज्ञों को जटिल मामलों पर चर्चा करने, नए नई शोध का डाटा साझा करने और उपचार संबंधी व्यावहारिक रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।”
सम्मेलन में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि दुर्लभ प्रकार के कैंसर के बेहतर इलाज के लिए मल्टीडिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए सर्जन, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट और मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा मिलकर ट्रीटमेंट प्लान तैयार किया जाना चाहिए।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा कैंसर से जुड़ी एक्सपर्ट्स द्वारा दी गई जानकारी देना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।