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डायबिटीज को आम तौर पर केवल मीठा खाने से ही जोड़कर देखा जाता है। मीठे के सेवन से इसका संबंध सही है लेकिन लेकिन रोग के रूप में डायबिटीज का दायरा बहुत व्यापक है, यह एक ऐसा रोग है जो न केवल अन्य बीमारियों को जन्म दे सकता है, बल्कि अन्य कई बीमारियाँ भी डायबिटीज का कारण बन सकतीं हैं। इस कड़ी में खान पान के प्रति लापरवाही, निष्क्रिय जीवनशैली आदि तो वजहें हैं ही। भारत में डायबिटीज स्वास्थ्य के सन्दर्भ में एक प्रमुख चिंता का विषय है।
एक अध्ययन के मुताबिक आधे मिलियन से अधिक लोग यहां जीवन की किसी न किसी स्थिति में इस समस्या से जूझ सकते हैं। यानी डायबिटीज के सन्दर्भ में एक व्यापक चर्चा की जरूरत है। इसके अलावा जो लोग पहले से इस रोग से जूझ रहे हैं वे कैसे अपना बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित कर सकते हैं इस पर भी ध्यान देना बहुत आवश्यक है। इन सभी विषयों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य जगत से जुड़े कुछ विशेषज्ञ डॉक्टर्स जानकारियां साझा कर रहे हैं :-
डायबिटीज के मरीज़ों को अक्सर व्यायाम की हिदायतें तो दी जातीं हैं लेकिन इसका सही तरीका नहीं बताया जाता इस सन्दर्भ में डॉक्टर गौरव जैन, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल बताते हैं :-
हरेक डायबिटीज के मरीज़ के लिए प्रत्यक्ष रूप से वजन नियंत्रण में रखना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, हालांकि वजन कम करने के तरीके हरेक मरीज के अनुसार अलग हो सकते हैं। अगर वजन सामान्य से अधिक नहीं हुआ तो शुगर लेवल नियंत्रण में रहने की सम्भावना तुलनात्मक रूप से बढ़ जायेगी।
नियमित खान पान के तरीके भी इस सन्दर्भ में अहम हैं। ऐसे में मील रिप्लेसमेंट थेरेपी बहुत कारगर हो सकती है, इसमें दरअसल मरीज़ को दिए जाने सप्लिमेंट्स भोजन करने से पहले दिए जाते हैं जिसकी सहायता से खाए जाने वाले भोजन को कम मात्रा में खाने की सम्भावना बढ़ जाती है और पोषण भी बना रहता है। अपने सम्बंधित डॉक्टर की सलाह से इस थेरेपी पर जरूर विचार करें।
व्यायाम के तौर पर विशेष रूप से याद रखें कि डायबिटीज के मरीज़ द्वारा किये गए व्यायाम में पहले 15 मिनट में ग्लायकोजिन बर्न होती है उसके बाद से शुगर लेवल घटना शुरू होता है। इसलिए 10 मिनट की सैर व अन्य बेहद हलके व्यायामों में पूर्ण समाधान न खोजें। लगातार दिन में कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें, अपनी क्षमता के अनुसार इस अवधि का विस्तार भी कर सकते हैं। लेकिन इस सन्दर्भ में भी हरेक कदम अपने सम्बंधित डॉक्टर की सलाह पर लें।
खान पान के तरीकों के सन्दर्भ में डॉक्टर साकेत कांत, सीनियर कंसल्टेंट, एंडोक्राइनोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट बताते हैं :-
खान- पान की यदि बात करें तो डायबिटीज के मरीजों को जूस की जगह साबुत फलों का सेवन करना चाहिए, क्योंकि जूस में उतने फाइबर नहीं रह जाते जितने एक साबुत फल से मिल सकते हैं इसलिए साबुत फल खाएं। यह फाइबर पाचन में और वजन को नियंत्रण में रखने में मदद करता है। साथ ही यही फाइबर कोलेस्ट्रोल की मात्रा नियंत्रित करने में मदद करता है। साबुत फल पेट भरे होने का अहसास भी देते हैं जिससे अतिरिक्त भूख लगने की सम्भावना कम होती है, जबकि जूस लेने पर यह सम्भावना कम या न के बराबर होती है। भोजन के बाद जूस लेने पर तुंरत शुगर बढ़ जाने की सम्भावना हो सकती है लेकिन जूस की जगह फल और उसमें मौजूद फाइबर इस सम्भावना को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
