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Fefon me Pani Bharna Kya Hai: जब भी शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की बात आती है, तो हार्ट, किडनी और लिवर जैसे अंगों को याद किया जाता है और बहुत ही कम फेफड़ों को याद करते हैं। कहा जाता है कि हार्ट हमे जीवित रखने के लिए लगातार बिना रुके काम करता है, लेकिन ज्यादातर लोग इस बात पर गौर नहीं कर पाते हैं कि फेफड़े भी लगातार काम कर रहे होते हैं। फेफड़े बहुत जरूरी अंग हैं और जीवित रहने के लिए इन्हें हेल्दी रखना भी बहुत जरूरी है। इसलिए फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की प्रमुख जानकारी का होना भी जरूरी है। फेफड़ों में पानी भरना एक गंभीर समस्या है और समय पर इसकी जांच जरूरी है। अगर फेफड़ों में पानी भरने जैसी स्थिति की समय पर बात न की जाए तो इससे जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है। इस लेख में हम आपको फेफड़ों में पानी भरने के कारणों के बारे में कुछ खास जानकारी देने वाले है। इस बारे में गुरुग्राम के एसजीटी अस्पताल में जनरल मेडिसिन और रेस्पिरेटरी डिजीज के स्पेशलिस्ट डॉक्टर आयुष पांडे ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी जिनके बारे में हम आपको इस लेख में बताएंगे।
डॉ. आयुष पांडे ने बताया कि फेफड़ों में पानी भरना सिर्फ फेफड़ों के अंदर पानी भरना नहीं बल्कि उनसे बाहर पानी भरने की स्थिति को भी कहा जाता है। दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। अगर आपको भी फेफड़े खराब होने के लक्षण महूसस हो रहे हैं, तो इस बारे में जरूर जानें।
फेफड़ों के बाहर पानी भरना (Pleural Effusion) - आपके फेफड़ों के बाहरी हिस्से में पानी भरने की स्थिति को प्लूरल इफ्यूजन कहा जाता है। दरअसल फेफड़ों की बाहरी सतह के ऊपर एक झिल्लीनुमा संरचना होती है, जिसे प्लूरा (Pleura) कहा जाता है। ऐसा आमतौर पर टीबी, लिवर की बीमारी, दिल की बीमारी व फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। जब इस समस्या का इलाज हो जाता है, तो यह पानी अपने आप कम हो जाता है और प्लूरल इफ्यूजन ठीक हो जाता है।
फेफड़ों के अंदर पानी भरना (Emphysema) - फेफड़ों के अंदर खासतौर पानी भरने की स्थिति को एम्फिसीमा (वातस्फीति) कहा जाता है। फेफड़ों के अंदर हवा के लिए छोटी-छोटी थैलियां बनी होती हैं, जिन्हें एल्वियोली (Alveoli) कहा जाता है। ऐसा आमतौर पर टीबी, बैक्टीरियल इन्फेक्शन, वायरल इन्फेक्शन और फंगल इन्फेक्शन जैसे कारण हो सकते हैं।
(और पढ़ें - फेफड़े खराब होने का कारण)
फेफड़ों में पानी भरने का इलाज अलग-अलग स्थितियों पर निर्भर करता है, जैसे अगर फेफड़ों के अंदर की तरफ पानी भरा है, तो पहले टेस्ट करके उसके कारण का पता लगाया जाता है और उसके अनुसार इलाज किया जाता है। साथ ही अगर फेफड़ों के अंदर पानी 500ml से ज्यादा भरा हुआ है, तो ऐसे में एक छोटी सर्जिकल प्रोसीजर के माध्यम से फेफड़ों तक ट्यूब पहुंचाई जाती है और उसकी मदद से पानी निकाला जाता है। इस सर्जिकल प्रोसीजर को इंटरकोस्टल ड्रेनेज (Intercostal Drainage) यानी आसीडी कहा जाता है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।