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बलगम वाली खांसी, सीजनल खांसी और खांसने में आए खून तो तुरंत करें ये एक्सपर्ट टिप्स फॉलो, बच जाएगी जान

खांसी मामूली होने के साथ साथ अन्य गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकती हैं, या खुद ही कोई गंभीर परिणाम लेकर आ सकती हैं। स्वस्थ जीवन जीने की प्रक्रिया में स्वस्थ फेफड़ों का बहुत बड़ा योगदान होता है, ऐसे में खांसी जुखाम आदि फेफड़ों को कमजोर कर सकते हैं। इस स्थिति में इन एक्सपर्ट टिप्स को फॉलो करें।

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Written By: Jitendra Gupta | Updated : November 6, 2020 5:01 PM IST

आम तौर पर खांसी जुखाम को बहुत ही मामूली या छोटी मोटी बीमारी के दायरे में रखा जाता है, और घरेलू नुस्खे या उपाय करके निजात के तरीके भी अपनाए जाते हैं। यह कुछ हद तक सही भी हो सकता है, क्योंकि बहुत से केसेस में ये तुरंत ठीक भी हो जाते हैं। इसके अलावा कोविड संक्रमण का दौर शुरू होने के बाद से बहुत से खांसी जुखाम के मामलों में सीधा कोविड संक्रमण के डर से जोड़कर देखा जाने लगा। यहां इस समस्या के प्रति संतुलित जानकारी विकसित करने की है। खांसी मामूली होने के साथ साथ अन्य गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकतीं हैं, या खुद ही कोई गंभीर परिणाम लेकर आ सकती हैं। लम्बे स्वस्थ जीवन जीने की प्रक्रिया में स्वस्थ फेफड़ों का बहुत बड़ा योगदान होता है, ऐसे में खांसी जुखाम आदि फेफड़ों को कमजोर कर सकते हैं। इसलिए खांसी जुखाम में कैसे देखभाल की जाए और कैसी खांसी गंभीर हो सकती हैं, इस विषय के बारे में बता रही हैं दिल्ली स्थित नैचुरोपैथ एंड योग एक्सपर्ट शुद्धि नैचुरोपैथ क्लिनिक की डॉक्टर अंजलि शर्मा।

सीजनल खांसी जुखाम :-

इस तरह का खांसी ज़ुखाम एलर्जिक हो सकता है। यह 7 से 8 दिन में ठीक हो जाता है। लेकिन यदि यह इससे ज़्यादा रहे तो यह चिंता का विषय है। इसलिए यदि अभी के बदलते मौसम में जब सर्दियां आ चुकीं हैं अचानक खांसी की समस्या हो तो बेशक यह सीजनल खांसी हो सकती है लेकिन यदि खांसते वक्त जकड़न, दर्द या किसी तरह की तकलीफ हो तो बेहतर है तुरंत डॉक्टर की ही सलाह लें।

लंबी खांसी कर सकती है फेफड़े कमजोर :-

अक्सर कई लोगों को किसी रोग के कारण या किसी समस्या के चलते लगातार खांसी रह सकती है। ऐसे में अक्सर देखा जाता है लोग खांसते रहते हैं लेकिन डॉक्टर से परामर्श नहीं करते क्योंकि उनको बहुत हद तक रोजमर्रा के काम करने में कोई बहुत अधिक तकलीफ नहीं महसूस होती इसलिए वे लगातार होती खांसी को सामान्य मानकर उसी के साथ जीना शुरू कर देते हैं। बहुत से धूम्रपान व नशे की लत से जूझ रहे लोगों में अक्सर यह समस्या देखने को मिलती है। लेकिन याद रखें किसी भी प्रकार की खांसी फेफड़ों को तकलीफ देती है और उनपर अतिरिक्त दबाव बनाती है, जिसके चलते समय बीतने के साथ फेफड़े कमज़ोर होने लगते हैं। इसलिए भले ही किसी प्रकार की खांसी मामूली समस्या के चलते भी हो रही हो लेकिन लगातार रहने (आम तौर पर 15 दिनों से अधिक रहने) पर इस विषय में भी डॉक्टर से परामर्श लें।

