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कोरोना वायरस महामारी के मामलों के बढ़ते ही लोगों को उनके स्वास्थ्य की चिंता सताने लगती है। जैसा कि किसी भी संक्रमण की चपेट में आने का डर उन लोगों के लिए अधिक होता है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। इसी तरह कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा कमजोर श्वसन मार्ग और खासकर कमजोर फेफड़ों वाले लोगों के लिए भी अधिक है। गौरतलब है कि विभिन्न रिसर्च और स्टडीज में यह बात सामने आयी है कि कोरोना वायरस फेफड़ों पर सीधा हमला करता है जिससे, संक्रमित होने वाले व्यक्ति में सांस लेने से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। वहीं, सर्दी-खांसी, बुखार और गले में खराश जैसे लक्षण भी कोरोना वायरस संक्रमण में दिखायी दे रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर्स लोगों को कोरोना वायरस महामारी के इस दौर में श्वसन प्रणाली या रेस्पेरटरी सिस्टम को मज़बूत बनाने की सलाह देते हैं।
अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल (करोल बाग, दिल्ली) के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. संजीव डांग कहते हैं कि कोरोना वायरस मनुष्यों के फेफड़ों पर बुरा प्रभाव डालता है वहीं, मौसम बदलने के कारण बहुत से लोगों को सर्दी, खांसी, गले में खराश और बुखार जैसी समस्याएं भी हो रही हैं। इस दौरान यह भी देखा गया है कि लोग कोविड वायरस संक्रमण के डर से अस्पताल में जाकर टेस्ट कराने की बजाय इंटरनेट से जानकारी इकट्ठा घर अपना इलाज खुद ही करते रहते हैं। इसका उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है और डॉक्टरी सलाह न लेते हुए इलाज करने से गले में संक्रमण का रिस्क भी बढ़ जाता है।
डॉ. संजीव डांग का कहना है कि, नाक, गला और स्वरयंत्र बाहरी श्वसन तंत्र का हिस्सा हैं, जो आंतरिक श्वसन मार्ग से होते हुए लंग्स या फेफड़ों तक फैला होता है। जैसा कि, श्वसन तंत्र बहुत नाजुक होता है। इसीलिए, थ्रोट इंफेक्शन अगर फेफड़ों तक फैल जाए तो इसके गम्भीर परिणाम सामने आ सकते हैं। वहीं, दूसरी तरह कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर का खतरा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में लोगों को अपने श्वसन तंत्र यानि नाक, कान और गले के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के प्रयास करने चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि थर्ड वेव के दौरान लोगों के फेफड़ों पर बहुत कम असर पड़ने की संभावना है। पर ओमिक्रोन वेरिएंट (Omicron Variant) कम घातक बताया जा रहा है उसकी चपेट में आने वाले मरीजों में गले में खिचखिच, खराश, नाक बहना और नाक में सूजन जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं।
आमतौर पर ये समस्याएं सर्दी या फ्लू के कारण भी हो सकती हैं। वहीं अगर ये लक्षण दो दिनों से अधिक समय तक बने रहते हैं, तो आरटी-पीसीआर टेस्टिंग की ज़रूरत पड़ सकती है। आरटी-पीसीआर कराने वाले लोगों को उनकी टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आने तक होम आइसोलेशन में रहना चाहिए, ताकि अन्य लोगों तक वायरस के प्रसार को रोका जा सके।