
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Risk of prostate related problems after age of 60 in winter: ठंड मौसम के कारण 60 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट से संबंधित समस्या बढती दिखाई दे रही हैं। कई पुरुष प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) की समस्या से पीड़ित हैं। ठंड के महीनों के दौरान पेशाब संबंधी समस्या होती हैं। इसलिए बार-बार पेशाब होने के बारे में लोगों में जागरूकता निर्माण करना काफी जरूरी हैं। पेशाब संबंधी समस्या को रोखने के लिए जीवनशैली में बदलाव करना जरूरी हैं। जैसे की, हाइड्रेटेड रहना और अत्यधिक कैफीन और शराब से बचना, वृद्ध पुरुषों को इस समय अपने प्रोस्टेट स्वास्थ्य को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद कर सकता है।
प्रोस्टेट की समस्याएं ठंडे महीनों के दौरान बढती हैं। जिस कारण पुरुषों में बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) की समस्याओं में वृद्धि होती हैं। कई पुरुषों में ठंड के कारण पेशाब संबंधी समस्या होती हैं। इसलिए रात में तरल पदार्थ न लेने और दवाइयों जैसे जीवनशैली में बदलाव करके इस समस्या को दूर किया जा सकता हैं। सौम्य प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) पुरुषों में देखा जाता है क्योंकि प्रोस्टेट ग्रंथि सामान्य से बड़ी हो जाती है।
दिल्ली स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ मित्तल ने कहा कि, "ठंड के मौसम में शारीरिक गतिविधि कम हो सकती है और निर्जलीकरण हो सकता है, ये दोनों ही कारक हैं जो बीपीएच जैसी प्रोस्टेट समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। निर्जलीकरण से मूत्र अधिक गाढ़ा हो जाता है, मूत्राशय में जलन होती है और बार-बार पेशाब आता है। प्रतिदिन बाहयरूग्ण विभाग में इलाज के लिए आने वाले 60 से अधिक उम्र के 10 में से 5 पुरुष मूत्र संबंधी समस्या लेकर आ रहे हैं। 55 से 60 वर्ष की आयु से अधिक उम्र के पुरुषों में बढ़े हुए प्रोस्टेट के कारण पेशाब करने में समस्या हो सकती है जिसे सौम्य प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) कहा जाता है। BPH से पीड़ित पुरुषों में अक्सर बार-बार पेशाब आना, पेशाब शुरू करने में कठिनाई और मूत्राशय को खाली करने में असमर्थता जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। मूत्र पथ के संक्रमण या मूत्राशय की पथरी जैसी जटिलताओं से बचने के लिए इन शुरुआती लक्षणों को पहचानना काफी जरूरी हैं।
डॉ. सौरभ ने कहा कि, बार-बार पेशाब आना, मूत्राशय को पूरी तरह से खाली न कर पाना यह बीपीएच के लक्षण हैं। इसके अलावा, जैसे-जैसे ठंडी बढती हैं, मूत्र संबंधी लक्षण और भी बदतर होते जाते हैं। व्यक्ति को कम पसीना आता है और पसीना आने पर कम तरल पदार्थ निकलता है। इस कारण अधिक पेशाब बनता है और व्यक्ति को बार-बार शौचालय जाना पड़ता है। जीवनशैली में कई बदलाव इस स्थिति को प्रबंधित करने में मदद कर सकते हैं।
डॉ. सौरभ ने कहा, "बीपीएच के निदान के लिए मरीज को शारीरिक जांच, मूत्र परीक्षण और अल्ट्रासाउंड करने की सलाह डॉक्टर देते हैं। जीवनशैली में बदलाव, दवा या न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी द्वारा मरीज का इलाज किया जाता हैं। सर्दियों के दौरान प्रोस्टेट स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए, पुरुषों को हाइड्रेटेड रहना चाहिए, अत्यधिक कैफीन और शराब से बचना चाहिए और शारीरिक रूप से सक्रिय रहकर व्यायाम करना चाहिए। गर्म कपड़े पहनना और स्वस्थ आहार बनाए रखना भी सर्दियों से संबंधित प्रोस्टेट समस्याओं को कम करने में मदद करता हैं। इसलिए 60 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को ठंड के दिनों में अपने प्रोस्टेट स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी हैं। नियमित जांच के लिए यूरोलॉजिस्ट की सलाह लेनी चाहिए।”