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फेफड़े हमारे शरीर का एक बहुत जरूरी अंग होते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह भी देखा है कि कई बार लोग इन्हें इतना महत्वपूर्ण नहीं समझते हैं। फेफड़े हमारे शरीर का वह अंग है, जो शरीर को ऑक्सीजन देने के लिए लगातार काम करते रहते हैं। फेफड़े ही वह अंग भी हैं, जो शरीर के अंदर होने के बावजूद भी बाहरी वातावरण के संपर्क में आते रहते हैं। यही कारण है कि प्रदूषण, गैस और धूल मिट्टी आदि भी कई बार फेफड़ों में समस्या पैदा कर देती है। एक्यूट ब्रोंकाइटिस भी ऐसी ही एक कंडीशन है, जिसके बारे में लोगों को पर्याप्त जानकारी नहीं है। डॉक्टर आयुष पांडे गुरुग्राम के एसजीटी हॉस्पिटल में जनरल मेडिसिन और रेस्पिरेटरी डिजीज के स्पेशलिस्ट हैं और उन्होंने इस गंभीर बीमारी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां हमारे साथ साझा की हैं। डॉक्टर आयुष ने बताया कि एक्यूट ब्रोंकाइटिस फेफड़ों की वह बीमारी है, जिसमें सांसों की नली जिसे हमें ट्रेकिया या ब्रोंकस कहते हैं, उसमें सूजन व लालिमा हो जाती है। गर्मियों में यह थोड़ा ज्यादा हो सकता है, जिसे हम सीजनल ब्रोंकाइटिस भी कहते हैं। गर्मियों के मौसम में इसके बढ़ने के पीछे निम्न कारण हो सकते हैं निम्न कारण हो सकते हैं।
जब प्रदूषण बढ़ता है, तो एक्यूट ब्रोंकाइटिस ज्यादा हो जाता है। इसलिए जो लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां पर वायु प्रदूषण ज्यादा है वे लगातार किसी न किसी दूषित हवा या उसमें मौजूद कण के संपर्क में आते रहते हैं और इस कारण से एक्यूट ब्रोंकाइटिस के लक्षण उनके फेफड़ों में बनने लगते हैं।
डॉक्टर आयुष पांडे ने बताया कि स्मोकिंग करना भी एक्यूट ब्रोंकाइटिस के प्रमुख कारणों में से एक हो सकता है। स्मोकिंग न करने वाले लोगों की तुलना में स्मोकिंग करने वाले लोगों में एक्यूट ब्रोंकाइटिस होने का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए जिन लोगों को एक्यूट
बहुत से ऐसे केमिकल व गैस होती हैं, जो हवा में आसानी से मिक्स हो जाती हैं। ऐसे में जब इस हवा में हम सांस लेते हैं, तो यह केमिकल या गैस धीरे-धीरे फेफड़ों तक पहुंच जाती हैं और सीधे केमिकल को नुकसान पहुंचा देती है। एक्यूट ब्रोंकाइटिस के लक्षण अचानक से पैदा होने के पीछे का एक कारण ये केमिकल्स भी हो सकते हैं, जो काफी खतरनाक स्थिति बनाते हैं।
शरीर में न्यूट्रिशन की कमी होने के कारण शरीर कमजोर पड़ने लगता है, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है। ऐसा आमतौर पर बच्चों में देखा जाता है, जिनमें न्यूट्रिशन की कमी होती है। इसके अलावा बुजुर्गों में भी न्यूट्रिशन की कमी काफी ज्यादा देखी जाती है। ऐसे में बदलते मौसम में ये लक्षण देखे जा सकते हैं।
बदलते मौसम में अक्सर वायरस से होने वाले इन्फेक्शन का खतरा भी काफी ज्यादा देखा जाता है, जिसके कारण गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती हैं। जिन लोगों को फेफड़ों में वायरल इन्फेक्शन हो गया है, तो उन्हें एक्यूट ब्रोंकाइटिस होने का खतरा भी काफी बढ़ सकता है।