बलगम वाली खांसी, जुखाम :-

इस तरह की खांसी को बिल्कुल नज़रंदाज़ न करें, हालाँकि यह मामूली बैक्टीरियल इन्फेक्शन से हो सकती है लेकिन डॉक्टर से परामर्श ही अंतिम विकल्प है। क्योंकि समस्या बढ़ने पर निमोनिया और टीबी में भी इसका परिणाम निकल सकता है। और यदि पहले से अस्थमा या सीओपीडी जैसी समस्या से जूझ रहें हैं तो परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं। इसलिए इस प्रकार की खांसी को नज़रअंदाज़ न करें।

खून वाली खांसी :-

इसमें कोई शक नहीं कि खांसी के साथ यदि खून निकल रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श ही अंतिम विकल्प है. क्योंकि यह टीबी, लंग कैंसर या मामूली केसेस में गले में हलके ज़ख्म आदि के भी लक्षण हो सकते हैं, लेकिन सही जानकारी व इलाज के लिए बिना देरी के डॉक्टर से परामर्श लें।

किसी भी प्रकार की खांसी 2 हफ्ते से अधिक हो जाए तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं तो जांच करवाएं। ताकि आने वाले जोखिम को रोका जा सके।

बीमारी भागने के लिए किसी भी घरेलु नुस्खे को यूं ही फॉलो करने की बजाय पहले बीमारी की गम्भीरता को समझें और बीमारी के अनुसार घरेलु नुस्खे अपनाने की बजाय सम्पूर्ण स्वास्थ्य और मौसमी मिजाज को ध्यान में रखकर अपनी जीवनशैली और खान पान में बदलाव लाएं जैसे:-

  • सर्दियां शुरू होते ही क्योंकि खांसी जुखाम की समस्या आम हो जाती है इसलिए अपने भोजन में सिट्रस यानी विटामिन सी युक्त पदार्थ जोड़ना शुरू कर दें।
  • विटामिन डी की कमी पूरी करने के लिए भी धूप में समय बिताएं।
  • जुखाम आदि की स्थिति में स्टीम लें और ढके हुए कपडे पहनें, ठंडी हवा के संपर्क में तुरंत न आएं।
  • यदि आपको सर्दियां शुरू होते ही खांसी या गला खराब होने की समस्या होने लगती है तो रोज़ सुबह उठकर गर्म पानी के गरारे करने की आदत डालें और यदि फिर भी आराम न हो तो डॉक्टर से परामर्श लें। बस ध्यान दें कि खांसी की स्थिति लगातार न बनी रहे।
  • सर्दियों में फ्रिज से तुरंत निकली चीज़ों का सेवन करने से परहेज़ करें। फ्रिज से चीज़ें निकाल कर रख दें और सामान्य तापमान पर आने पर उसका सेवन करे। पानी भी सर्दियों हल्का गुनगुना पीने की आदत डालें।
  • दही, छाछ आदि का फ्रेश सेवन करें, इन्हें फ्रिज से निकालकर तुरंत ठंडा न लें, सामान्य तापमान पर इनका सेवन करें।
  • एक क्वालिफाइड नैचुरोपैथ की सलाह पर दिन में एक या दो बार काढ़ा पियें।
  • योग, व्यायाम, प्राणायाम आदि में रूचि ले सकते हैं, क्योंकि इनसे भी फेफड़ों को भरपूर व्यायाम होता है और बीमारियों से राहत में मदद मिलती है।
  • एक क्वालिफाइड नैचुरोपैथ की सलाह पर जल नेति, वामन धौती क्रिया करें। सही दिशानिर्देशन में यदि की जाएँ तो ये क्रियाएं बहुत फायदेमंद होतीं हैं।
  • घर में डिफ्यूज़र की व्यवस्था करें। निर्देशानुसार उसमें कपूर, यूकेलिप्टस ऑइल आदि डाल कर बर्न करें। इससे फेफड़ों को सर्दी खांसी आदि में बहुत हद तक आराम मिलता है।
  • उपरोक्त विषयों में बच्चों और बुजुर्गों का विशेष रूप से ध्यान रखें।