पीरियड्स में दर्द क्या किसी बीमारी का लक्षण हैं? एक्सपर्ट से जानिए पीरियड्स pain के कारण और राहत के उपाय

माहवारी में महिलाओं को दर्द और थकान महसूस हो सकती है। लेकिन, अगर यह दर्द तेज और गम्भीर हो तो इससे महिलाओं की मेंटल हेल्थ भी प्रभावित हो सकती है। वहीं, पीरियड्स का दर्द कुछ अन्य छुपी हुई बीमारियों का लक्षण भी हो सकता है। इसीलिए, पीरियड्स के दौरान महसूस होनेवाले दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 21, 2025 2:33 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Vidya V Bhat

Painful periods- पीरियड्स जहां हर महिला के जीवन की एक नियमित प्रक्रिया है। वहीं, कुछ महिलाओं के लिए यह कंडीशन केवल एक बायोलॉजिकल प्रोसेस भर नहीं है। क्योंकि, इन महिलाओं को हर महीने पीरियड्स के साथ शारीरिक तकलीफों, भावनात्मक तकलीफों (emotional well-being) और शरीर में हार्मोन्स के उतार-चढ़ाव से भी जुड़ा हुआ है। पीरियड्स के दौरान महिलाओं को तेज दर्द और कमजोरी महसूस होती है। वहीं, महिलाएं मेंटली भी बहुत अधिक परेशान महसूस करती हैं। हालांकि, अब पीरियड्स और पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं पर थोड़ी-बहुत बात होने लगी है। लेकिन, इब भी लोग मेंस्ट्रुएशन और मेंटल हेल्थ के बीच के कनेक्शन (connection between menstrual health and mental health) पर बातें बहुत कम होती हैं या यूं कहें कि लोगों को इस बारे में अधिक जानकारी भी नहीं है।

गायनेकोलॉजिस्ट और राधाकृष्णा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, बेंगलुरू की मेडिकल डायरेक्टर  डॉ. विद्या भट्ट (Dr. Vidya V Bhat, Medical Director of Radhakrishna Multispeciality Hospital in Bengaluru) कहती हैं कि, मेंस्ट्रुअल साइकिल शरीर में एस्ट्रोजेन (estrogen)और प्रोजेस्टेरोन (progesterone) जैसे हार्मोन्स के लेवल होनेवाले बदलावों से भी प्रभावित होते हैं।

एस्ट्रोजेन शरीर में सेरोटोनिन (serotonin) या फील-गुड न्यूरोट्रांसमीटर (feel-good neurotransmitter) को रेग्यूलेट करता है। जब पीरियड्स से पहले एस्ट्रोजेन का स्तर कम होने लगता है तो इससे महिलाओं को मूड खराब रहने लगता है। साथ ही चिड़चिड़ापन और एंग्जायटी (Anxiety) जैसी परेशानियां होने लगती हैं।

प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स का स्तर ओव्युलेशन के बाद शरीर में बढ़ता है। इसका असर धीरे-धीरे दिखायी देता है। लेकिन इससे थकान और मूड स्विंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

जब हार्मोन्स में होने वाले इन बदलावों के साथ-साथ कुछ शारीरिक समस्याएं भी होने लगती हैं तब इमोशनल दबाव बहुत अधिक बढ़ सकता है।

क्या पीरियड्स के दौरान दर्द होने मामूली बात है?

पीरियड्स के दौरान दर्द (Painful periods) होना या डिस्मोनेरिया (dysmenorrhea) केवल मामूली शारीरिक तकलीफ नहीं हैं। बल्कि यह कुछ गम्भीर समस्याओं का लक्षण भी हो सकता है। आमतौर पर मेंस्ट्रुएशन के दौरान दर्द महसूस होता है तब महिलाओं को ये समस्याएं भी हो सकती हैं-

  • नींद से जुड़े डिसॉर्डर्स बढ़ सकते हैं। इससे तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।
  • रोजमर्रा के काम करना और फिजिकली एक्टिव रह पाना आपके लिए मुश्किल हो सकता है।
  • तनाव बढ़ने लगता है जिससे दर्द और तकलीफ अधिक महसूस होती है।
  • स्ट्रेस की वजह से कई बार महिलाएं असहाय और चिड़चिड़ापन महसूस करती हैं। जिससे एंग्जायटी और डिप्रेसिव लक्षणों में बढ़ोतरी हो सकती है।

पीरियड्स का दर्द मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित करता है?

