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Causes and Prevention of Respiratory Infection in Hindi:
मौसम में बदलाव के साथ स्वास्थ्य पर भी उसका अलग असर पड़ता है और इस दौरान कई तरह के संक्रमण व एलर्जी होने का खतरा रहता है। देखा गया है कि आजकल रेस्पिरेटरी इंफेक्शन का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। देशभर के कई राज्यों में अलग-अलग जगह पर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के मामलों में बढ़ोत्तरी पिछले कुछ साल से ही देखी जा रही है। रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के मामलों में वृद्धि को रोकने के लिए उसका इलाज और समय रहते सही सावधानी व रोकथाम जरूरी है। लेकिन इन सब के लिए उसके प्रति सही जानकारी का होना भी जरूरी है। इस लेख में डॉक्टर आयुष पांडे ने रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी, जिसके बारे में हर किसी को जानना चाहिए। उनके अनुसार इस मौसम में बदलती नमी और ठंडक की वजह से शरीर कमजोर पड़ जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए आपको विशेष सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है। यहां कुछ खास टिप्स दिए गए हैं, जिनका पालन करके आप वायरल संक्रमण से बचाव कर सकते हैं।
बारिश में संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए हाइजीन का विशेष ध्यान रखें। संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें। अपने हाथों को बार-बार धोएं या हैंड सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें। चेहरे, खासकर नाक, मुंह और आंखों को बार-बार छूने से बचें, क्योंकि इससे वायरस आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। (और पढ़ें - यीस्ट इंफेक्शन क्या है)
बारिश के मौसम में अक्सर लोग पानी पीना कम कर देते हैं, लेकिन शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी है। दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। हाइड्रेशन से गले की सूखापन कम होता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है।
कोविड-19 और इंफ्लूएंजा जैसी बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीन लेना बेहद जरूरी है। ये संक्रमण तेजी से फैलते हैं और गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं। वैक्सीन आपकी सुरक्षा क्षमता बढ़ाती है और बीमारी के गंभीर रूपों से बचाती है। अगर आपने अभी तक वैक्सीन नहीं लगवाई है, तो जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराएं, यह सबसे प्रभावी बचाव का तरीका है।
बारिश के मौसम में शरीर को मजबूत रखने के लिए प्रोटीन जरूरी है। अगर आप मांसाहारी हैं तो अंडे, मछली, चिकन का सेवन बढ़ाएं। शाकाहारी हैं तो सोया, पनीर, दालें, और नट्स अपने आहार में शामिल करें। प्रोटीन आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।
आपको सबसे पहले ध्यान रखना होगा कि रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के ज्यादातर लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम, बुखार और बदन दर्द जैसी सामान्य बीमारियों के जैसे ही होते हैं। लेकिन ऐसे में आप इसकी पहचान कर सकते हैं कि अगर लक्षण ज्यादा गंभीर हैं, उदाहरण के लिए अगर बुखार तेज है, तो यह शरीर के अंदर किसी संक्रमण का संकेत हो सकता है। रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं -
इसके अलावा भी इस संक्रमण के दौरान कुछ लक्षण देखे जा सकते हैं, जो मुख्य रूप से मरीज की शारीरिक क्षमता, बीमारी की गंभीरता, संक्रमण के प्रकार, मौसम और अन्य कई कारकों पर निर्भर कर सकते हैं। वहीं कुछ मरीजों के शरीर में लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जबकि कुछ मरीजों के शरीर में लक्षण तेजी से देखने को मिलते हैं। उदाहरण के लिए रात ठीक-ठाक सोने पर सुबह इस तरह के कई लक्षण महसूस होने लगना। (और पढ़ें - टॉन्सिल्स में सूजन का कारण)
