मानसून में क्यों बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द, जानें उसके उपाय कैसे करें

Health Problems in Monsoon: बारिश के मौसम आने के बाद कुछ लोगों को जोड़ों में दर्द या अकड़न जैसी समस्याएं होने लगती है, जिसके कारण व उपाय के बारे में आप एक्सपर्ट्स की मदद से इस लेख में जानेंगे।

मानसून में क्यों बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द, जानें उसके उपाय कैसे करें

Written by Mukesh Sharma |Updated : August 22, 2025 11:26 PM IST

Joint Pain in Monsoon: तपती गर्मियों के बाद मानसून का मौसम हर किसी को अच्छा लगता है। ठंडी बूंदों की रिमझिम फुहार, मिट्टी की सोंधी खुशबू और हरियाली का दृश्य दिल को सुकून देता है। यह मौसम न केवल प्रकृति को संजीवनी देता है, बल्कि मन में नई ऊर्जा और रोमांच भी भर देता है। हालांकि मानसून का मौसम कई लोगों के लिए सुकून और राहत लेकर आता है, लेकिन यह वही समय है जब गठिया, आर्थराइटिस या पुराने जोड़ों के दर्द से पीड़ित लोगों को असहजता का सामना करना पड़ता है। अक्सर देखा गया है कि बारिश के दौरान कई लोग अपने घुटनों, कंधों, कमर या रीढ़ की हड्डी में दर्द की शिकायत करने लगते हैं। ऐसे में सवाल उठता है आखिर मानसून में ही जोड़ों का दर्द क्यों बढ़ जाता है? और इससे राहत पाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? जिसका जवाब दे रहे हैं डॉ. अनिल रहेजा, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स और स्पाइन, अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल, दिल्ली

(और पढ़ें - जोड़ों का दर्द कैसे दूर करें)

नमी में वृद्धि (Humidity Increase)

मानसून के दौरान वायुमंडल में नमी (ह्यूमिडिटी) का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है। यह नमी शरीर के संवेदनशील नर्व सिस्टम को प्रभावित करती है, खासकर उन हिस्सों में जहां पहले से सूजन या गठिया की समस्या होती है। इससे जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों और ऊतकों (tissues) में सूजन और अकड़न बढ़ जाती है, जिससे दर्द तेज हो जाता है।

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तापमान में गिरावट

मानसून में तापमान अचानक घटने लगता है। ठंड के कारण जोड़ों और मांसपेशियों में रक्त संचार धीमा हो जाता है, जिससे ये हिस्से कठोर और कम सक्रिय हो जाते हैं। यह स्थिति विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए तकलीफदेह हो सकती है, क्योंकि उनकी हड्डियां पहले ही कमजोर होती हैं।

गतिविधियों में कमी

बारिश के दौरान अधिकतर लोग बाहर निकलने से बचते हैं, जिससे उनकी शारीरिक गतिविधियां सीमित हो जाती हैं। सक्रियता की कमी से मांसपेशियां कमजोर होती हैं और जोड़ निष्क्रिय होकर अधिक तनाव में आ जाते हैं। इससे असहनीय दर्द और अकड़न का अनुभव हो सकता है।

हवा के दबाव में बदलाव

मानसून में वायुदाब में उतार-चढ़ाव होना सामान्य है, लेकिन यह शरीर पर गहरा असर डालता है। विशेष रूप से जोड़ों में मौजूद तरल पदार्थ पर इसका प्रभाव पड़ता है, जिससे सूजन और दर्द बढ़ जाते हैं। गठिया रोगियों के लिए यह स्थिति और अधिक कष्टदायक हो सकती है।

कौन होते हैं, सबसे अधिक प्रभावित?

