अस्थमा मरीजों को रात में महसूस होते हैं ये 3 लक्षण, अच्छी नींद के लिए फॉलो करें ये एक्सपर्ट टिप्स

रात में अस्थमा से जुड़े लक्षण बढ़ जाते हैं और इसी वजह से ठीक तरह से सो पाने में तकलीफ हो सकती है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 8, 2024 11:37 PM IST

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Asthma Night Symptoms: अस्थमा के बहुत से मरीजों को रात में ठीक तरह से सो पाने में दिक्कतें होती हैं। दरअसल रात में अस्थमा से जुड़े लक्षण बढ़ जाते हैं और इसी वजह से ठीक तरह से सो पाने में तकलीफ हो सकती है। ऐसे में रात में ठीक तरह सो पाने के लिए एक लोगों को अपने स्लीपिंग साइकल पर ध्यान देने की जरूरत पड़ेगी। हालांकि अच्छी बात यह है कि, इस समस्या को कुछ बातों का ध्यान रखते हुए आसानी से मैनेज भी किया जा सकता है और आप आराम की नींद भी सो पाते हैं।

डॉ. राजेश भारद्वाज (Dr (major) Rajesh Bhardwaj- ENT Specialist, Vasant Vihar, Consults on Practo) बता रहे हैं कि कुछ टिप्स जिनकी मदद से अस्थमा के मरीज रात में दिखने वाले अस्थमा के लक्षणों को मैनेज कर पाते हैं और इसकी वजह से वे रात में ठीक तरीके से सो भी पाते हैं।

रात में दिखते हैं अस्थमा के ये लक्षण (Asthma symptoms seen in night)

रात में अस्थमा अटैक से बचने के उपाय (How to prevent Asthma attack in night)

अस्थमा के ट्रिगर्स को पहचानें

अस्थमा का अटैक अलग-अलग कारणों (causes of asthma attacks) से आ सकता है जैसे पराग कणों (pollen) से होने वाली पोलन एलर्जी, धूल ( dust), जानवरों के शरीर से गिरने वाली गंदगी, बाल और डैंड्रफ ( animal dander), धुआं ( smoke), फंफूद ( mold), सिगरेट का धुआं (cigarette), परफ्यूम्स ( fragrances) और सर्दी-खांसी या कॉमन कोल्ड जैसे इंफेक्शन्स आदि। इन्हें पहचानें और इनसे बचने की कोशिश करें।

शेड्यूल तय करें

स्लीपिंग पैटर्न को सुधारने के लिए एक शेड्यूल तय करें और और उसे फॉलो करें। उठने-सोने का समय तय करें। साथ ही छुट्टी वाले दिन और संडे को भी इस टाइम टेबल को फॉलो करें। अपने शरीर को नेचुरली उठने और समय पर जागने की आदत डालें।

कमरे में करें बदलाव

अपने कमरे में ऐसे परदे लगाए जिससे सूरज की रोशनी कमरे में ना आ सके। इससे कमर शांत, ठंडा और सूकूनभरा होगा। कमरे की नियमित सफाई भी करें जिससे कमरे में एलर्जी फैलाने वाली चीजें और गंदगी ना टिक सके।

रात में ना खाएं-पीएं ये सब

सोने से पहलेहेवी मील और चाय-कॉफी जैसी कैफीन वाली चीजों के सेवन से बचें।

इसी तरह अगर आप शाम को जिम जाते हैं या रात में एक्सरसाइज करते हैं  तो सोने से 2-3 घंटे पहले ही वर्कआउट खत्म कर लें।

अपनी दवाइयां और इंहेलर अपने आसपास ही रखें।

अस्थमा मरीज खुद को रखें शांत

डॉ. राजेश भारद्वाज कहते हैं कि खुद को शांत रख पाना, विशेषकर अस्थमा के मरीजों के लिए बहुत जरूरी है। इस भागदौड़भरे माहौल में स्ट्रेस लेने से अस्थमा के लक्षण गम्भीर रूप से ट्रिगर हो सकते हैं। ऐसे में रिलैक्शेसन टेक्निक्स (relaxation techniques) की मदद लेना आपकी मेंटल और फिजिकल हेल्थ के लिए महत्वपूर्ण है। खुद को रिलैक्स रखने के लिए आप इन टिप्स को फॉलो करें-

प्राणायाम जैसी डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइजेस करें। इससे आपके मसल्स पर दबाव कम होगा और आप रिलैक्स महसूस करेंगे।

दिन में थोड़ा समय खुली हवा में सैर करें। बाहर घूमने से, खुली जगह में योग करने से आपका मूड भी बेहतर होगा।

अस्थमा के मैनेजमेंट के लिए आपको ट्रिगर्स को पहचानने के साथ-साथ एक सपोर्ट सिस्टम तैयार करने की जरूरत पड़ेगी। जिसकी मदद से आप खुद को शांत रख सकें और अस्थमा को कंट्रोल में रख सकें।

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