बार-बार महसूस होनेवाला दर्द और लो मूड जैसी समस्याएं पेन सेंसिटिविटी बढ़ा देती हैं। पीरियड्स में दर्द की वजह से मेंटल हेल्थ से जुड़ी इन समस्याओं का रिस्क भी बढ़ जाता है-

पीएमडीडी (Premenstrual Dysphoric Disorder)

यह पीएमएस का एक गम्भीर रूप है जो महिलाओं के मूड और कार्यक्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

एंग्जायटी डिसॉर्डर्स

माहवारी के दौरान होने वाले दर्द के बारे में सोचकर ही महिलाओं को घबराहट महसूस हो सकती है। इससे एंग्जायटी के लक्षण बढ़ सकते हैं।

डिप्रेशन

बार-बार दर्द महसूस करने और जीवन में चल रही परेशानियों के कारण महिलाओं को डिप्रेशन भी महसूस हो सकता है।

पीरियड्स में दर्द कम करने के उपाय क्या हैं?

कुछ स्टडीज और रिसर्च में ऐसा पाया गया है कि जिन महिलाओं को किसी तरह की मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्या होती है उन्हें पीरियड्स के दौरान अधिक दर्द(intense menstrual pain) महसूस हो सकता है। कई बार कुछ महिलाओं को दर्द से आराम के लिए डॉक्टरी मदद की जरूरत पड़ सकती है। डॉ. विद्या पीरियड्स पेन से आराम के लिए ये उपाय बताती हैं-

मेडिकल टेस्ट कराएं

अगर किसी महिला को पीरियड्स के दौरान तेज दर्द महसूस होता है तो उन्हें अपनी जांच करवानी चाहिए। क्योंकि, कई बार एंडोमेट्रोओसिस (endometriosis), फाइब्रॉइड्स ( fibroids) और हार्मोनल इम्बैलेंस ( hormonal imbalances) के कारण पीरियड्स में तेज दर्द की शिकायत हो सकती है।

पेन मैनेजमेंट स्ट्रेटजी

दर्द से आराम पाने के लिए (Pain Management Strategies) आप हीट थेरेपी या गर्म पानी से सेंक लेने (Heat therapy), रेग्यूलर एक्सरसाइज ( regular exercise) और डॉक्टर द्वारा बतायी गयीं कुछ दवाओं की मदद ले सकती हैं।

न्यूट्रिशन

अपनी डाइट में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स ( Diets rich in omega-3 fatty acids), मैग्नीशियम ( magnesium) और साबुत अनाज (whole grains) जैसी चीजों को शामिल करें। ये दर्द से आराम दिलाने में कारगर होती हैं।

अपने शरीर का ध्यान रखें

रोजाना योगाभ्यास करें। मेडिटेशन और प्राणायाम जैसी टेक्निक्स की मदद से आप दर्द और स्ट्रेस से आराम महसूस कर पाती हैं। जिससे आपको बेहतर महसूस होगा।

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

FAQs

पीरियड्स में दर्द से आराम पाने के लिए किन फूड्स का सेवन करना चाहिए ?

पीरियड्स में दर्द से आराम पाने के लिए  ओमेगा-3 फैटी एसिड्स वाले फूड्स, मैग्नीशियम रिच फूड्स  और साबुत अनाज  का सेवन फायदेमंद होता है।

पीरियड्स में दर्द किन बीमारियों का लक्षण है?

आमतौर पर फाइब्राइड, पीसीओडी और एंडोमेट्रिओसिस जैसी बीमारियों में महिलाओं को पीरियड्स के दौरान तेज दर्द महसूस हो सकता है।

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