रेस्पिरेटरी इंफेक्शन का इलाज प्रमुख रूप से संक्रमण के प्रकार और उसके कारण पर निर्भर करता है। रेस्पिरेटरी इंफेक्शन आमतौर पर दो प्रकार होता होता है, वायरल इंफेक्शन या बैक्टीरियल इंफेक्शन। इसके प्रकार के अनुसार ही उसका इलाज किया जाता है।
अगर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन बैक्टीरिया के कारण हो रहा है यानी बैक्टीरियल इंफेक्शन है, तो उसका इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है और मरीज को महसूस हो रहे लक्षणों के अनुसार अन्य दवाएं दी जाती हैं, जैसे एंटीपायरेटिक (बुखार कम करने की दवा), एंटीइंफ्लेमेटरी (सूजन व जलन कम करने की दवा) और अन्य पेनकिलर दवाएं आदि।
वहीं अगर रेस्पिरेटरी इंफेक्सन वायरस के कारण हुआ है यानी यह एक वायरल संक्रमण है, तो इसके इलाज में एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं। इसके साथ-साथ पेनकिलर, एंटीपायरेटिक, एंटी-एलर्जिक और मरीज को हो रहे अन्य लक्षणों के अनुसार दूसरी दवाएं दी जाती हैं।
इसके अलावा दोनों ही मामलों में मरीज को पर्याप्त रूप से आराम करने की सलाह दी जाती है, अच्छा और हल्का खाना खाने की सलाह दी जाती है और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर व डाईटीशियन मरीज को कुछ खास सप्लीमेंट्स, डाइट में ताजे फल व सब्जियां और जूस आदि का सेवन करने की सलाह भी दे सकते हैं। ताकि मरीज की इम्यूनिटी को बूस्ट किया जा सके। (और पढ़ें - मूत्र पथ में संक्रमण का इलाज)
साथ ही अगर किसी व्यक्ति को यह समस्या हो रही है, तो उसका इलाज करने के साथ-साथ डॉक्टर अन्य लोगों को भी खास सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं। ताकि यह इंफेक्शन दूसरे व्यक्ति में न फैल सके। खासतौर पर बच्चों व बुजुर्गों को मरीज व्यक्ति के सीधे संपर्क में न आने की सलाह दी जाती है, क्योंकि उनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है और उनके बीमार होने का खतरा ज्यादा रहता है।
जो व्यक्ति मरीज की देखभाल कर रहा है, उसे भी खास सावाधानियां बरतने की सलाह दी जाती है जैसे -
अगर किसी भी मरीज को रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो इन्हें इग्रोर नहीं करना चाहिए। ऐसा भी हो सकता है कि रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के शुरुआती शुरुआती लक्षण सामान्य सर्दी-खांसी जैसे हो सकते हैं और कई बार लोग इन्हें इग्नोर कर देते हैं, जो बाद में स्थिति को गंभीर बनाते हैं। ऐसे में अगर आपके आसपास रेस्पिरेटरी इंफेक्शन जैसी बीमारियां फैल रही हैं या फिर उनका खतरा ज्यादा है, तो ऐसे में थोड़े बहुत लक्षण होते ही बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।
अगर आपके परिवार में किसी बुजुर्ग या बच्चे को बदलते मौसम में अक्सर सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो भी उसे लंबे समय तक इग्नोर न करें और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर लक्षणों की जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट, सलाइवा टेस्ट और स्टूल टेस्ट आदि करेंगे ताकि लक्षणों के पीछे की असली बीारी का पता लगाया जा सके। डॉक्टर लक्षणों व टेस्ट के बाद आई रिपोर्ट्स के आधार पर ही दवाएं देंगे व अन्य ट्रीटमेंट शुरु करेंगे।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
गले में खराश होने के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं जैसे किसी कारण से हुआ संक्रमण या एलर्जी आदि। इसके अलावा किसी केमिकल या विषाक्त हवा के संपर्क में आने से भी गले में खराश हो सकती है।
किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा कम करने के लिए सही लाइफस्टाइल, हेल्दी डाइट, शारीरिक साफ सफाई और आसपास गंदगी फैलने से रोकना आदि जरूरी है।
श्वसन तंत्र में संक्रमण होने पर सांस लेने में कठिनाई, छाती में दर्द, नाक बहना या नाक रुकना, सिरदर्द रहना और तेज बुखार जैसे लक्षण हो सकते हैं।
श्वसन तंत्र के किसी भी हिस्से में होने वाले संक्रमण को रेस्पिरेटरी इंफेक्शन कहा जाता है, जैसे नाक, वायुमार्ग, फेफड़े और साइनस आदि में संक्रमण होना।