इसके अलावा छिलके समेत खाए जाने फलों को छीलने भर से भी विटामिन-बी काम्प्लेक्स कम हो जाता है, इसलिए ऐसे फल छिलके समेत खाएं। लेकिन यह भी ध्यान दें कि डायबिटीज के मरीजों को डाइट प्लान एक सामान्य रूप से बताना उचित नहीं है। इसका कारण है कि हरेक डायबिटीज के मरीज़ के साथ अलग अलग तरह की समस्याएं होतीं हैं या हो सकतीं हैं, इसलिए हरेक के परहेज़ भी अलग होते हैं इसलिए सामान्य जानकारी के बावजूद सम्बंधित डॉक्टर की सलाह पर ही अपना डाइट प्लान बनाएं।
डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों को किस तरह की हिदायतों का पालन करना चाहिए इस सन्दर्भ में जानकारी दे रहे हैं डॉक्टर स्वदेश कुमार, कंसल्टेंट एंड हेड ऑफ़ इमरजेंसी डिपार्टमेंट, नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल गुरुग्राम :-
एक डायबिटीज के मरीज़ के लिए सावधानीऔर परहेज बेहद जरूरी है, क्योंकि जरा सी असावधानी बहुत बड़े परिणामों में तब्दील हो सकती है। इसलिए खान पान व नियमित व्यायाम के अलावा कुछ बिंदु मुख्य रूप से याद रखें :-
यहां दो बातें मूल रूप से समझने वालीं हैं- अक्सर डायबिटीज के मरीज़ों में अनियमित रक्तचाप के कारण सेंसेशन या करें किसी स्पर्श या हल्की चोट महसूस होने की अनुभूति शरीर के कुछ हिस्सों में बहुत कम या न के बराबर हो जाती है, जिसके कारण बहुत मुमकिन है कि हलकी-फुल्की चोट का अहसास ही न हो। इसलिए अपने दैनिक क्रियाकलापों पर ध्यान दें। एक डायबिटीज के मरीज़ के लिए मामूली चोट भी बहुत बड़े संकट खड़े कर सकती है। एक डायबिटीज के मरीज़ में सामान्य व्यक्ति की तुलना में चोट लगने पर संक्रमण का, पस पड़ जाने का जोखिम बहुत ज्यादा होता है। इसलिए अपना शुगर लेवल नियंत्रण में रखने की भरपूर कोशिश करें और यदि दुर्घटनावश किसी डायबिटीज के मरीज़ को चोट लग जाती है तो खून का बहाव रोकने का प्राथमिक उपचार करके तुरंत अस्पताल की ओर रुख करें, ताकि संक्रमण व अन्य जोखिमों को रोका जा सके।
यह बिंदु बेहद आवश्यक है। अपने सम्बंधित डॉक्टर के साथ लगातार संपर्क में रहें और उनके परामर्श से इतर कुछ न करें। समय समय पर शुगर की जांच करवाएं। शुगर लेवल फास्टिंग के दायरे में 90 से 100 के बीच और पीपी यानी खाने के बाद 100 से 120 के बीच होना चाहिए।
याद रखें डायबिटीज के मरीज़ में उसकी रक्त वाहिकाएं, किडनी का संचालन, त्वचा आदि सभी का स्वस्थ्य जोखिम पर होता है इसलिए उचित ध्यान दिया जाना बेहद आवश्यक है। बहुत मुमकिन है इतनी सावधानियों के चलते अक्सर बहुत से डायबिटीज के मरीज़ मायूस हो जातें हैं, और तनाव का भी इन पर अतिरिक्त रूप से दुष्प्रभाव होता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि तमाम हिदायतों को बोझ समझा जाए। ऐसे बहुत से जाने माने खिलाड़ी, फिल्मस्टार व अन्य सेलेब्रिटीज़ हैं, जो डायबिटीज से जूझ रहे हैं लेकिन अपने अपने अपने जीवन के लक्ष्य की भी प्राप्ति कर रहे हैं। हमें इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
याद रखें सकारात्मक दृष्टिकोण व स्वस्थ जीवनशैली के साथ डायबिटीज के मरीज़ बहुत अच्छा जीवन जी सकते हैं, और बड़े-बड़े लक्ष्यों को भी साध सकते हैं।