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Cervical Cancer Diagnosis And Treatment: महिलाओं में कैंसर की बात की जाए तो ओवेरियन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर सबसे कॉमन (Common types of cancer in women) हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में साल 2019 तक सर्वाइकल कैंसर के जो केसेस (Cases of cervical cancer in India) सामने आए उनमें से लगभग 45 हजार महिलाओं की मृत्यु (deaths due to cervical cancer in India) हो गई। सर्वाइकल कैंसर के खतरे के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल जनवरी महीने को सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह (Cervical Cancer Awareness Month 2023) के तौर पर मनाया जाता है।
ऑन्कोलॉजिस्ट के अनुसार भले ही इस प्रकार का कैंसर खतरनाक और जानलेवा है पर इसका इलाज संभव है। प्रीवेंशन के सही तरीके अपनाकर, समय पर निदान और इलाज की मदद से इसे रोका जा सकता है। एसआरवी हॉस्पिटल की सर्जिकल ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. मेघल संघवी (Dr. Meghal Sanghavi, Surgical Oncologist, SRV Hospital, Mumbai) का कहना है कि एचपीवी (HPV) महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का सबसे आम कारण (most common causes of cervical cancer) है इसीलिए, एचपीवी वैक्सीनेशन की मदद से सर्वाइकल कैंसर को रोकने में मदद हो सकती है।
सर्वाइकल कैंसर से बचने का एक और तरीका है इसका समय पर डायग्नोसिस (Diagnosis of cervical cancer) और उसके लिए महिलाओं को रेग्यूलर चेकअप कराना चाहिए। डॉ. संघवी सलाह देते हैं कि वैक्सीन लेने वाली महिलाएं और वैक्सीन ना लगवाने वाली सभी महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से जुड़े टेस्ट (Medical tests for cervical cancer) रेग्यूलर कराने चाहिए। वहीं, सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों को रोकने के लिए एचपीवी वैक्सीन लगवाना भी महत्वपूर्ण होता है। डॉ. संघवी के अनुसार, वैक्सीनेशन की मदद से सर्वाइकल कैंसर से मौत का खतरा 93 फीसदी तक कम किया जा सकता है। इसके लिए नियमित पैप स्मीयर और एचपीवी टेस्ट कराना चाहिए और साथ ही महिलाओं में जागरूकता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है।
डॉ. मेघल संघवी कहते हैं कि, “भारतीय महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे कॉमन कैंसर (common cancer in women in India) है। हमारे देश के शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामले अधिक पाए जाते हैं। इसके कई कारण (causes of cervical cancer in Indian population) हैं जैसे-
एशियन कैंसर इंस्टीट्यूट के ऑन्कोलॉजिस्ट और हेमेटो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ सुहास आग्रे (Dr. Suhas Agre, Oncologist and Hemato-oncologist, Asian Cancer Institute) कहते हैं कि, "सर्वाइकल कैंसर हाई रिस्क वाले ह्यूमन पेपिलोमा वायरस या एचपीवी (Human Papillomavirus) के कारण फैलता है। अधिकांश मामलों में महिलाओं का इम्यून सिस्टन या प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस ( HP Virus) के संपर्क में आने के बाद कमजोर होने लगती है और इससे सर्वाइकल कैंसर पनपने का रिस्क (risk of developing cervical cancer) बढ़ जाता है। एचपीवी इंफेक्शन फैलने का सबसे कॉमन कारण महिलाओं में उनके यौन पार्टनर से इसके प्रसार को बताया जाता है। इसी तरह जो लड़कियां कम उम्र में सेक्सुअली एक्टिव हो जाती हैं उनमें सर्वाइकल कैंसर होने का खतराबढ़ जाता है।‘’
डॉ. संघवी बताते हैं कि, " माहवारी या पीरियड्स के दौरान हेवी फ्लो (heavy flow during periods) और मेनोपॉज के बाद भी होनेवाला ब्लड फ्लो (blood flow after menopause) महिलाओं की गर्भाशय ग्रीवा या सर्विक्स के कैंसर (cancer of cervix) का एक संकेत हो सकता है। आमतौर पर सर्वाइकल कैंसर के लक्षण (symptoms of cervical cancer) जल्दी दिखायी नहीं देते इसीलिए, ज्यादातर मामलों में कैंसर का पता काफी देर से चलता है और कई बार स्थिति काफी गम्भीर हो चुकी होती है। इसीलिए, कैंसर का जल्द पता लगाने के लिए नियमित पैप स्मीयर जैसे टेस्ट कराने से फायदा हो सकता है।'' (why pap smear test is important)
सर्वाइकल कैंसर के अन्य लक्षण (other symptoms of cervical cancer) इस प्रकार हो सकते हैं-
अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. राणा चौधरी (Dr Rana Choudhary, Obstetrician & Gynecologist, Apollo Spectra Hospital, Mumbai) का कहना है कि, ''सर्वाइकल कैंसर का पहला स्टेज (First stage of cervical cancer) 10-15 साल का हो सकता है ऐसे में नियमित पैप स्मीयर टेस्ट कराने से कैंसर के शुरूआती लक्षणों का पता आसानी से चल सकता है। आमतौर पर 3 साल में एक बार पैप टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है।, 21 से 65 साल के एज ग्रुप में आने वाली और सेक्सुअली एक्टिव महिलाओं को एचपीवी टेस्ट कराना चाहिए।" (when should women get HPV test done)
पैप टेस्ट के बारे डॉ. संघवी सलाह देते हैं कि 23 साल से अधिक उम्र की सभी शादीशुदा महिलाओं को पैप टेस्ट (pap test right age) कराना चाहिए। इसी तरह 30 साल की उम्र के बाद सभी महिलाओं के हर 3 साल बाद पैप टेस्ट कराना ही चाहिए। क्योंकि, इस तरह जल्द से जल्द सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों (methods to identify symptoms of cervical cancer) की पहचान में मदद हो सकती है।
इसके साथ ही एचपीवी वैक्सीन लगवाना भी सभी लड़कियों और महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। डॉ. संघवी कहते हैं कि, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम (preventing cervical cancer) के लिए एचपीवी वैक्सीन मददगार साबित हो सकती है। इसीलिए 9 साल से 14 साल की उम्र की सभी लड़कियों के माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे अपनी बच्चियों को एचपीवी वैक्सीन (HPV vaccine for girls below 14 years) लगवाएं। इसी तरह 26 साल से कम उम्र की लड़कियों को भी जल्द से जल्द यह वैक्सीन लगवाने से इसकी अच्छी कवरेज मिल सकती है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई बीमारी से जुड़ी सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गयी है। किसी बीमारी की चिकित्सा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कृपया अपने चिकित्सक का परामर्श लें।)