- गठिया या ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीज।

- बुजुर्ग व्यक्ति (60 वर्ष से ऊपर)।

- जिन्होंने कभी हड्डी की चोट या सर्जरी करवाई हो।

- जो लोग लंबे समय से गतिहीन जीवनशैली अपनाए हुए हैं।

दर्द से बचाव के उपाय

हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें

बारिश हो या ठंड, रोजाना कम से कम 20–30 मिनट की हल्की फिजिकल एक्टिविटी करें। वॉकिंग, योग, स्ट्रेचिंग और जोड़ संबंधित व्यायाम दर्द से राहत देते हैं और लचीलापन बनाए रखते हैं।

गर्म सिकाई

गर्म पानी की थैली या गर्म तौलिया जोड़ों पर रखने से सूजन और अकड़न में राहत मिलती है। यह उपचार रक्त संचार को बेहतर बनाता है, जिससे मांसपेशियों को आराम मिलता है और दर्द कम महसूस होता है।

संतुलित आहार लें

- ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार (जैसे अलसी, मछली)।

- एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स जैसे हल्दी, अदरक, लहसुन।

- कैल्शियम और विटामिन डी युक्त भोजन हड्डियों को मजबूत बनाता है।

- अत्यधिक नमक, चीनी और जंक फूड से बचें।

हाइड्रेटेड रहें

मानसून में नमी के कारण प्यास भले ही कम लगे, लेकिन शरीर को भीतर से हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व (टॉक्सिन्स) बाहर निकलते हैं, जिससे सूजन नियंत्रित रहती है और जोड़ों का दर्द भी कम होता है।

(और पढ़ें - मानसून में बीमार पड़ने से कैसे बचें)

सही पोशाक पहनें

मानसून में ठंड और नमी जोड़ों के दर्द को बढ़ा सकती है, इसलिए हल्के, गर्म और सूती कपड़े पहनना फायदेमंद होता है। विशेषकर सुबह और शाम के समय जोड़ों को ठंडी हवा से बचाकर रखें। इससे सूजन, अकड़न और असहजता से राहत मिलती है।

जोड़ों पर अतिरिक्त भार न डालें

भारी वजन उठाने या लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है। इसलिए पर्याप्त आराम करें, लेकिन पूरी तरह निष्क्रिय न रहें, हल्की गतिविधि बनाए रखें। साथ ही अपने शरीर के बढ़ते वजन को भी कम करें, क्योंकि बढ़ते शरीर के वजन का सीधा प्रभाव आपके घुटनों पर पड़ता है।

डॉक्टर की सलाह पर दवाइयां और सप्लिमेंट्स

यदि दर्द अधिक हो तो डॉक्टर की सलाह से एनाल्जेसिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं या विटामिन सप्लिमेंट्स का सेवन करें। आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक विकल्प भी सहायक हो सकते हैं, लेकिन बिना परामर्श न लें।

कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?

  • अगर दर्द लंबे समय से है
  • पेन किलर लेने के बाद भी आराम न मिले
  • दर्द असहनीय हो जाए
  • जोड़ों में सूजन बहुत अधिक हो
  • चलने-फिरने में कठिनाई हो
  • जोड़ लाल या गर्म महसूस हो
  • अन्य कोई नई तकलीफ या लक्षण दिखें

आलस नहीं अनुशासन

मानसून का मौसम अपने साथ ठंडक, नमी और आलस्य लाता है, जो हड्डियों और जोड़ों के लिए हानिकारक हो सकता है। लेकिन कुछ सरल सावधानियों और उपायों से इस मौसम में भी आप स्वस्थ, सक्रिय और दर्दमुक्त रह सकते हैं। डॉ. अनिल रहेजा कहते हैं, "जोड़ों के दर्द को नजरअंदाज करना भविष्य में जटिलताओं का कारण बन सकता है। मानसून में शरीर का ध्यान रखना और जीवनशैली में थोड़ा अनुशासन जोड़ना ही जोड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकता है।"

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अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

FAQs

जोड़ों के दर्द के मरीजों को क्या खाना चाहिए

जिन लोगों को अक्सर जोड़ों का दर्द रहता है, उन्हें अपनी डाइट में ऐसा खाना शामिल करना चाहिए जिसमें ज्यादा प्रोटीन और कैल्शियम पाया जाता है।

क्या जोड़ों के दर्द में एक्सरसाइज कर सकते हैं

जोड़ों के दर्द के दौरान हल्की एक्सरसाइज करना जरूरी होता है, जिससे ज्यादा जकड़न नहीं हो पाती है।

जोड़ों में दर्द का क्या कारण हो सकता है?

जोड़ों में दर्द के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे कमजोरी, शरीर का वजन ज्यादा होना, गठिया और हड्डियों की कमजोरी आदि।