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Low Back Pain and Common Causes: कमर में दर्द और रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में दर्द एक तकलीफभरी स्थिति है। यह दर्द पेल्विस और रिब्स के बीच के हिस्से (Area between the ribs and the pelvis) में महसूस होता है। इसमें हल्का दर्द, तेज दर्द, तकलीफ और परेशानी महसूस हो सकती है। पैथोलॉजी से जुड़े कारणों के अलावा आर्थराइटिस, मसल्स में तनाव और डिस्क्स को नुकसान होने के कारण भी कमर में दर्द महसूस हो सकता है। वहीं, लाइफस्टाइल से जुड़े कई कारण भी कमर और पीठ दर्द की समस्या को बढ़ा सकते हैं। इन कारण में मोटापा, एक्सरसाइज न करने की आदत और अनहेल्दी लाइफस्टाइल कमर दर्द के कुछ बड़े कारण भी बन गए हैं।
डॉ.अप्पीरेड्डीगरी हरिता (Dr.Appireddygari Haritha, Chief Physiotherapist,Dept(PMR), Aster CMI Hospital, Bangalore) के अनुसार, बैक पेन के ये कारण हो सकते हैं-
बहुत से लोग कई घंटों डेस्क पर बैठकर काम करते हैं। इससे उनका चलना-फिरना भी नहीं हो पाता और शरीर का पॉस्चर भी बिगड जाता है।
काम की जगह, खराब कुर्सी या बैठने की गलत व्यवस्था के कारण भी कमर और पीठ में दर्द बढ़ सकता है।
ट्रैफिक में बहुत देर तक रहने से भी लोगों को देर तक बैठने रहना पड़ता है और इससे पीठ की मांसपेशियों पर दबाव (causing strain on the back muscles) भी बढ़ता है।
सोने का गलत तरीका, गलत पॉस्चर, नींद की कमी और खराब बिस्तर जैसे कारणों से भी आपकी पीठ को नुकसान पहुंच सकता है।
भारी सामान उठाने से भी पीठ में दर्द हो सकता है।
आपके जूते अगर गलत साइज या गलत स्थिति के हैं तो उससे आपकी पीठ में दर्द हो सकता है।
प्रेगनेंस, मेंस्ट्रुअल क्रैम्प्स और बैक लेबर से भी पीठ में दर्द हो सकता है।
डॉ. हरिता कहती हैं कि, “कमर में दरद् के कारण आपको छोटे-मोटे काम करने में भी दिक्कतें आ सकती हैं। इससे लोगों के लिए कोई सामान उठाना या उठने-बैठने जैसे काम भी मुश्किल हो सकते हैं। कमर दर्द की पुरानी समस्या से स्ट्रेस (stress), एंग्जायटी ( anxiety) और डिप्रेशन (depression) भी बढ़ सकता है। वहीं,कमर में दर्द की वजह से बहुत से कामकाजी लोगों में काम से छुट्टी लेने और काम कर पाने में समस्या आती है। इससे हेल्थकेयर का खर्चा बढ़ता है और लोगों की कार्यक्षमता भी कम हो जाती है।”
पीठ के दर्द और कमर दर्द को कम करने के लिए फिजियोथेरेपी की मदद ली जा सकती है।
दर्द से आराम पाने के लिए आप एयरोबिक्स की प्रैक्टिस कर सकते हैं। यह फिटनेस बढ़ाने के साथ-साथ पीठ और कमर को भी लम्बे समय तक हेल्दी रखने में मदद होती है।
योग, पिलाटे और फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने वाली अन्य प्रकार की एक्सरसाइजेस करें।
अच्छी नींद सोने के लिए अच्छे, सपाट और आरामदायक गद्दे और तकिए का इस्तेमाल करें।
दिन में 2-3 लीटर पानी पीएं। हाइड्रेटेड रहें। इससे नसों और मसल्स को आराम मिलेगा औऱ दर्द कम होगा।
बैलेंस्ड और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट फॉलो करें।